जम्मू-कश्मीर रेल कनेक्टिविटी: USBRL परियोजना से जुड़े नए अपडेट्स
USBRL परियोजना से कश्मीर घाटी को मिली ऑल-वेदर रेल कनेक्टिविटी, किसानों और कारोबारियों के लिए खुले नए बाजार। चिनाब ब्रिज, GCT, अमृत भारत स्टेशन और नई रेल योजनाओं की पूरी जानकारी।

उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना के शुरू होने से जम्मू-कश्मीर में हर मौसम में सुगम रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध हो गई है। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि इस परियोजना से कश्मीर घाटी देश के अन्य हिस्सों से सीधे जुड़ गई है और इससे किसानों, छोटे एवं मध्यम उद्यमों तथा स्थानीय कारोबारियों के लिए नए बाजार अवसर खुले हैं।
रेल मंत्रालय के अनुसार 272 किलोमीटर लंबी USBRL परियोजना को शुरू किया जा चुका है। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के उधमपुर, रियासी, रामबन, श्रीनगर, अनंतनाग, पुलवामा, बडगाम और बारामूला जिलों से होकर गुजरती है। स्वतंत्रता के बाद देश में बनाई गई सबसे कठिन नई रेल परियोजनाओं में शामिल इस परियोजना का निर्माण युवा हिमालयी क्षेत्र में किया गया है, जहां भूगर्भीय चुनौतियां लगातार बनी रहती हैं।
इस परियोजना के तहत जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बनाया गया है। यह प्रतिष्ठित चिनाब ब्रिज 1315 मीटर लंबा है, जिसमें 467 मीटर का आर्च स्पैन और नदी तल से 359 मीटर की ऊंचाई है। इसके अलावा भारतीय रेलवे का पहला केबल स्टेड ब्रिज अंजी खड्ड पर बनाया गया है। यह 473 मीटर लंबा असममित केबल स्टेड पुल है, जिसमें 193 मीटर ऊंचा उल्टे “Y” आकार का सिंगल पायलन है।
USBRL परियोजना के तहत लगभग 215 किलोमीटर सड़क मार्ग का भी निर्माण किया गया है, जिसमें एक सुरंग और 320 पुल शामिल हैं। इन सड़कों का उपयोग स्थानीय आबादी द्वारा भी किया जा रहा है।
पूरी रेल परियोजना में सुरंगों और खुले क्षेत्रों में ओवरहेड कंडक्टर सिस्टम के माध्यम से विद्युतीकरण किया गया है। घाटी क्षेत्र को भारतीय रेलवे नेटवर्क से हर मौसम में विश्वसनीय और आरामदायक रेल संपर्क मिलने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना शुरू होने के बाद कटरा से श्रीनगर के बीच यात्रा समय घटकर लगभग 3 घंटे रह गया है।
रेल संपर्क बढ़ने से जम्मू-कश्मीर के स्थानीय उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिला है। USBRL परियोजना के भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ने के बाद कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन में सुविधा हुई है, जिससे क्षेत्र में छोटे और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा मिला है। किसान और स्थानीय व्यवसायी अब अपने प्रमुख उत्पादों जैसे सेब, सूखे मेवे, पश्मीना शॉल और हस्तशिल्प को घाटी से बाहर बड़े बाजारों तक पहुंचा पा रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में रेल संपर्क को और मजबूत करने के लिए कई परियोजनाओं के अंतिम स्थान सर्वेक्षण (FLS) को मंजूरी दी गई है। इनमें जालंधर कैंट-जम्मू तवी 216 किलोमीटर तीसरी लाइन परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की गई है। जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा 78 किलोमीटर अतिरिक्त लाइन के लिए DPR तैयार करने हेतु FLS स्वीकृत किया गया है और फील्ड सर्वे शुरू हो चुका है। वहीं जम्मू/रियासी-पुंछ 190 किलोमीटर नई रेल लाइन के लिए भी DPR तैयार करने हेतु FLS स्वीकृत किया गया है और फील्ड सर्वे जारी है।
DPR तैयार होने के बाद परियोजनाओं के लिए राज्य सरकारों सहित विभिन्न हितधारकों से परामर्श और नीति आयोग, वित्त मंत्रालय सहित अन्य आवश्यक स्वीकृतियां लेनी होंगी। हितधारकों के साथ परामर्श प्रक्रिया लगातार चलने वाली और गतिशील प्रक्रिया है, इसलिए इसकी निश्चित समयसीमा तय नहीं की जा सकती।
रेल मंत्रालय ने दीर्घकालिक योजना के तहत स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए अमृत भारत स्टेशन योजना शुरू की है। इस योजना में स्टेशन मास्टर प्लान तैयार कर चरणबद्ध तरीके से उनका विकास किया जा रहा है। इसमें स्टेशन तक बेहतर पहुंच, सर्कुलेटिंग एरिया का विकास, शहर के दोनों हिस्सों से स्टेशन का एकीकरण, स्टेशन भवन में सुधार, प्रतीक्षालय, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, पानी की सुविधा, चौड़े फुट ओवर ब्रिज/सबवे, लिफ्ट, एस्केलेटर, रैंप, प्लेटफॉर्म सुधार, स्थानीय उत्पादों के लिए ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ योजना के तहत कियोस्क, पार्किंग, दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाएं, बेहतर यात्री सूचना प्रणाली, एयर कॉनकोर्स, एग्जीक्यूटिव लाउंज, मल्टीमॉडल एकीकरण और लैंडस्केपिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर में अब तक 1340 स्टेशनों को विकास के लिए चिन्हित किया गया है, जिनमें जम्मू-कश्मीर के चार स्टेशन शामिल हैं। इनमें बडगाम, जम्मू तवी, शहीद कैप्टन तुषार महाजन और श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्टेशन शामिल हैं।
बडगाम स्टेशन पर सर्कुलेटिंग एरिया, पार्किंग और एप्रोच रोड के सुधार कार्य पूरे हो चुके हैं। 12 मीटर चौड़े फुट ओवर ब्रिज, स्टेशन भवन सुधार और नए प्रतीक्षालय व एग्जीक्यूटिव लाउंज के साथ बुकिंग काउंटर के कार्य जारी हैं। जम्मू तवी स्टेशन पर सेकेंड एंट्री के नए स्टेशन भवन, सर्कुलेटिंग एरिया, पार्किंग, नए प्लेटफॉर्म, प्लेटफॉर्म शेल्टर, विद्युत सब-स्टेशन और प्रवेश रैंप के कार्य पूरे हो चुके हैं। पुराने मुख्य प्रवेश स्टेशन भवन को हटाने, फुट ओवर ब्रिज और एयर कॉनकोर्स के कार्य शुरू किए गए हैं।
शहीद कैप्टन तुषार महाजन स्टेशन पर स्टेशन भवन सुधार, सर्कुलेटिंग एरिया, पार्किंग, एप्रोच रोड, शौचालय, प्रतीक्षालय, प्रवेश पोर्च और साइनेज के कार्य पूरे हो चुके हैं। प्लेटफॉर्म शेल्टर, प्लेटफॉर्म सतह सुधार और 6 मीटर चौड़े फुट ओवर ब्रिज के कार्य जारी हैं। श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्टेशन मास्टर प्लानिंग चरण में है।
रेलवे स्टेशनों का विकास, उन्नयन और आधुनिकीकरण यात्री सुविधाओं की आवश्यकता, स्टेशन श्रेणी, स्थिति और यातायात के आधार पर लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। इसके लिए कार्यों को प्राथमिकता और उपलब्ध बजट के अनुसार किया जाता है।
जम्मू-कश्मीर उत्तरी रेलवे के अंतर्गत आता है। यात्री सुविधाओं के लिए प्लान हेड-53 ‘कस्टमर एमेनिटीज’ के तहत पिछले पांच वित्तीय वर्षों और वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए उत्तरी रेलवे को 7,944 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसमें जून 2026 तक 5,622 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
रेलवे स्टेशनों के विकास कार्यों में यात्री और ट्रेन सुरक्षा से जुड़े कई वैधानिक अनुमोदन आवश्यक होते हैं। पुराने स्टेशनों पर ब्राउनफील्ड कार्यों के कारण पानी, सीवेज लाइन, ऑप्टिकल फाइबर केबल, गैस पाइपलाइन, पावर और सिग्नल केबल जैसी उपयोगिताओं को स्थानांतरित करने, अतिक्रमण हटाने, ट्रेन संचालन प्रभावित किए बिना निर्माण कार्य करने और अन्य तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
रेलवे ने रोड ओवर ब्रिज (ROB) और रोड अंडर ब्रिज (RUB) निर्माण पर भी तेजी से काम किया है। वर्ष 2004-14 के दौरान भारतीय रेलवे पर 4148 ROB/RUB बनाए गए, जबकि वर्ष 2014-26 (मई 2026 तक) के दौरान 14,451 ROB/RUB बनाए गए, जिनमें जम्मू-कश्मीर में 16 शामिल हैं।
1 जून 2026 तक भारतीय रेलवे पर 4993 ROB/RUB कार्य 1,17,492 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्वीकृत हैं। जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में 195 ROB/RUB मौजूद हैं। इसके अलावा 87 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से दो ROB कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
रेलवे नेटवर्क के विद्युतीकरण अभियान के तहत भारतीय रेलवे के लगभग 99.6 प्रतिशत ब्रॉड गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण हो चुका है। वर्ष 2014-26 के दौरान 48,072 रूट किलोमीटर और वर्ष 2014 से पहले लगभग 60 वर्षों में 21,801 रूट किलोमीटर का विद्युतीकरण किया गया। जम्मू-कश्मीर में मौजूदा ब्रॉड गेज नेटवर्क पूरी तरह विद्युतीकृत है और सभी नई लाइन व मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं विद्युतीकरण के साथ स्वीकृत और निर्मित की जा रही हैं।
रेल मंत्रालय की गती शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (GCT) नीति के तहत निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। देशभर में अब तक 142 GCT शुरू किए जा चुके हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में एक GCT शामिल है। इन 142 टर्मिनलों की अनुमानित माल ढुलाई क्षमता 224 मिलियन टन प्रति वर्ष है और इनके माध्यम से लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश जुटाया गया है। वर्ष 2025-26 में इन GCT से 146 मिलियन टन माल की ढुलाई हुई।
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के कठुआ, अनंतनाग और जम्मू जिलों सहित 310 अन्य स्थानों पर GCT विकसित करने के लिए इन-प्रिंसिपल अप्रूवल दिए गए हैं।
रेलवे सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण के तहत 30 जून 2026 तक भारतीय रेलवे के 6671 स्टेशनों पर इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम उपलब्ध कराया गया है। इनमें जम्मू-कश्मीर के सांबा, रियासी, रामबन, कठुआ और जम्मू जिलों के 11 स्टेशन शामिल हैं, जहां पिछले पांच वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग उपलब्ध कराई गई है।
स्टेशनों पर पूर्ण ट्रैक सर्किटिंग भी 6671 स्टेशनों तक पहुंच चुकी है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के 11 स्टेशन शामिल हैं। वहीं ब्लॉक सेक्शन में ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक्सल काउंटर सिस्टम 6085 ब्लॉक सेक्शन में लगाया गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के 11 स्टेशन शामिल हैं।
स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच को जुलाई 2020 में राष्ट्रीय ATP प्रणाली के रूप में अपनाया गया था। कवच संस्करण 4.0 को आरडीएसओ ने 16 जुलाई 2024 को मंजूरी दी थी। 31 जुलाई 2026 तक कवच 4.0 को 2633 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक लगाया जा चुका है। जम्मू-कश्मीर से गुजरने वाले लगभग 401 रूट किलोमीटर पर कवच कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें कठुआ-जम्मू तवी 76 RKm, जम्मू तवी-श्री माता वैष्णो देवी कटरा 78 RKm, कटरा-बनिहाल 112 RKm और बनिहाल-बारामूला 135 RKm शामिल हैं।
यात्रियों की सुविधा के लिए जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में चार जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस सेवाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें अमृतसर-श्री माता वैष्णो देवी कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस, जम्मू तवी-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस की दो सेवाएं और नई दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल हैं।
इसके अलावा श्री माता वैष्णो देवी कटरा और बडगाम के बीच 14687/14688 श्री माता वैष्णो देवी कटरा-बडगाम एक्सप्रेस सेवा शुरू करने का निर्णय लिया गया है। वहीं मCTM उधमपुर तक तीन ट्रेनों के विस्तार का निर्णय लिया गया है, जिसमें 12549/12550 दुर्ग-जम्मू तवी एक्सप्रेस, 22941/22942 इंदौर-जम्मू तवी एक्सप्रेस और 18215/18216 दुर्ग-जम्मू तवी एक्सप्रेस शामिल हैं।
वर्तमान में जम्मू तवी स्टेशन पर 114 ट्रेन सेवाएं, MCTM उधमपुर स्टेशन पर 58 ट्रेन सेवाएं, श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्टेशन पर 46 ट्रेन सेवाएं, श्रीनगर स्टेशन पर 16 ट्रेन सेवाएं और बडगाम स्टेशन पर 19 ट्रेन सेवाएं संचालित हो रही हैं।
रेलवे के अनुसार नई ट्रेन सेवाओं की शुरुआत एक सतत प्रक्रिया है, जो किसी सेक्शन की क्षमता, उपलब्ध मार्ग, रोलिंग स्टॉक, आवश्यक आधारभूत संरचना, ट्रैक और अन्य परिसंपत्तियों के रखरखाव तथा यातायात आवश्यकता जैसे कारकों पर निर्भर करती है।
यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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