उत्तर पश्चिम रेलवे में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने ट्रेनों और रेल परिसर में अपराधों की रोकथाम के लिए एकीकृत सुरक्षा प्रणाली के माध्यम से कार्रवाई तेज करते हुए एक माह में रेलवे अधिनियम के उल्लंघन के 1407 मामले दर्ज किए। इन मामलों में 1330 व्यक्तियों के विरुद्ध रेल अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई और 3,43,300 रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसके अलावा 15 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया तथा 99,323 रुपये की रेल संपत्ति बरामद की गई। यात्री सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी आरपीएफ को सफलता मिली है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री पंकज शर्मा के मार्गदर्शन में रेलवे सुरक्षा बल ट्रेनों और रेल परिसर में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्य कर रहा है। सेवा ही संकल्प के तहत आईजी-सह-प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त श्री ज्योति कुमार सतीजा के नेतृत्व में आरपीएफ रेल परिसर, यात्रियों और रेलवे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न अभियान चला रहा है। इन अभियानों के माध्यम से रेल यात्रियों को अलग-अलग परिस्थितियों में सहायता और सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन के अनुसार, आरपीएफ ने एकीकृत सुरक्षा प्रणाली लागू कर ट्रेनों और रेल परिसर में अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्रवाई की है। एक माह के दौरान रेलवे अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े 1407 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में 1330 व्यक्तियों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए 3,43,300 रुपये का जुर्माना वसूला गया। वहीं, 15 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर 99,323 रुपये की रेल संपत्ति बरामद की गई।

यात्रियों के सामान की चोरी के मामलों में भी आरपीएफ ने कार्रवाई की। सूरतगढ़ स्टेशन पर गत माह रेल परिसर में सो रहे एक यात्री की जेब से दो मोबाइल फोन चोरी हो गए थे। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इस वारदात का खुलासा किया गया। इसके बाद आरोपी को तुरंत पकड़ लिया गया और चोरी किए गए मोबाइल फोन बरामद कर लिए गए।

आरपीएफ की टीमों ने यात्रियों की सुरक्षा के साथ मानवीय जिम्मेदारी निभाते हुए एक माह में 70 लावारिस बच्चों, महिलाओं और पुरुषों को उनके परिजनों, गैर सरकारी संगठनों अथवा पुलिस के सुपुर्द किया। बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के लिए चलाए जा रहे ‘नन्हे फरिश्ते’ अभियान के तहत घर से बिना बताए निकले और भटक चुके बच्चों की सहायता की गई। इन बच्चों को बाल तस्करी का शिकार होने से बचाया गया।

रेलवे परिसर और ट्रेनों में छूटे सामान को यात्रियों तक पहुंचाने के लिए भी कार्रवाई की गई। एक माह के दौरान सामान छूटने के 146 मामलों में संबंधित यात्रियों को उनका सामान सुपुर्द किया गया। इसके साथ ही यात्रियों के सामान की चोरी के 24 मामलों में आरोपियों को पकड़ा गया।

रेलवे सुरक्षा बल ने रेल परिसर में धूम्रपान करने, ट्रेन की छत या पायदान पर यात्रा करने और परिसर में गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई की। रेलवे अधिनियम के उल्लंघन पर जुर्माना वसूलने से लेकर चोरी की घटनाओं का खुलासा करने और लावारिस बच्चों एवं अन्य व्यक्तियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने तक, आरपीएफ ने विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की।

उत्तर पश्चिम रेलवे के अंतर्गत आरपीएफ यात्रियों, रेलवे संपत्ति और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ जरूरतमंद बच्चों एवं अन्य व्यक्तियों की सहायता करने के लिए अभियान चला रहा है। रेलवे सुरक्षा बल ने यात्रियों की सुरक्षा और समाज के प्रति अपने मानवीय कर्तव्यों के निर्वहन के प्रति प्रतिबद्धता जताई है।

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