नई दिल्ली, 14 जुलाई। भारतीय रेलवे को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को आठ और संरचनात्मक सुधारों की घोषणा की। इन सुधारों के साथ ही इस पहल के तहत लागू किए गए सुधारों की कुल संख्या 17 हो गई है। नए सुधारों से माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स, निर्माण कार्य, परियोजना क्रियान्वयन, वैगन डिजाइन, कौशल विकास और व्यापार सुगमता के क्षेत्र में बड़े बदलाव आने की उम्मीद है।

रेल भवन, नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे एक भविष्य के लिए तैयार रेलवे प्रणाली बनाने के उद्देश्य से लगातार सुधार कर रहा है। ये सुधार मंत्रालय के 52 सप्ताह में 52 सुधार लागू करने के लक्ष्य का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य दक्षता बढ़ाना, नवाचार को बढ़ावा देना और रेलवे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत पहले घोषित सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।

रिफॉर्म 10: फ्लाई ऐश परिवहन

रेल मंत्री ने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 340 मिलियन टन फ्लाई ऐश का उत्पादन होता है, जिसमें से करीब 96 मिलियन टन का उपयोग सीमेंट उद्योग द्वारा किया जाता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रेलवे ने लगभग 13 मिलियन टन फ्लाई ऐश का परिवहन किया, जो देश में कुल फ्लाई ऐश उत्पादन का लगभग चार प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि अब तक फ्लाई ऐश का परिवहन पारंपरिक रूप से खुले वैगनों में किया जाता था, जिससे लोडिंग, परिवहन और अनलोडिंग के दौरान धूल प्रदूषण होता था। इसके अलावा थर्मल पावर प्लांटों में बड़े राख तालाबों में इसके भंडारण से पर्यावरणीय चुनौतियां भी उत्पन्न होती थीं।

इन समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय रेलवे ने फ्लाई ऐश के लिए नया कंटेनरीकृत परिवहन सिस्टम शुरू किया है। नई नीति के तहत परिवहन के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए ISO मानक कंटेनरों का उपयोग किया जाएगा। इन कंटेनरों को पावर प्लांट से टॉप-लोडिंग व्यवस्था के माध्यम से सीधे लोड किया जा सकेगा और साइड-डिस्चार्ज या न्यूमेटिक सिस्टम से बिना धूल प्रदूषण के खाली किया जा सकेगा।

श्री वैष्णव ने कहा कि बंद कंटेनर प्रणाली से प्रदूषण मुक्त परिवहन संभव होगा, सीमेंट संयंत्रों में जरूरत तक सामग्री का सुरक्षित भंडारण किया जा सकेगा और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार होगा। कंटेनरों को रीच स्टैकर के माध्यम से संभाला जा सकेगा, जिससे पावर प्लांट से सीमेंट प्लांट तक निर्बाध परिवहन संभव होगा। इस सुधार से फ्लाई ऐश की रेल ढुलाई बढ़ेगी, सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरणीय चुनौती को आर्थिक रूप से उपयोगी संसाधन में बदला जा सकेगा।

रिफॉर्म 11: कंटेनर क्षेत्र में सुधार

श्री वैष्णव ने कहा कि थोक वस्तुओं से आगे रेलवे माल ढुलाई में विविधता लाने के लिए अधिक कंटेनरीकरण की आवश्यकता है। कंटेनर यातायात को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रेलवे ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंसिंग व्यवस्था में बड़ा संरचनात्मक सुधार किया है।

उन्होंने बताया कि पहले कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर (CTO) लाइसेंस चार श्रेणियों (Category I–IV) में जारी किए जाते थे। Category-I के लिए ₹50 करोड़ और अन्य श्रेणियों के लिए ₹10 करोड़ पंजीकरण शुल्क निर्धारित था। इसके साथ ही मार्ग आधारित प्रतिबंध और अलग-अलग पंजीकरण आवश्यकताएं थीं। अब इसे एकीकृत पैन-इंडिया कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंस से बदल दिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत ऑपरेटर भारतीय रेलवे के पूरे नेटवर्क पर बिना श्रेणी आधारित प्रतिबंधों के कंटेनर ट्रेन चला सकेंगे। पंजीकरण प्रणाली को सरल बनाते हुए सभी मार्गों के लिए ₹25 करोड़ का समान गैर-वापसी योग्य पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है।

श्री वैष्णव ने कहा कि अनुमतियां 20 वर्षों तक वैध रहेंगी और सफल संचालन के आधार पर बिना किसी नवीनीकरण या विस्तार शुल्क के आगे बढ़ाई जा सकेंगी। इस सरल लाइसेंसिंग व्यवस्था से व्यापार सुगमता बढ़ेगी, निजी भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा, कंटेनरीकरण बढ़ेगा, गैर-थोक माल को रेलवे की ओर आकर्षित किया जा सकेगा, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और देश की माल ढुलाई व्यवस्था मजबूत होगी।

रिफॉर्म 12: उर्वरक परिवहन

कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरक परिवहन के महत्व को बताते हुए श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे वर्तमान में देश में उर्वरक परिवहन का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा संभालता है।

उन्होंने बताया कि मौजूदा मालभाड़ा प्रणाली में लगभग 50 अलग-अलग स्लैब थे, जिससे संचालन जटिल हो जाता था। नई व्यवस्था के तहत मालभाड़े को प्रति टन प्रति किलोमीटर आधार पर सरल बनाया गया है और तर्कसंगत टैरिफ संरचना में तीन विकल्प रखे गए हैं।

इस सुधार के तहत अब कंटेनरों के माध्यम से उर्वरक परिवहन की अनुमति भी दी गई है। पहले जहां पूरी रेक को एक स्थान पर पूरी तरह खाली होने तक रोकना पड़ता था, वहीं अब मांग के अनुसार अलग-अलग कंटेनरों को रेक पॉइंट पर उतारकर रखा जा सकेगा।

रेल मंत्री ने कहा कि कंटेनरीकृत परिवहन से वैगन टर्नअराउंड बेहतर होगा, रेक के रुकने का समय कम होगा, वितरण व्यवस्था लचीली बनेगी, उर्वरक को बारिश और मौसम से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ेगी।

रिफॉर्म 13: रेलवे परियोजनाओं और कार्यों में कारीगरों के कौशल विकास की नीति

श्री वैष्णव ने कहा कि रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए विशेष कौशल, सटीक इंजीनियरिंग और उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन आवश्यक है।

योग्य मानव संसाधन की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेलवे ने रेलवे परियोजनाओं और कार्यों में लगे कारीगरों के कौशल विकास के लिए व्यापक नीति लागू की है। इस नीति में वेल्डिंग, फिटिंग, चिनाई और अन्य विशेष निर्माण कार्यों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों की पहचान, मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए व्यवस्थित ढांचा तैयार किया गया है।

नई व्यवस्था के तहत परियोजना आधारित कौशल आवश्यकताएं तय की जाएंगी और श्रमिकों का व्यावहारिक एवं मौखिक मूल्यांकन नामित परीक्षण प्राधिकरणों के माध्यम से किया जाएगा। सफल उम्मीदवारों को QR कोड आधारित कौशल प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे, जो लाइव सत्यापन डेटाबेस से जुड़े होंगे।

श्री वैष्णव ने कहा कि इस नीति का कार्यान्वयन पुलों और सुरंगों जैसी प्रमुख और जटिल रेलवे परियोजनाओं से शुरू होगा तथा अगले 24 महीनों में इसे सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों तक विस्तारित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह पहल सुनिश्चित करेगी कि विशेष रेलवे कार्यों में केवल प्रमाणित कारीगर और पर्यवेक्षक ही तैनात हों, कौशल मूल्यांकन को मानकीकृत किया जाए, प्रमाण-पत्रों का वास्तविक समय सत्यापन संभव हो, कार्य गुणवत्ता बेहतर हो और देश के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में कौशल उन्नयन को बढ़ावा मिले।

रिफॉर्म 14: निर्माण क्षेत्र में सुधार

श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत में ठेकेदार योग्यता सुधारों की सफलता के बाद भारतीय रेलवे ने निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और परियोजना क्रियान्वयन में सुधार के लिए नए सुधार लागू किए हैं।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य गंभीर और सक्षम ठेकेदारों को प्रोत्साहित करना, निर्माण गुणवत्ता बढ़ाना, विवादों को कम करना और रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय पर पूरा करना है।

इन सुधारों के तहत अब अनुबंध शुरू होने के समय 10 प्रतिशत प्रदर्शन सुरक्षा राशि ली जाएगी, जबकि पहले इसे चल रहे बिलों से कटौती के माध्यम से वसूला जाता था। इससे केवल गंभीर ठेकेदार ही रेलवे परियोजनाओं में भाग लेंगे और कार्य निष्पादन के दौरान जवाबदेही मजबूत होगी।

मुकदमेबाजी आधारित ठेकेदारी को हतोत्साहित करने के लिए पात्रता मानदंड भी सख्त किए गए हैं। जिन ठेकेदारों पर लंबित मुकदमों का मूल्य उनकी नेटवर्थ के 50 प्रतिशत से अधिक होगा, वे रेलवे निविदाओं में भाग लेने के पात्र नहीं होंगे।

सुधारों में ठेकेदार के सभी जोखिम बीमा (Contractor's All Risk Insurance) और पेशेवर क्षतिपूर्ति बीमा (Professional Indemnity Insurance) को भी शामिल किया गया है, जिससे परियोजना क्रियान्वयन के दौरान जोखिम प्रबंधन मजबूत होगा।

श्री वैष्णव ने बताया कि परियोजनाओं की शुरुआत में देरी और विवादों को कम करने के लिए भूमि हस्तांतरण की स्पष्ट और क्रमबद्ध व्यवस्था बनाई गई है।

उन्होंने रेल भूमि (Rail Bhoomi) का भी उल्लेख किया, जो CRIS द्वारा विकसित वेब आधारित प्लेटफॉर्म है। यह प्लेटफॉर्म IRPSM, IPAS और HRMS सहित विभिन्न रेलवे एप्लीकेशनों को एकीकृत करता है। इसके माध्यम से भूमि अधिग्रहण के प्रमुख चरणों की ऑनलाइन प्रक्रिया, कार्यप्रवाह प्रबंधन और डैशबोर्ड एवं प्रबंधन सूचना प्रणाली के जरिए वास्तविक समय निगरानी संभव होगी। यह पोर्टल भूमि अधिग्रहण को तेज करेगा, परियोजना योजना में सुधार करेगा और रेलवे बुनियादी ढांचा कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद करेगा।

रिफॉर्म 15: वैगन डिजाइन अनुमोदन नीति

श्री वैष्णव ने माल ढुलाई वैगनों के डिजाइन में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नई वैगन डिजाइन अनुमोदन नीति की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में वैगन डिजाइन मुख्य रूप से अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा विकसित किए जाते थे और बोगी, कपलर तथा ब्रेकिंग सिस्टम जैसे कई महत्वपूर्ण घटक निर्धारित मानकों तक सीमित थे। इससे डिजाइन में लचीलापन कम होता था और नवाचार प्रभावित होता था।

नई नीति के तहत डिजाइनर, निर्माता और उद्योग अपने उत्पादों एवं परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार वैगन डिजाइन तैयार कर प्रस्तावित कर सकेंगे।

RDSO प्रस्तावित डिजाइन का मूल्यांकन करेगा और सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद प्रोटोटाइप विकसित करने की अनुमति दी जाएगी। विस्तृत डिजाइन, प्रोटोटाइप निर्माण और स्थैतिक एवं गतिशील परीक्षण के बाद पूरी रेक का फील्ड ट्रायल किया जाएगा। इसके बाद सुरक्षा प्रमाणन, मुख्य रेलवे सुरक्षा आयुक्त द्वारा निरीक्षण और रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद इसे सेवा में शामिल किया जाएगा।

श्री वैष्णव ने कहा कि यह व्यवस्था इस्पात, पेट्रोलियम, रसायन, दूध, प्लास्टिक और अन्य क्षेत्रों के लिए विशेष वैगन विकसित करने में मदद करेगी। इससे वैगन डिजाइन और निर्माण का नया पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और विभिन्न क्षेत्रों में माल ढुलाई दक्षता बढ़ेगी।

रिफॉर्म 16: पेट्रोलियम उत्पाद परिवहन

श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पेट्रोलियम, तेल और लुब्रिकेंट (POL) उत्पादों के परिवहन के लिए विशेष टैंक वैगनों की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में भारतीय रेलवे सभी टैंक वैगनों का स्वामित्व रखता था, जिससे तेल कंपनियों के लिए अपनी जरूरत के अनुसार विशेष वैगन तैयार करना कठिन था।

इस समस्या के समाधान के लिए भारतीय रेलवे ने पेट्रोलियम टैंक वैगनों के डिजाइन और उन्हें शामिल करने से जुड़े संरचनात्मक अवरोधों को हटा दिया है। अब तेल कंपनियां विशेष जरूरतों के लिए सीधे वैगन खरीद सकेंगी या लीजिंग एजेंसियों के माध्यम से इन्हें लेकर भारतीय रेलवे नेटवर्क पर चला सकेंगी।

रेल मंत्री ने कहा कि यह सुधार विशेष टैंक वैगनों की शुरुआत, बेहतर लॉजिस्टिक्स योजना, परिवहन लागत में कमी, पेट्रोलियम उत्पादों की रेल से अधिक आवाजाही और सड़क परिवहन से जुड़े नुकसान एवं मिलावट जैसे जोखिमों को कम करने में मदद करेगा।

रिफॉर्म 17: खाद्यान्न, आटा और दाल परिवहन

श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे ने खाद्यान्न, आटा और दालों के परिवहन के लिए भी बड़ा सुधार लागू किया है, जिसमें मालभाड़ा संरचना को सरल बनाया गया है और कंटेनरीकृत परिवहन को बढ़ावा दिया गया है।

नई नीति के तहत पहले की जटिल स्लैब आधारित मालभाड़ा प्रणाली को प्रति टन प्रति किलोमीटर दर व्यवस्था से बदला गया है। अब खाद्यान्न, आटा और दालों को कंटेनरों के माध्यम से ले जाने की अनुमति होगी, जिससे आसान हैंडलिंग, लचीला भंडारण और जरूरत के अनुसार चरणबद्ध वितरण संभव होगा।

श्री वैष्णव ने कहा कि कंटेनरों को विक्रेताओं या खरीदारों के परिसर में रखा जा सकेगा और मांग के अनुसार वितरण किया जा सकेगा, जिससे पूरी रेक को रोकने की आवश्यकता नहीं होगी। कंटेनर सीलबंद रहने के कारण संदूषण की संभावना काफी कम होगी, जिससे खाद्यान्न परिवहन की सुरक्षा और गुणवत्ता बेहतर होगी तथा लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ेगी।

‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पहल के तहत भारतीय रेलवे इससे पहले नौ प्रमुख संरचनात्मक सुधार लागू कर चुका है। इनमें लगातार ऑन-बोर्ड ट्रेन सफाई, गति शक्ति कार्गो टर्मिनल का विस्तार, RailTech नीति और पोर्टल, रेलवे दावा न्यायाधिकरण का डिजिटलीकरण, नमक और ऑटोमोबाइल परिवहन के लिए विशेष कंटेनर, निर्माण गुणवत्ता से जुड़े सात सुधार, सरल टिकट रद्दीकरण और रिफंड नियम तथा डिजिटल माध्यम से बोर्डिंग प्वाइंट बदलने की सुविधा शामिल हैं।

श्री वैष्णव ने कहा कि नए सुधारों से माल परिवहन का बड़ा हिस्सा सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित करने में मदद मिलेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और पर्यावरणीय लाभ मिलेंगे। उन्होंने कहा कि रेल परिवहन से सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन होता है। अतिरिक्त वस्तुओं के कंटेनरीकरण से भारतीय रेलवे का माल ढुलाई आधार पारंपरिक थोक माल से आगे बढ़ेगा और रेलवे का फ्रेट कारोबार और मजबूत होगा।

Pratahkal Newsroom

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