भारतीय रेल की प्रतिष्ठित पंजाब मेल ने 115वें वर्ष में प्रवेश किया। विरासत और आधुनिक सुविधाओं के साथ ट्रेन का किया गया विशेष कायाकल्प।

1912 में बालार्ड पियर मोल स्टेशन से शुरू हुई पंजाब मेल, जो अब अपने 115वें गौरवशाली वर्ष में है। यह ऐतिहासिक तस्वीर बॉम्बे के तत्कालीन रेलवे परिदृश्य को दर्शाती है (स्रोत: WhatsApp Image 2026-06-01 at 8.34.58 PM.jpg)।
भारतीय रेल के इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित और पुरानी ट्रेनों में शुमार पंजाब मेल ने 1 जून 2026 को अपनी सेवा के 115वें गौरवशाली वर्ष में प्रवेश कर लिया है। इस ऐतिहासिक पड़ाव को चिह्नित करते हुए, 12137 मुंबई-फिरोजपुर पंजाब मेल ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) से प्रस्थान कर अपनी 114 वर्षों की अविराम सेवा पूर्ण की।
इस विशेष अवसर पर पंजाब मेल का व्यापक कायाकल्प किया गया है। ट्रेन के प्रथम श्रेणी वातानुकूलित (AC) व द्वितीय श्रेणी (AC-2) मिश्रित कोच और पैंट्री कार को विरासत-थीम वाले दृश्यों के साथ विनाइल रैपिंग से सुसज्जित किया गया है। सांस्कृतिक एकीकरण के तहत, 1912 की विरासत, महाराष्ट्र-पंजाब के संबंध और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी यादों को जीवंत किया गया है, जिसमें CSMT, गेटवे ऑफ इंडिया और स्वर्ण मंदिर के स्क्रीन प्रिंट शामिल हैं। वातानुकूलित कोचों के भीतर वाटरप्रूफ कैनवास प्रिंट्स एक संग्रहालय जैसा अनुभव प्रदान करते हैं। स्वच्छता के मानकों को और अधिक उन्नत करते हुए ऑटो एयर फ्रेशनर, सीट कवर डिस्पेंसर, बेहतर बिब कॉक, सोप डिस्पेंसर और स्क्रैपर मैट्स की सुविधा प्रदान की गई है। साथ ही, बेहतर टिकाऊपन के लिए गैंगवे, दरवाजे और प्रसाधन कक्षों में विनाइल रैपिंग की गई है।
पंजाब मेल की इस गौरवगाथा का उत्सव 27 मार्च 2026 को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर 'ट्रेन महोत्सव' के अंतर्गत मनाया गया, जिसमें यात्रियों, रेलवे अधिकारियों और रेल प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। इस दौरान प्रस्तुत ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति ने ट्रेन की ऐतिहासिक यात्रा और भारतीय रेल में इसके अग्रणी योगदान को रेखांकित किया।
पंजाब मेल की नींव 1 जून 1912 को बॉम्बे के बालार्ड पियर मोल स्टेशन पर रखी गई थी, जो उस समय ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (GIPR) की सेवाओं का मुख्य केंद्र था। प्रारंभ में, यह ट्रेन निर्धारित मेल के दिनों में बॉम्बे से पेशावर तक 2,496 किलोमीटर की दूरी लगभग 47 घंटों में तय करती थी। 1914 में, इसका परिचालन बॉम्बे वीटी (अब CSMT) से शुरू हुआ और यह 1,541 किलोमीटर के बॉम्बे-दिल्ली मार्ग पर 29 घंटे 30 मिनट में दौड़ने वाली दैनिक सेवा बन गई। 1920 के दशक में यात्रा समय घटकर 27 घंटे 10 मिनट हो गया था, हालांकि 1972 में अतिरिक्त स्टॉपेज के कारण इसे 29 घंटे कर दिया गया। वर्तमान में, पंजाब मेल मुंबई से फिरोजपुर छावनी के बीच 1,928 किलोमीटर की दूरी 52 स्टेशनों पर रुकते हुए 33 घंटे 35 मिनट में तय करती है।
तकनीकी विकास के क्रम में, 1912 में छह कोचों से शुरू हुई इस ट्रेन में 1930 के दशक में तृतीय श्रेणी के कोच और 1945 में वातानुकूलित कोच जोड़े गए। 1968 में इसे झांसी तक डीजल चालित किया गया और 1976 तक फिरोजपुर तक विस्तारित किया गया। 1980 के दशक के आसपास, इसे इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर चलाने के लिए WCAM/1 इंजनों का उपयोग हुआ। 1 दिसंबर 2020 से यह ट्रेन पूरी तरह से आधुनिक LHB कोचों के साथ चल रही है। वर्तमान में 250 प्रतिशत से अधिक ऑक्यूपेंसी के साथ चलने वाली इस ट्रेन में 1 AC फर्स्ट क्लास कम AC-2 टियर, 2 AC-2 टियर, 6 AC-3 टियर, 6 स्लीपर क्लास, 4 जनरल सेकंड क्लास कोच, 1 जनरेटर वैन और 1 SLR कोच शामिल हैं। मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला द्वारा जारी यह प्रेस विज्ञप्ति पंजाब मेल की निरंतर सेवा और भारतीय रेलवे के प्रति इसकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

