मुंबई मानसून: रेलवे पटरियों के नीचे नालों की सफाई के लिए रिमोट कंट्रोल मशीनों का होगा उपयोग
बीएमसी स्थायी समिति ने तंग कल्व्हर्ट से गाद निकालने के लिए आधुनिक मशीनों को दी मंजूरी, सायन और माटुंगा जैसे निचले इलाकों को जलजमाव से मिलेगी राहत।

मुंबई में मानसून पूर्व तैयारियों के तहत रेलवे पटरियों के नीचे स्थित संकरे नालों की सफाई करती अत्याधुनिक रिमोट कंट्रोल स्विंग लोडर मशीन।
प्रातःकाल संवाददाता, मुंबई। मुंबई में मानसून की दस्तक में अब दो महीने से भी कम का समय बचा है, जिसे देखते हुए महानगरपालिका ने जलभराव की समस्या से निपटने के लिए अपनी कमर कस ली है। हाल ही में हुई स्थायी समिति की बैठक में रेलवे की सीमा के भीतर आने वाले कल्व्हर्ट की सफाई का मुद्दा गरमाया रहा। शिवसेना के नगरसेवक यशोधर फणसे ने इस महत्वपूर्ण विषय पर प्रशासन की तैयारियों को लेकर सवाल खड़े किए।
अत्याधुनिक मशीनों से होगी तंग नालों की सफाई
इस पर सफाई देते हुए अतिरिक्त आयुक्त विपिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि "रेलवे ट्रैक के नीचे स्थित उन तंग नालों की सफाई करना बीएमसी की जिम्मेदारी है, जहाँ इंसानों का पहुँचना मुश्किल होता है।" ऐसी जगहों के लिए प्रशासन अब अत्याधुनिक 'रिमोट कंट्रोल मशीनों' का सहारा ले रहा है। स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने चर्चा के बाद इन मशीनों के उपयोग और सफाई के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
जलजमाव वाले संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
बैठक के दौरान सायन, माटुंगा, चुनाभट्टी और सिंधी कॉलोनी जैसे निचले इलाकों में होने वाले जलजमाव पर गहरी चिंता जताई गई। इन क्षेत्रों की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि यहाँ रेलवे कल्व्हर्ट में गाद जमा होने से बारिश का पानी जल्दी नहीं निकल पाता। नगरसेविका राजेश्री शिरवडकर ने प्रशासन से इन मशीनों के कार्य का प्रत्यक्ष प्रदर्शन दिखाने की भी मांग की।
प्रभावी कचरा प्रबंधन और भविष्य की उम्मीद
बीएमसी का मानना है कि 'रिमोट कंट्रोल्ड स्विंग लोडर मशीन' के जरिए बंद नालों से प्रभावी ढंग से कचरा निकाला जा सकेगा। अब देखना यह है कि आधुनिक तकनीक का यह उपयोग मुंबईवासियों को इस बार जलजमाव से कितनी राहत दिला पाता है।

Pratahkal Bureau
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