उत्तर पश्चिम रेलवे की जोधपुर-भोपाल एक्सप्रेस सहित देश की 21 जोड़ी ट्रेनों के पारंपरिक आईसीएफ रैक को आधुनिक और सुरक्षित जर्मन तकनीक वाले एलएचबी रैक में बदला गया।

भारतीय रेल द्वारा यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने तथा रेल सफर को अधिक सुरक्षित, आरामदायक एवं आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित किया गया है। रेल प्रशासन द्वारा ट्रेनों के पारंपरिक आईसीएफ (ICF) रैक को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक एलएचबी (LHB) रैक में परिवर्तित करने का कार्य तीव्र गति से जारी है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती दो महीनों, अप्रैल और मई में, भारतीय रेलवे ने 19 जोड़ी ट्रेनों के 31 रैक को एलएचबी में परिवर्तित किया है, जबकि 02 जोड़ी नई रेलसेवाओं के 04 रैक भी अत्याधुनिक एलएचबी तकनीक से संचालित किए गए हैं।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन ने इस परिवर्तन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एलएचबी कोच जर्मन तकनीक पर आधारित हैं, जो अपनी उच्च गति, बेहतर आराम और न्यूनतम कंपन के लिए विख्यात हैं। इन कोचों की विशिष्ट एंटी-टेलिस्कोपिक डिजाइन दुर्घटना जैसी अप्रिय स्थिति में एक कोच को दूसरे पर चढ़ने से रोकती है, जिससे जनहानि की संभावना न्यूनतम हो जाती है और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इसी कड़ी में उत्तर पश्चिम रेलवे पर भी जोधपुर-भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस के 04 रैक एलएचबी में परिवर्तित किए गए हैं।

केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा हाल ही में 22 मई 2026 को भुज से दिल्ली के मध्य एक नई रेलसेवा का हरी झंडी दिखाकर भव्य शुभारम्भ किया गया। यह नई रेलसेवा भी एलएचबी रैक से संचालित की जा रही है, जो पश्चिमी राजस्थान के जालौर व पाली मारवाड़ क्षेत्र को सीधे जयपुर और देश की राजधानी दिल्ली के साथ सुगम व आधुनिक कनेक्टिविटी प्रदान कर रही है। उत्तर पश्चिम रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के मई माह तक अपने स्वामित्व वाली कुल 193 जोड़ी रेलसेवाओं में से 88 जोड़ी के 106 रैक को एलएचबी कोचों में परिवर्तित कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

तकनीकी दृष्टि से ये एलएचबी कोच डिस्क ब्रेक, एयर स्प्रिंग सस्पेंशन और उन्नत ब्रेकिंग प्रणाली से सुसज्जित हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए इनमें आरामदायक सीटें, आधुनिक शौचालय, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट्स और शोर रहित वातावरण सुनिश्चित किया गया है। पारंपरिक कोचों की तुलना में अधिक गति क्षमता रखने वाले इन रैक के उपयोग से ट्रेनों की समयपालनता में भी व्यापक सुधार हो रहा है। भारतीय रेल का यह निरंतर प्रयास न केवल रेल परिवहन को आधुनिक बना रहा है, बल्कि भविष्य में और अधिक ट्रेनों में एलएचबी कोच लगाकर यात्रियों को सुरक्षित एवं सुखद यात्रा का वैश्विक अनुभव प्रदान करने के संकल्प को भी सिद्ध कर रहा है।

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