कवच 4.0: अहमदाबाद मंडल में स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का तेज़ी से विस्तार,
भारतीय रेलवे की कवच 4.0 प्रणाली से टक्कर रोकथाम, SPAD नियंत्रण और सुरक्षित संचालन में सुधार; अहमदाबाद मंडल में इंस्टॉलेशन व ट्रायल तेज

भारतीय रेलवे की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच 4.0’ अब सुरक्षा के नए मानक स्थापित कर रही है। उच्चतम क्रम (एसआइएल-4) सुरक्षा प्रमाणन वाली यह उन्नत एटीपी प्रणाली न केवल लोको पायलट को निर्धारित गति सीमा में ट्रेन संचालन में सहायता करती है, बल्कि विफलता की स्थिति में स्वतः ब्रेक लगाकर संभावित हादसों को टालने में भी सक्षम है। खराब मौसम में भी सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने वाली यह प्रणाली भारतीय रेल के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनकर उभरी है।
‘कवच’ का उद्देश्य ट्रेनों की टक्कर को रोकना, सिग्नल उल्लंघन (SPAD) से बचाव करना तथा सुरक्षित और नियंत्रित संचालन सुनिश्चित करना है। इस प्रणाली में RFID (Radio Frequency Identification) तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिसके तहत ट्रैक पर RFID टैग लगाए जाते हैं और लोकोमोटिव में लगे रीडर के माध्यम से ट्रेन की सटीक लोकेशन, सिग्नल की स्थिति तथा गति सीमा की जानकारी प्राप्त होती है।
अहमदाबाद मंडल में इस प्रणाली का क्रियान्वयन तीव्र गति से जारी है। वटवा लोको शेड में कुल 180 इंजनों पर ‘कवच’ प्रणाली स्थापित करने की योजना है, जिसमें से 72 इंजनों पर कार्य पूर्ण हो चुका है और शेष पर कार्य प्रगति पर है। इसके लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की समर्पित टीम चरणबद्ध तरीके से स्थापना कार्य कर रही है। वहीं, साबरमती लोको शेड में 34 इंजनों पर ‘कवच’ लगाया जाना है, जिनमें से 6 इंजनों पर ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है और बाकी इंजनों पर कार्य जारी है।
ट्रैक सेक्शनों पर भी ‘कवच’ इंस्टॉलेशन का कार्य व्यापक स्तर पर चल रहा है। अहमदाबाद–पालनपुर एवं अहमदाबाद–सामाख्याली सेक्शन, जो कुल 402 आरकेएम है, पर 410.10 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रगति पर है। पालनपुर–सामाख्याली–गांधीधाम सेक्शन के 300 आरकेएम पर 182.81 करोड़ रुपये की लागत से कार्य जारी है। वहीं, अहमदाबाद–गेरतपुर सेक्शन, जिसकी लंबाई 13.42 किमी है, पर ‘कवच’ प्रणाली का कार्य पूर्ण हो चुका है और यह खंड अब पूरी तरह सुसज्जित हो गया है।
तकनीकी प्रगति के तहत अहमदाबाद डिविजन में 705.95 किमी OFC बिछाने का लक्ष्य रखा गया, जिसमें से 304.58 किमी कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य जारी है। 22334 RFID टैग के मुकाबले 4424 टैग लगाए जा चुके हैं, जबकि 148 टावरों की स्थापना अभी शुरू नहीं हुई है। सभी सेक्शनों में RFID टैग सफलतापूर्वक लगाए जा चुके हैं और ‘कवच’-फिटेड लोको का ट्रायल भी पूरा कर लिया गया है।
हाल ही में गांधीनगर कैपिटल और कलोल के बीच लगभग 20 किमी सेक्शन में किए गए ट्रायल ने इस प्रणाली की प्रभावशीलता को स्पष्ट रूप से सिद्ध किया। परीक्षण के दौरान दो ट्रेनों को एक ही ट्रैक के एक ही ब्लॉक सेक्शन में चलाया गया। जैसे ही दोनों लोको लगभग 10 किमी की दूरी के भीतर आए, पीछे चल रहे लोको में स्वतः ब्रेक लग गया। इससे यह सिद्ध हुआ कि एक ही ब्लॉक सेक्शन में दो ट्रेनों को आगे-पीछे नहीं चलाया जा सकता। किसी भी ट्रेन के एक ही ब्लॉक सेक्शन में प्रवेश करते ही स्वतः ब्रेक लग जाता है और चेतावनी स्वरूप हॉर्न भी बजने लगता है। आमने-सामने लाने के प्रयास में भी दोनों लोको में स्वतः ब्रेक लग गया, जिससे संभावित टक्कर टल गई।
देशव्यापी स्तर पर भी ‘कवच 4.0’ का विस्तार तेजी से हो रहा है। दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा के घनी आबादी वाले मार्गों पर 1,452 रूट किलोमीटर पर इसका सफल संचालन शुरू हो चुका है। रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के लिए 8,570 किमी ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई है, 1,100 टावर स्थापित किए गए हैं, 6,776 रूट किमी ट्रैकसाइड उपकरण लगाए गए हैं और 767 स्टेशन डेटा सेंटर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, गोल्डन क्वाड्रिलैटरल, गोल्डन डायगोनल, हाई डेंसिटी नेटवर्क और चिन्हित खंडों को कवर करते हुए 24,427 रूट किमी ट्रैकसाइड ‘कवच’ कार्यान्वयन कार्य शुरू किया गया है।
भारतीय रेलवे की यह पहल आधुनिक तकनीक के माध्यम से ट्रेन संचालन को अधिक उत्तरदायी और नियंत्रित बनाते हुए सुरक्षा को नई ऊंचाई प्रदान कर रही है। अहमदाबाद मंडल में ‘कवच’ प्रणाली का विस्तार रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत आधारशिला के रूप में स्थापित हो रहा है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
