भारतीय रेलवे में AI के बढ़ते उपयोग से सुरक्षा, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, ऊर्जा संरक्षण और यात्री सुविधाओं में बड़े बदलाव की संभावनाएं सामने आई हैं।

भारतीय रेलवे के संचालन, रखरखाव और व्यावसायिक गतिविधियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का व्यापक उपयोग भविष्य में बड़े बदलाव का आधार बन सकता है। दुनिया भर में AI जिस तेजी से संस्थानों के कामकाज का तरीका बदल रहा है, उसी तरह भारतीय रेलवे भी रखरखाव, परिचालन और वाणिज्यिक गतिविधियों में इसकी मदद से अपनी कार्यक्षमता, दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। विपणन, डेटा विश्लेषण, खरीद प्रक्रिया और दैनिक संचालन से लेकर दोहराए जाने वाले कार्यों के स्वचालन तथा बुद्धिमत्तापूर्ण विश्लेषण तक AI संस्थानों को बेहतर प्रदर्शन और अधिक प्रभावी कार्यप्रणाली उपलब्ध करा रहा है।

भारतीय रेलवे में AI का सबसे प्रभावशाली उपयोग प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस के क्षेत्र में देखा जा सकता है। उन्नत सेंसरों के साथ AI की सहायता से ट्रैक फिटिंग के गायब होने, रेल पटरियों में दरार, पुलों की असुरक्षित स्थिति, विशेषकर उनके अप्रोच क्षेत्रों में संभावित खतरे तथा पटरियों या अंडरपास के आसपास बढ़ते जलस्तर जैसी समस्याओं का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकता है। इसके साथ ही AI डेटा के रुझानों का विश्लेषण कर रखरखाव की बेहतर योजना, इन्वेंट्री और लागत प्रबंधन तथा ऐसी पूर्वानुमान आधारित कार्रवाई सुनिश्चित कर सकता है, जिससे किसी भी खराबी के उत्पन्न होने से पहले ही उसे रोका जा सके।

यह सक्रिय व्यवस्था कार्यभार में उल्लेखनीय कमी लाने, डिपो में निरीक्षण का समय घटाने तथा वैगनों और कोचों के टर्नअराउंड समय में सुधार करने में सहायक हो सकती है, जिससे समग्र उत्पादकता बढ़ेगी। AI डिपो कर्मियों और ट्रेन संचालन से जुड़े कर्मचारियों के लिए एक केंद्रीय ज्ञान भंडार के रूप में भी कार्य कर सकता है तथा आधिकारिक मैनुअल के अनुसार विभिन्न तकनीकी दोषों के समाधान में उनकी सहायता कर सकता है।

ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में भी AI महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह लोको पायलटों को सबसे प्रभावी थ्रॉटल और ईंधन उपयोग की रणनीति सुझाकर ईंधन की खपत और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी ला सकता है। इसके अलावा, लोकोमोटिव तथा महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाए गए AI आधारित कैमरे और लेजर स्कैनर वास्तविक समय में ओवरहेड उपकरणों का निरीक्षण कर सकते हैं, लेवल क्रॉसिंग पर पटरियों को अवरुद्ध करने वाले वाहनों की पहचान कर सकते हैं तथा विद्युतीकृत क्षेत्रों में मानव अतिक्रमण की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को तत्काल सतर्क कर सकते हैं।

यात्रियों के लिए भी AI यात्रा को अधिक सरल, सुविधाजनक और सुखद बना सकता है। रियल टाइम इंटेलिजेंट गाइडेंस की सहायता से यात्री एक ही उपयोगकर्ता-अनुकूल प्लेटफॉर्म पर कोच, प्रतीक्षालय, लाउंज, चिकित्सा सुविधाओं और ऑनबोर्ड स्टाफ की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। डिजिटल इमेजिंग और AI प्लेटफॉर्म तथा ट्रेनों में भीड़ की निगरानी कर बेहतर भीड़ प्रबंधन और भविष्य की आधारभूत संरचना की योजना बनाने में भी मदद कर सकते हैं।

हालांकि भारतीय रेलवे ने अपनी परिसंपत्तियों के आधुनिकीकरण की दिशा में उत्साहजनक प्रगति की है, लेकिन अभी लंबा सफर तय करना बाकी है। दक्षता, प्रभावशीलता और मितव्ययिता के वैश्विक मानकों तक पहुंचने के लिए रेलवे के मुख्य संचालन तंत्र में AI का व्यवस्थित एकीकरण आवश्यक माना गया है। AI का सोच-समझकर उपयोग भारतीय रेलवे को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट, टिकाऊ और वास्तविक अर्थों में यात्री-केंद्रित बनाकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार कर सकता है। लेख के लेखक वर्ष 2009 बैच के इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस (IRTS) के अधिकारी हैं।

Pratahkal Bureau

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