premium train delay 2026 india : देश की प्रमुख प्रीमियम ट्रेनें—वंदे भारत, राजधानी और तेजस—अपने समयपालन और उच्च गति के लिए जानी जाती हैं, लेकिन हाल के महीनों में उत्तर भारत के कई रूटों पर ये ट्रेनें 6 से 12 घंटे तक लेट पहुंच रही हैं। यह स्थिति न केवल यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनी है, बल्कि भारतीय रेलवे के परिचालन ढांचे पर भी सवाल खड़े कर रही है। क्या इसके पीछे केवल उत्तर भारत का घना कोहरा जिम्मेदार है या अन्य व्यवस्थित कारण भी हैं, यह जानना महत्वपूर्ण है।

उत्तर भारत में सर्दियों के मौसम में घना कोहरा रेलवे परिचालन के लिए चुनौती बन जाता है। दृश्यता कई बार 50 मीटर से भी कम रह जाती है, जिससे लोको पायलट को सिग्नल देखने में कठिनाई होती है और सुरक्षा के लिहाज से ट्रेन की रफ्तार कम करनी पड़ती है। कई बार ट्रेनों को स्टेशन पर रोकना भी जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कोहरा अहम वजह है, लेकिन अकेला कारण नहीं है।

रेलवे ट्रैक का रखरखाव और बुनियादी ढांचे में सुधार कार्य भी प्रीमियम ट्रेनों की समयपालन क्षमता पर असर डालते हैं। कुछ रूटों पर ट्रैक सुधार कार्य के कारण ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाता है या कुछ समय के लिए रोका जाता है, जिससे निर्धारित समय से बहुत पीछे चलना पड़ता है। इसके अलावा, आधुनिक सिग्नल सिस्टम और इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में तकनीकी खराबियां—जैसे सिग्नल फेल होना या इंजन से जुड़ी समस्याएं—भी ट्रेन की देरी का कारण बनती हैं।

व्यस्त रूट और ट्रेनों की प्राथमिकता का मुद्दा भी देरी में योगदान देता है। कई व्यस्त मार्गों पर एक ट्रेन के लेट होने से पीछे चल रही अन्य ट्रेनें प्रभावित होती हैं। कभी-कभी मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे यात्री ट्रेनें—यहां तक कि प्रीमियम ट्रेनें भी—साइड में खड़ी हो जाती हैं। त्योहारों और छुट्टियों के दौरान स्टाफ की कमी भी परिचालन बाधाओं को और बढ़ा देती है।

भारतीय रेलवे इस स्थिति से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। वंदे भारत, शताब्दी और राजधानी जैसी ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेक तैयार रखे गए हैं, ताकि किसी तकनीकी या परिचालन समस्या की स्थिति में सेवाएं प्रभावित न हों। सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए मौसम साफ होने तक गति नियंत्रण और अन्य आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। रेलवे का स्पष्ट कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

इस स्थिति ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रीमियम ट्रेनें समय पर चलाने के लिए केवल मौसम ही नहीं बल्कि रेलवे के बुनियादी ढांचे, तकनीकी तैयारी और परिचालन योजना की मजबूती भी उतनी ही जरूरी है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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