महाराष्ट्र: राजस्व रिकॉर्ड में 'भारत सरकार, रेलवे' के नाम होगी रेल भूमि
राज्य सरकार ने रेलवे भूमि के स्वामित्व को स्पष्ट करने और अतिक्रमण रोकने के लिए ग्राम 7/12 और प्रॉपर्टी कार्ड को अपडेट करने का विशेष अभियान शुरू किया है।

मध्य रेलवे द्वारा जारी सूचना के अनुसार, महाराष्ट्र के राजस्व और वन विभाग ने रेलवे संपत्तियों के लिए स्वतंत्र सर्वेक्षण और गट क्रमांक आवंटित करने का निर्णय लिया है।
महाराष्ट्र शासन के महसूल और वन विभाग द्वारा पूरे राज्य में रेलवे भूमि स्वामित्व से संबंधित रिकॉर्डों को सुव्यवस्थित और अद्यतन करने के लिए एक महत्वपूर्ण शासन निर्णय जारी किया गया है। शासन ठराव क्रमांक संकीर्ण-2025/पी.आर.236/भूमापन/ई-1346038 दिनांक 07.05.2026 के तहत यह निर्णय लिया गया है कि राज्यभर के ग्राम नकाशों और महसूल अभिलेखों में “भारत सरकार, रेलवे” के नाम से रेलवे भूमि की नोंदणी सुनिश्चित की जाएगी।
इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य आवश्यकतानुसार स्वतंत्र सर्वेक्षण क्रमांक, गट क्रमांक एवं शहर सर्वेक्षण क्रमांक प्रदान कर ग्राम फॉर्म 7/12, प्रॉपर्टी कार्ड, ग्राम नकाशे एवं अन्य भूमि अभिलेखों को पद्धतिगत रूप से अद्यतन करना है। यह प्रक्रिया रेलवे भूमि के स्वामित्व से जुड़े अभिलेखों को स्पष्ट एवं कानूनी रूप से सुदृढ़ बनाएगी।
स्वातंत्र्यपूर्व काल से मौजूद रेलवे मार्गों और भारतीय रेलवे द्वारा समय-समय पर अधिग्रहित भूमि के बावजूद, कई स्थानों पर महसूल रिकॉर्ड अद्यतन नहीं होने के कारण ग्राम नमुना 7/12 और प्रॉपर्टी कार्ड में स्वामित्व संबंधी स्पष्ट नोंद नहीं थी। कई मामलों में रेलवे भूमि को सड़क या पथ के रूप में दर्शाया गया, जबकि अधिग्रहण की जानकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं थी। इससे अतिक्रमण, विवाद और न्यायालयीन प्रकरणों की स्थिति उत्पन्न हुई।
रेलवे की मांगों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अब भू-अभिलेखों के व्यापक अद्यतनीकरण की विशेष मोहीम शुरू करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के तहत मूल सर्वेक्षण नकाशों एवं भू-अभिलेखों की जांच कर “भारत सरकार, रेलवे” के नाम से स्वतंत्र 7/12 नोंदियाँ खोली जाएंगी तथा आवश्यकतानुसार अलग सर्वेक्षण अथवा गट क्रमांक प्रदान किए जाएंगे।
जहां स्वामित्व विवरण उपलब्ध नहीं है, वहां समेकन एवं पुनर्सर्वेक्षण योजनाओं में रेलवे स्वामित्व को शामिल किया जाएगा। रेलवे विस्तार क्षेत्रों और अधिग्रहण पश्चात की नोंदियाँ भी “भारत सरकार, रेलवे” के नाम से अद्यतन की जाएंगी। वहीं, जिन मामलों में “कम-जास्त पत्रक” के बावजूद 7/12 में परिवर्तन दर्ज नहीं हुआ है, उन्हें तत्काल अद्यतन किया जाएगा।
जिलाधिकारी एवं भूमि अधिग्रहण अधिकारियों के आदेशों, नकाशों एवं ताबा दस्तावेजों के आधार पर नए रेलवे मार्गों एवं स्टेशनों से संबंधित छूटी हुई नोंदियों को भी सम्मिलित किया जाएगा। गलत रूप से सड़क या पथ के रूप में वर्गीकृत रेलवे भूमि को सत्यापन के बाद संशोधित किया जाएगा तथा पुराने नकाशों में बिंदु स्वरूप सीमाओं को स्थायी सीमाओं में परिवर्तित किया जाएगा।
शहरी क्षेत्रों में रेलवे स्टेशन, मार्ग एवं अन्य संपत्तियों के लिए अलग प्रॉपर्टी कार्ड “भारत सरकार, रेलवे” के नाम से खोले जाएंगे। इसके साथ ही जिला प्रशासन, महसूल एवं भूमि अभिलेख विभाग संयुक्त रूप से राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाकर रेलवे भूमि अभिलेखों को अद्यतन करेंगे।
इस निर्णय से रेलवे भूमि के स्वामित्व में स्पष्टता आएगी और कानूनी स्वामित्व सुरक्षित होगा। मुंबई, ठाणे, पुणे एवं नागपुर जैसे उच्च घनत्व वाले शहरी क्षेत्रों में अतिक्रमण पर नियंत्रण मजबूत होगा तथा न्यायालयीन विवादों में कमी आएगी। साथ ही, स्टेशन पुनर्विकास, लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं, लीज और व्यावसायिक विकास के माध्यम से राजस्व सृजन की संभावनाएँ बढ़ेंगी। भविष्य की रेल परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया भी अधिक सुगम और सुव्यवस्थित हो सकेगी।
यह प्रेस विज्ञप्ति डॉ. स्वप्नील निला, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, मध्य रेल्वे द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई से जारी की गई है।

Pratahkal Bureau
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