भारतीय रेल के इतिहास में आज एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है जिसने देश की इंजीनियरिंग क्षमता और नवाचार को एक अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। पश्चिम रेलवे के वडोदरा मंडल ने अहमदाबाद-वडोदरा रेलखंड पर महिसागर नदी के ऊपर स्थित पुल संख्या 624 के सभी 8 स्पैनों के री-गर्डरिंग कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण कर एक अत्यंत विस्मयकारी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारतीय रेल के पूरे इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसी चालू यानी रनिंग रेल लाइन पर 67.5 मीटर लंबे और लगभग 320 टन भारी-भरकम स्टील ओपन वेब गर्डर को बेहद शक्तिशाली 600 टन एवं 800 टन क्षमता की रोड क्रॉलर क्रेनों की सहायता से प्रतिस्थापित किया गया है। इस अभूतपूर्व सफलता ने भारतीय रेलवे की तकनीकी दक्षता को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दी है।

इस ऐतिहासिक और गौरवशाली उपलब्धि पर वडोदरा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री राजू भडके ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि महिसागर नदी पर स्थित इस 113 वर्ष पुराने महत्वपूर्ण रेलवे पुल के सभी 8 स्पैनों का सफल री-गर्डरिंग कार्य वडोदरा मंडल की इंजीनियरिंग दक्षता, अद्वितीय नवाचार और अटूट टीम भावना का एक उत्कृष्ट और जीवंत उदाहरण है। मंडल रेल प्रबंधक ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह संपूर्ण कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच, कड़ाई से निर्धारित समयसीमा के भीतर तथा न्यूनतम ब्लॉकों में सुरक्षित रूप से पूरा किया गया है। उन्होंने इस ऐतिहासिक और उल्लेखनीय सफलता का श्रेय पूरी टीम को देते हुए इस अति-जटिल परियोजना से सीधे जुड़े ब्रिज, टीआरडी, पी-वे, ऑपरेटिंग, इलेक्ट्रिकल एवं मैकेनिकल विभागों के सभी अधिकारियों तथा कर्मचारियों को उनकी इस ऐतिहासिक और अनुकरणीय सफलता के लिए हार्दिक बधाई दी।

इस पूरी परियोजना के दौरान महिसागर नदी के बारहमासी और अनवरत जलप्रवाह ने पूरे कार्य को अत्यंत दुर्गम और चुनौतीपूर्ण बना दिया था। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1913 में निर्मित यह ऐतिहासिक पुल महिसागर नदी पर स्थित भारतीय रेलवे की एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील संरचना है। नदी में सालभर पानी का भारी प्रवाह रहने के कारण इस पुल पर री-गर्डरिंग के कार्य को अंजाम देना किसी बड़े खतरे से कम नहीं था। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कुल 67.5 मीटर लंबे तथा लगभग 320 टन वजनी भारी स्टील ओपन वेब गर्डरों का प्रतिस्थापन किया जाना था, जिसे रणनीतिक रूप से दो चरणों में विभाजित कर पूरा किया गया। प्रथम चरण में पुल के बीचों-बीच स्थित 6 स्पैनों के गर्डरों का प्रतिस्थापन किया गया, जबकि दूसरे चरण में अत्यधिक सावधानी बरतते हुए शेष बचे 2 एंड स्पैनों का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इस पूरी वृहद परियोजना को मात्र एक वर्ष की रिकॉर्ड अवधि में पूर्ण कर लिया गया, जिसके लिए कुल 8 मेगा ब्लॉक लिए गए और प्रत्येक ब्लॉक की अवधि लगभग साढ़े पाँच घंटे की रही।

इस महा-परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता सुपर लिफ्ट वाली क्रेनें और उनके द्वारा की गई गर्डरों की असाधारण लॉन्चिंग रही। नदी के मध्य के छह स्पैनों के री-गर्डरिंग कार्य के लिए 600 टन क्षमता की दो विशाल क्रॉलर टाइप रोड क्रेनों को काम पर लगाया गया था, जिनमें से प्रत्येक क्रेन पर 200 टन की सुपर-लिफ्ट व्यवस्था विशेष रूप से उपलब्ध थी। नदी के गहरे पानी के भीतर इन भारी-भरकम क्रेनों को सुरक्षित स्थापित करने के लिए इंजीनियरों ने एक अद्भुत तकनीक अपनाई, जिसके तहत विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए सैंड पंप को बड़ी बोट पर स्थापित किया गया और उसकी मदद से नदी के भीतर लगभग 30 मीटर चौड़ा एक कृत्रिम सैंड बेड यानी रेत का प्लेटफॉर्म तैयार किया गया। इसी कृत्रिम प्लेटफॉर्म पर दोनों महाकाय क्रेनों को पूरी मजबूती से स्थापित करके गर्डरों का प्रतिस्थापन कार्य बिना किसी व्यवधान के शत-प्रतिशत सुरक्षित एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।

परियोजना के अंतिम दौर में पुल के दोनों एंड स्पैनों पर स्थान की अत्यधिक कमी होने के कारण वहां दो क्रेनों की एक साथ तैनाती करना पूरी तरह असंभव हो गया था। इस अभूतपूर्व और जटिल चुनौती का सामना करने के लिए रेलवे के इंजीनियरों ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए वहां सीधे 800 टन क्षमता की अत्यंत शक्तिशाली क्रॉलर टाइप रोड क्रेन का उपयोग किया, जो 300 टन की सुपर-लिफ्ट व्यवस्था से पूरी तरह लैस थी। इस बेहद आधुनिक और अभिनव तकनीक के प्रयोग से न केवल परियोजना की लागत में भारी कमी आई, बल्कि ट्रैफिक ब्लॉक एवं पावर ब्लॉक की अवधि में भी उल्लेखनीय बचत सुनिश्चित की जा सकी। उपलब्ध आधिकारिक अभिलेखों और इतिहास के अनुसार, इससे पूर्व किसी भी रेलवे नेटवर्क पर रोड क्रेन का इतनी चतुराई से उपयोग कर इतने विशाल स्पैन के स्टील ओपन वेब गर्डर का री-गर्डरिंग कार्य कभी नहीं किया गया है। महिसागर नदी पुल की इस री-गर्डरिंग परियोजना का यह सफल और सुरक्षित समापन पश्चिम रेलवे के आधारभूत संरचना उन्नयन कार्यक्रम में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर साबित होगा, जिससे भविष्य में अहमदाबाद-वडोदरा रेलखंड पर ट्रेनों की सुरक्षा, विश्वसनीयता तथा परिचालन क्षमता में और अधिक व्यापक वृद्धि दर्ज की जाएगी।

Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story