भारतीय रेल के नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में उत्तर पश्चिम रेलवे ने आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग से संरक्षा व्यवस्था को एक नए आयाम पर पहुंचा दिया है। रेल संचालन को पूरी तरह निष्कंटक और सुगम बनाने के लिए ट्रैक, सिग्नलिंग प्रणाली तथा समपार फाटकों पर युद्धस्तर पर व्यापक सुधार कार्य किए जा रहे हैं। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने इस संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि संरक्षा को और अधिक सुदृढ़ व मजबूत करने के उद्देश्य से पूरे जोन में अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश कर बुनियादी ढांचे का कायाकल्प किया जा रहा है, जिससे रेल संचालन की विश्वसनीयता कई गुना बढ़ गई है।

तकनीकी सुदृढ़ीकरण के इस महाअभियान के अंतर्गत अकेले अप्रैल माह में उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा लगभग 19 ट्रैक किलोमीटर का सीटीआर (कम्पलीट ट्रैक रिन्यूअल) कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इसके साथ ही रेल पटरियों की मजबूती और ट्रेनों के सुरक्षित डायवर्जन को सुनिश्चित करने के लिए 30 टर्न-आउटों का नवीकरण किया गया तथा अत्याधुनिक तकनीक वाले 18 थिक वेब स्विच स्थापित किए गए। रेल पटरियों के स्थायित्व, सुचारू जल निकासी और संचालन की विश्वसनीयता को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए 18 टर्न-आउटों की डीप स्क्रीनिंग का कार्य भी निष्पादित किया गया, जिससे पटरियों की लाइफ और सुरक्षा दोनों में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।

रेलवे प्रशासन द्वारा रेल एवं सड़क यातायात दोनों की संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समपार फाटकों पर सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक प्रभावी और चाक-चौबंद बनाया गया है। इसके तहत समपार फाटकों को आधुनिक सिग्नल प्रणाली से इंटरलॉक किया गया है तथा आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए फाटकों पर स्लाइडिंग बूम स्थापित किए गए हैं। इन तकनीकी सुधारों के समानांतर ही रेलवे द्वारा “संरक्षा सुदृढ़ करने का कर्तव्य” विषय पर एक विशेष संरक्षा अभियान चलाकर पूरे तंत्र में संरक्षा चेतना को गहराई से स्थापित करने का महती कार्य किया गया।

उत्तर पश्चिम रेलवे ने अपनी इस सुरक्षा चेतना को न केवल रेल परिसरों और कर्मचारियों तक सीमित रखा, बल्कि इसे जन-जन का अभियान बनाते हुए आमजन तक भी सुरक्षा संदेश पहुंचाने का भगीरथ प्रयास किया। इसके तहत रेलमार्ग के आस-पास स्थित ग्राम पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों, पेट्रोल पंपों, ढाबों तथा बस एवं टैक्सी स्टैंडों पर विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाए गए। समपार फाटकों से गुजरने वाले सड़क उपयोगकर्ताओं को दुर्घटनाओं से बचाने के लिए पेम्फलेट वितरित कर समपार सुरक्षा नियमों के प्रति गंभीर रूप से जागरूक किया गया। इस पूरी व्यवस्था की जमीनी हकीकत परखने और संरक्षा तंत्र को शत-प्रतिशत प्रभावी बनाने के लिए उच्च रेलवे अधिकारियों द्वारा उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर, बीकानेर, जयपुर एवं जोधपुर मंडलों में सघन संरक्षा निरीक्षण भी किए गए।

संरक्षा को केवल कागजों या निर्देशों तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक आचरण में ढालने की दिशा में रेल कर्मचारियों की दक्षता को लगातार तराशा जा रहा है और उन्हें नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसी कड़ी में अप्रैल माह के दौरान कुल 541 रेल कर्मचारियों ने पुनश्चर्या (रिफ्रेशर) प्रशिक्षण प्राप्त किया, जबकि 356 कर्मचारियों ने अन्य विशिष्ट सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रियता से भाग लेकर अपनी कार्यकुशलता और तकनीकी दक्षता को और अधिक मजबूत किया। आधुनिक तकनीक के समावेश, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सतत मॉनिटरिंग और व्यापक जनसहभागिता के त्रिवेणी संगम के माध्यम से उत्तर पश्चिम रेलवे देश में एक सुरक्षित, संरक्षित एवं अत्यंत विश्वसनीय रेलसेवा प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के साथ अग्रसर है।

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