नागपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर उस समय एक संवेदनशील और मानवीय दृश्य देखने को मिला, जब कर्तव्य पर तैनात हेड टिकट परीक्षक श्री प्रवीण लोंढे की सतर्कता ने एक भटके हुए किशोर की जिंदगी को सुरक्षित दिशा दे दी। स्टेशन परिसर में संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे एक किशोर पर जब उनकी नज़र पड़ी, तो उन्होंने बिना समय गंवाए उससे पूछताछ की। इस किशोर ने अपनी पहचान गोंडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले मोहम्मद आसिफ के रूप में बताई, जो मोहम्मद याकूब का पुत्र है।

किशोर ने भावुक होकर बताया कि वह पिछले दो महीनों से रोजगार की तलाश में नागपुर में भटक रहा था। घर पर उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था, जिस कारण वह अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहा था। श्री प्रवीण लोंढे ने न केवल उस बालक की स्थिति को समझा, बल्कि तुरंत उसे भोजन और पेयजल उपलब्ध कराकर उसकी तत्कालिक जरूरतों को पूरा किया। रेलवे के कर्मचारियों द्वारा दिखाई गई यह मानवीय संवेदनशीलता ने न केवल किशोर को ढांढस बंधाया, बल्कि उसके सुरक्षित भविष्य की नींव भी रखी।

किशोर के पास उपलब्ध संपर्क सूत्रों के माध्यम से उसके परिजनों से तत्काल संवाद स्थापित किया गया। रेलवे प्रशासन ने न केवल उसे सांत्वना दी, बल्कि परिजनों को भी नागपुर आकर उसे घर ले जाने का आग्रह किया। निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, इस किशोर को आगे की कानूनी प्रक्रियाओं और सुरक्षा हेतु चाइल्ड हेल्पलाइन को सुपुर्द कर दिया गया है। फिलहाल, वह चाइल्ड केयर हेल्पलाइन की देखरेख में है, जहां वह तब तक सुरक्षित रहेगा जब तक उसके परिवार वाले उसे लेने नहीं आ जाते। मध्य रेलवे के नागपुर मंडल ने श्री प्रवीण लोंढे के इस सराहनीय कार्य की प्रशंसा करते हुए इसे जनसेवा के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक बताया है। यह घटना रेलवे कर्मचारियों की न केवल व्यावसायिक सतर्कता, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति उनकी संवेदनशीलता को भी रेखांकित करती है।

Pratahkal Newsroom

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