नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ विजन के तहत वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। बोगियों, कोचों, लोकोमोटिव और प्रणोदन प्रणालियों सहित अनेक महत्वपूर्ण रेलवे उपकरणों का निर्यात अब भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया है। जिस देश की रेल व्यवस्था कभी विदेशी तकनीक पर निर्भर थी, वही देश आज अपने नवाचार और कौशल से दुनिया की रेल लाइनों पर अपनी छाप छोड़ रहा है।

बीते जून 2025 का दिन भारतीय रेलवे के इतिहास में यादगार बन गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मढ़ौरा स्थित लोकोमोटिव निर्माण संयंत्र से गिनी गणराज्य के लिए निर्यात होने वाले पहले इंजनों को हरी झंडी दिखाई। यह दृश्य केवल एक औपचारिक समारोह नहीं था, बल्कि यह भारत की औद्योगिक क्षमता और वैश्विक बाजारों में बढ़ते विश्वास का जीवंत प्रतीक था। अब तक मढ़ौरा में निर्मित छह इंजन सफलतापूर्वक गिनी गणराज्य पहुंच चुके हैं, जहां वे अफ्रीका की रेल लाइनों पर भारत की शक्ति और विश्वसनीयता की पहचान बनकर दौड़ रहे हैं।

मढ़ौरा संयंत्र ने हाल ही में इवोल्यूशन सीरीज़ इंजनों के निर्यात का दूसरा रणनीतिक ऑर्डर हासिल किया है। इसके साथ ही अफ्रीका के लिए कुल निर्यात का आंकड़ा लगभग 150 इकाइयों तक पहुंचने की संभावना है। यह उपलब्धि न केवल भारत की विनिर्माण क्षमता को रेखांकित करती है, बल्कि वैश्विक रेलवे आपूर्ति श्रृंखला में देश की मजबूत हिस्सेदारी का प्रमाण भी है।

ये 4,500 एचपी क्षमता वाले इवोल्यूशन सीरीज़ लोकोमोटिव अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ ईंधन दक्षता और उच्च तापमान वाले वातावरण में भरोसेमंद प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं। अफ्रीका जैसे चुनौतीपूर्ण मौसम और परिचालन परिस्थितियों में भी इनका प्रदर्शन भारतीय इंजीनियरिंग के उच्च मानकों का साक्षात उदाहरण है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह निर्यात भारतीय रेलवे के लिए एक नया अध्याय है, जो देश को केवल उपभोक्ता ही नहीं बल्कि प्रौद्योगिकी प्रदाता और नवप्रवर्तक की भूमिका में स्थापित करता है।

भारतीय रेलवे उत्पादों का अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने का सफर भी उल्लेखनीय रहा है। आज भारतीय मेट्रो कोच ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की ट्रेनों की शोभा बढ़ा रहे हैं। ब्रिटेन, सऊदी अरब, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया में भारतीय बोगियां उपयोग में हैं, जबकि फ्रांस, मैक्सिको, रोमानिया, स्पेन, जर्मनी और इटली तक भारत की प्रणोदन प्रणालियां पहुंच चुकी हैं। इसी तरह, यात्री कोच मोजाम्बिक, बांग्लादेश और श्रीलंका में और लोकोमोटिव मोजाम्बिक, सेनेगल, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश और गिनी गणराज्य की रेल लाइनों पर सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं।

मढ़ौरा का संयंत्र इस सफर की धुरी है। यहां से निकलने वाले लोकोमोटिव केवल इंजनों के रूप में नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी दृष्टि, कौशल विकास और सार्वजनिक-निजी भागीदारी की सफलता का प्रतीक बनकर विदेशों तक जा रहे हैं। यह संयंत्र आधुनिक विनिर्माण तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित उत्पादन प्रक्रिया के लिए जाना जाता है।

रेल मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता भारत की आर्थिक कूटनीति और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को नई ऊर्जा प्रदान करती है। ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ अभियान का मूल लक्ष्य ही यही है भारतीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और उन्हें विश्वसनीय ब्रांड के रूप में स्थापित करना।

आज जब गिनी गणराज्य की पटरियों पर भारतीय इंजनों की गूंज सुनाई देती है, तो यह केवल एक कारोबारी लेन-देन की कहानी नहीं होती। यह उस भारत की कहानी है जिसने अपनी मेहनत, तकनीक और दूरदृष्टि से औद्योगिक विकास की नई परिभाषा गढ़ी है। मढ़ौरा से गिनी तक की यह यात्रा दर्शाती है कि भारतीय रेलवे अब सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि दुनिया की रेल यात्रा का भी अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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