पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे: शिमलगुड़ी-मराणहाट सेक्शन में कर्व पुनर्संरेखण कार्य पूरा
तिनसुकिया मंडल के इस सेक्शन में 3-डिग्री कर्व को 2-डिग्री में बदलने से 110 कि.मी./घंटा की गति सीमा बहाल, पीएसआर स्थायी रूप से हटा।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे द्वारा तिनसुकिया मंडल के शिमलगुड़ी-मराणहाट सेक्शन में 500 मीटर लंबे कर्व का पुनर्संरेखण कार्य पूरा किया गया, जिससे ट्रेनों की गति में वृद्धि हुई।
मालीगांव। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने तिनसुकिया मंडल के अंतर्गत शिमलगुड़ी-मराणहाट सेक्शन में स्थायी गति प्रतिबंध (पीएसआर) को समाप्त करने के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण कर्व पुनर्संरेखण परियोजना को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। इस अवसंरचनात्मक सुधार के माध्यम से रेलवे ने सुरक्षित और तेज यात्रा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। परियोजना के तहत, मौजूदा 3-डिग्री कर्व को बदलकर अधिक सुगम 2-डिग्री कर्व में परिवर्तित किया गया, जो रेल परिचालन की गुणवत्ता में सुधार के लिए अनिवार्य था।
इस जटिल इंजीनियरिंग कार्य के निष्पादन के दौरान, मौजूदा 3-डिग्री कर्व को लगभग 500 मीटर लंबी नवनिर्मित संरचना पर बिछाए गए नव-संरेखित 2-डिग्री कर्व के साथ सुचारु रूप से जोड़ा गया। इस प्रक्रिया में रेल पटरियों को अधिकतम 7.7 मीटर तक विस्थापित किया गया। तकनीक के साथ-साथ संरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए, रेलवे ने ओएचई (ओवरहेड उपकरण) मास्ट और वॉयर को भी कुशलतापूर्वक स्थानांतरित किया।
इस महत्वपूर्ण कार्य के पूर्ण होने से 500 मीटर लंबे सेक्शन पर लागू 95 कि.मी./घंटा की स्थायी गति प्रतिबंध (पीएसआर) को स्थायी रूप से हटा दिया गया है। अब यह सेक्शन 110 कि.मी./घंटा की अधिकतम परमिशिब्ल स्पीड (एमपीएस) के लिए पूरी तरह उपयुक्त हो गया है। एनएफआर द्वारा किया गया यह सुधार न केवल रेल संचालन को गति प्रदान करेगा, बल्कि यात्रियों के लिए यात्रा के समय में बचत और बेहतर परिचालन दक्षता सुनिश्चित करते हुए तिनसुकिया मंडल के रेल नेटवर्क की क्षमता को भी सुदृढ़ करेगा।

