11 जुलाई को कटोसण रोड–रणुज रेलखंड पर 120 किमी/घंटा स्पीड ट्रायल होगा। सीआरएस निरीक्षण के बीच रेलवे ने आमजन से ट्रैक से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है।

पश्चिम रेलवे का अहमदाबाद मंडल रेल अवसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। मंडल के अंतर्गत 63 किलोमीटर लंबे कटोसण रोड–रणुज रेलखंड पर रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा संरक्षा निरीक्षण अंतिम चरण में है। यह निरीक्षण इस रेलखंड पर यात्री रेल सेवाओं के शुभारंभ की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है। इसी क्रम में 11 जुलाई, 2026 को इस रेलखंड पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से इंजन का स्पीड ट्रायल किया जाएगा। रेलवे प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे रेलवे ट्रैक के समीप न जाएं, किसी भी परिस्थिति में रेल लाइन पार करने का प्रयास न करें तथा बच्चों और पशुओं को रेल पटरियों से सुरक्षित दूरी पर रखें। रेलवे ने चेतावनी दी है कि स्पीड ट्रायल के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल के अंतर्गत विकसित कटोसण रोड–बेचराजी–रणुज 63 किलोमीटर रेल परियोजना को रेल अवसंरचना, औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह परियोजना रेल मंत्रालय तथा बहुचराजी रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BRCL) के संयुक्त उपक्रम (PPP मॉडल) के अंतर्गत विकसित की गई है, जिसमें G-RIDE, GIDC तथा MSIL की भी भागीदारी रही है। परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता भारत की पहली ऑटोमोबाइल विनिर्माण इकाई के लिए विकसित इन-प्लांट रेलवे साइडिंग है, जिसके माध्यम से प्रथम एवं अंतिम मील (First and Last Mile) तक निर्बाध रेल संपर्क सुनिश्चित हुआ है। इससे ऑटोमोबाइल परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित और किफायती बना है।

कटोसण रोड–बेचराजी–रणुज 63 किलोमीटर गेज परिवर्तन परियोजना को वर्ष 2017 में स्वीकृति प्रदान की गई थी। लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे एवं जी-राइड के संयुक्त उपक्रम के अंतर्गत विकसित इस परियोजना में कुल 14 रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं। रेलखंड पर 9 बड़े पुल, 100 छोटे पुल, 47 रोड अंडर ब्रिज (RUB/LHS) तथा 16 कर्व शामिल हैं।

इस रेलखंड का प्रमुख स्टेशन बेचराजी गुजरात के महेसाणा जिले में स्थित है, जिसे विश्वविख्यात श्री बहुचर माता मंदिर के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया गया है। बहुचर माता मंदिर गुजरात के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर के महत्व को देखते हुए तत्कालीन महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ ने गायकवाड़ बड़ौदा रेलवे (GBR) का विस्तार बेचराजी तक कराया था।

लंबे समय तक बेचराजी क्षेत्र रेल संपर्क से वंचित रहा, जिसके कारण श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और औद्योगिक इकाइयों को मुख्य रूप से सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता था। धार्मिक पर्यटन, औद्योगिक विकास और बेहतर परिवहन सुविधाओं की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए भारतीय रेल की इस क्षेत्र को आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना अब साकार होने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

तीन दिवसीय सीआरएस निरीक्षण के दौरान पहले दिन कटोसण रोड से बेचराजी, दूसरे दिन बेचराजी से चाणसमा तथा तीसरे दिन चाणसमा से रणुज तक रेलखंड का निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण पूरा होने के बाद रेल संरक्षा आयुक्त आवश्यक सुधार और कमियों के संबंध में सुझाव देंगे। सभी आवश्यक कार्य पूरे होने और संरक्षा स्वीकृति मिलने के बाद इस रेलखंड पर यात्री रेल सेवाएं प्रारंभ करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। रेलवे का प्रयास है कि सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर इस रेलखंड पर यात्री ट्रेनों का संचालन जल्द शुरू किया जाए।

इस रेलखंड के शुरू होने से महेसाणा और पाटण जिलों के प्रमुख केंद्रों बेचराजी, खांभेल और चाणसमा को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। इससे स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को किफायती, सुरक्षित तथा सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध होगा। साथ ही विश्व प्रसिद्ध बहुचर माता मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा भी अधिक सुगम बनेगी। यह रेल परियोजना क्षेत्र की कृषि, लघु उद्योगों, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगी। इसके माध्यम से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास को बल मिलेगा तथा पर्यावरण-अनुकूल, सतत और तेज रेल संपर्क सुनिश्चित होगा। बेहतर परिवहन सुविधा से दैनिक यात्रियों, पर्यटकों और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को नई मजबूती प्राप्त होगी।

Pratahkal Bureau

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