केरल रेल विकास: मारारिकुल्लम-आलप्पुष़ा के बीच दोहरीकरण को मंजूरी
केरल के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी! मारारिकुल्लम-आलप्पुष़ा के बीच 10.65 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के दोहरीकरण को ₹220 करोड़ की मिली मंजूरी। जानिए, कैसे यह बदलाव केरल में ट्रेनों की रफ्तार और कनेक्टिविटी को बदल कर रख देगा।

केरल के रेल बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और यात्रियों व माल ढुलाई की बढ़ती मांग को पूरा करने के उद्देश्य से भारतीय रेल ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। दक्षिण रेलवे के अंतर्गत मारारिकुल्लम-आलप्पुष़ा के बीच 10.65 किलोमीटर लंबे रेल खंड के दोहरीकरण के लिए ₹220 करोड़ की परियोजना को आधिकारिक मंजूरी प्रदान की गई है। यह कदम न केवल इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर की क्षमता में गुणात्मक वृद्धि करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में रेल संपर्क को नई गति प्रदान करेगा।
वर्तमान में, एरणाकुलम-तुरवूर-आलप्पुष़ा-अम्बलप्पुष़ा-कायमकुलम रेल कॉरिडोर पर मारारिकुल्लम–आलप्पुष़ा सेक्शन ही एकमात्र एकल लाइन वाला हिस्सा शेष रह गया था, जबकि इस मार्ग के अन्य हिस्सों पर दोहरीकरण का कार्य या तो पहले ही पूरा हो चुका है या तीव्र गति से जारी है। इस एकल लाइन के बाधा बनने के कारण परिचालन में जो सीमाएं आ रही थीं, उन्हें अब इस दोहरीकरण परियोजना के माध्यम से समाप्त किया जाएगा। यह कार्य भारतीय रेल के 'मिशन 3000 MT' और उच्च घनत्व यातायात नेटवर्क कॉरिडोर योजना का एक अभिन्न अंग है, जो देश के रेल तंत्र को आधुनिक बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
परियोजना के पूर्ण होने के बाद इस मार्ग पर प्रतिदिन प्रत्येक दिशा में नौ अतिरिक्त यात्री ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा। परिचालन क्षमता में इस बड़े विस्तार से प्रतिवर्ष 2.88 मिलियन टन माल ढुलाई का मार्ग भी प्रशस्त होगा। आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, यात्री और माल परिवहन में इस वृद्धि से रेलवे को लगभग ₹3.08 करोड़ की अतिरिक्त वार्षिक शुद्ध आय होने का अनुमान है। वित्तीय दृष्टिकोण से यह परियोजना अत्यंत आकर्षक है, जिसमें वित्तीय आंतरिक प्रतिफल दर (FIRR) 3.99 प्रतिशत और आर्थिक आंतरिक प्रतिफल दर (EIRR) 22.30 प्रतिशत निर्धारित की गई है।
इस दोहरीकरण के धरातल पर उतरने से ट्रेनों के ठहराव और प्रतीक्षा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे परिचालन दक्षता में अभूतपूर्व सुधार होगा। ट्रेनों का संचालन अधिक तेज और सुचारु होने से न केवल समयपालन में सुधार होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी सशक्त होगी। यह परियोजना केरल में रेल अवसंरचना के आधुनिकीकरण और राज्य के सर्वांगीण आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में भारतीय रेल का एक दूरदर्शी कदम है, जो भविष्य की परिवहन जरूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगा।

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