चलती ट्रेन में महिला का सुरक्षित प्रसव, मध्य रेल के रनिंग स्टाफ ने की मदद
एलटीटी-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस में प्रसव पीड़ा होने पर रनिंग स्टाफ और महिला यात्रियों ने मिलकर कराया सुरक्षित प्रसव, जच्चा-बच्चा को हरदा स्टेशन पर अस्पताल भेजा।

भारतीय रेल यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के साथ-साथ संकट की घड़ी में उनके लिए एक मजबूत सहारा भी साबित हो रही है। ऐसा ही एक संवेदनशील और दिल छू लेने वाला मामला ट्रेन संख्या 15945 लोकमण्या तिलक टर्मिनस (एलटीटी)-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस में सामने आया है, जहां मध्य रेल के रनिंग स्टाफ ने अपनी सूझबूझ, तत्परता और सह-यात्रियों की मदद से एक गर्भवती महिला का चलती ट्रेन में सुरक्षित प्रसव कराया।
यह घटना 30 मई 2026 की शाम की है, जब ट्रेन भुसावल और इटारसी के बीच दौड़ रही थी। शाम करीब 5:25 बजे रवि चौधरी नामक एक यात्री ने भुसावल के ट्रेन कंडक्टर श्री एस. पी. फिरके और ट्रेन टिकट परीक्षक (टीटीई) श्री अम्बरीष कुमार तिवारी से बेहद घबराए हुए हालात में संपर्क किया। रवि ने उन्हें बताया कि उनकी पत्नी ज्योति को अचानक बेहद तेज प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) शुरू हो गई है और उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए रनिंग स्टाफ की टीम ने बिना एक पल गंवाए तुरंत मोर्चा संभाला। कोच बी-6 (B-6) की गैलरी में कंबल और चादरों की मदद से तुरंत एक साफ-सुथरा और सुरक्षित घेरा (जगह) तैयार किया गया, जहां गर्भवती महिला को आरामदायक स्थिति में लाया गया। इसके साथ ही, ऑन-ड्यूटी स्टाफ ने शाम 5:28 बजे तुरंत भोपाल कंट्रोल रूम को सतर्क किया और हरदा स्टेशन पर डॉक्टर तथा एम्बुलेंस सहित आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। कंट्रोल रूम ने भी तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए हरदा स्टेशन पर हर संभव चिकित्सीय मदद तैयार रखने का आश्वासन दिया।
दूसरी तरफ, ट्रेन के भीतर रनिंग स्टाफ की टीम और कोच में मौजूद अन्य महिला यात्रियों ने मिलकर मोर्चा संभाला। सभी के सामूहिक प्रयासों से शाम लगभग 5:40 बजे, जब ट्रेन पूरी रफ्तार से चल रही थी, महिला ने एक स्वस्थ बच्चे (लड़के) को जन्म दिया। नवजात की किलकारी गूंजते ही पूरे कोच के यात्रियों में खुशी की लहर दौड़ गई और सभी ने राहत की सांस ली।
इसके बाद, शाम 6:07 बजे जैसे ही ट्रेन हरदा स्टेशन पर रुकी, वहां रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवान, स्टेशन स्टाफ, एक महिला कांस्टेबल और सहायक पूरी तैयारी व मेडिकल सपोर्ट के साथ मुस्तैद मिले। चूंकि बच्चे की गर्भनाल (अम्बिलिकल कॉर्ड) को काटा जाना बाकी था, इसलिए जच्चा और बच्चा दोनों को ट्रेन से बेहद सुरक्षित तरीके से उतारकर आगे के उपचार के लिए तुरंत अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, वर्तमान में मां और बच्चा दोनों पूरी तरह से सुरक्षित और स्थिर हैं। मध्य रेल स्टाफ द्वारा दिखाई गई इस समयबद्ध कार्रवाई, संवेदनशीलता और सूझबूझ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय रेल हर परिस्थिति में अपने यात्रियों के साथ एक रक्षक की तरह खड़ी है।
यह आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति 31 मई 2026 को मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला, मध्य रेल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), मुंबई द्वारा जनहित में (विज्ञप्ति संख्या: 2026/05/46) जारी की गई है।

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