केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी अधिसूचित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

सरकार ने किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रबी फसलों के MSP में वृद्धि की है। सबसे अधिक 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कुसुम के MSP में की गई है। इसके बाद रेपसीड एवं सरसों के MSP में 413 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। मसूर के MSP में 390 रुपये, जौ में 136 रुपये, चने में 83 रुपये और गेहूं में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं का MSP 2,610 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसका उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल है और लागत पर मार्जिन 106 प्रतिशत है। वर्ष 2026-27 में गेहूं का MSP 2,585 रुपये था, यानी इसमें 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है।

जौ का MSP 2,286 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसकी उत्पादन लागत 1,447 रुपये और लागत पर मार्जिन 58 प्रतिशत है। वर्ष 2026-27 में जौ का MSP 2,150 रुपये था और इसमें 136 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।

चना का MSP 5,958 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसकी उत्पादन लागत 3,751 रुपये और लागत पर मार्जिन 59 प्रतिशत है। वर्ष 2026-27 में चने का MSP 5,875 रुपये था, जिसमें 83 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है।

मसूर का MSP 7,390 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसकी उत्पादन लागत 3,854 रुपये और लागत पर मार्जिन 92 प्रतिशत है। वर्ष 2026-27 में मसूर का MSP 7,000 रुपये था और इसमें 390 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

रेपसीड एवं सरसों का MSP 6,613 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसकी उत्पादन लागत 3,367 रुपये और लागत पर मार्जिन 96 प्रतिशत है। वर्ष 2026-27 में इसका MSP 6,200 रुपये था, यानी इसमें 413 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है।

कुसुम का MSP 7,215 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसकी उत्पादन लागत 4,810 रुपये और लागत पर मार्जिन 50 प्रतिशत है। वर्ष 2026-27 में कुसुम का MSP 6,540 रुपये था और इसमें 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।

सरकार के अनुसार, अधिसूचित रबी फसलों के MSP में यह वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर तय करने की बात कही गई थी। अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर गेहूं के लिए अपेक्षित मार्जिन 106 प्रतिशत, रेपसीड एवं सरसों के लिए 96 प्रतिशत, मसूर के लिए 92 प्रतिशत, चने के लिए 59 प्रतिशत, जौ के लिए 58 प्रतिशत और कुसुम के लिए 50 प्रतिशत है।

सरकार ने कहा है कि रबी फसलों के MSP में वृद्धि से किसानों को लाभकारी मूल्य मिलेगा और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा। हाल के वर्षों में सरकार अनाज के अलावा दलहन और तिलहन जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा दे रही है और इन फसलों के लिए अपेक्षाकृत अधिक MSP उपलब्ध करा रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद बढ़कर 3,715 लाख मीट्रिक टन हो गई, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,254 लाख मीट्रिक टन थी। इसी अवधि में छह रबी फसलों की खरीद 3,921 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,302 लाख मीट्रिक टन थी।

गेहूं उत्पादक किसानों को 2014-15 से 2025-26 के दौरान MSP के रूप में 7.31 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि 2.56 लाख करोड़ रुपये थी। छह रबी फसलों के किसानों को 2014-15 से 2025-26 के दौरान MSP के रूप में 8.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि 2.65 लाख करोड़ रुपये थी।

उत्पादन लागत में मजदूरी, पट्टे पर ली गई भूमि का किराया, बीज, उर्वरक, खाद, सिंचाई शुल्क, कृषि उपकरण और कृषि भवनों पर मूल्यह्रास, कार्यशील पूंजी पर ब्याज, पंप सेट संचालन के लिए डीजल और बिजली, विविध खर्च तथा पारिवारिक श्रम का अनुमानित मूल्य सहित सभी भुगतान की गई लागतों को शामिल किया गया है।

Pratahkal Newsroom

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