भारतीय रेलवे में सुरक्षा हेतु उन्नत एआई और मशीन लर्निंग तकनीक तैनात
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में त्रि-नेत्र प्रणाली, एमवीआईएस और नई रेल प्रौद्योगिकी नीति 2026 के कार्यान्वयन की विस्तृत जानकारी साझा की।

भारतीय रेलवे ने स्मार्ट मॉनिटरिंग को अपनाकर सुरक्षा और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए उन्नत एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों को तैनात किया है। रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में प्रश्नों के उत्तर में यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। भारतीय रेल में तकनीकी सुधार एक सतत प्रक्रिया है, जिसके तहत कई अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को लागू या परीक्षण किया जा रहा है। कोहरे और प्रतिकूल मौसम की स्थिति में लोको पायलटों को बेहतर दृश्यता प्रदान करने के लिए अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा त्रि-नेत्र (TRI-NETRA) प्रणाली विकसित की जा रही है। यह प्रणाली ऑप्टिकल कैमरों, इन्फ्रारेड कैमरे और रेंजिंग उपकरणों जैसे रडार या लिडार और एआई से मिलकर लोको चालकों की सहायता के लिए एक वास्तविक समय, उन्नत विज़न प्रणाली बनाती है।
पहियों और ट्रैक की वास्तविक समय में निगरानी
रेलवे संपत्तियों की सुरक्षा के लिए पहियों और बियरिंग की स्थिति की वास्तविक समय में निगरानी हेतु 24 व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर (डब्ल्यूआईएलडी) सिस्टम और 25 ऑनलाइन मॉनिटरिंग ऑफ रोलिंग स्टॉक (ओएमआरएस) सिस्टम स्थापित किए गए हैं। डब्ल्यूआईएलडी एक वे-साइड निरीक्षण प्रणाली है जो रोलिंग स्टॉक में दोषपूर्ण पहिए की पहचान करने के लिए ट्रैक पर पहिए के प्रभाव को मापती है। वहीं, ओएमआरएस एक मार्ग-तटीय निरीक्षण प्रणाली है जो रोलिंग स्टॉक के बेयरिंग और पहियों की स्थिति की निगरानी करती है, जिसमें से एक ओएमआरएस दक्षिण मध्य रेलवे के सिरपुर कागज नगर या सिकंदराबाद डिवीजन में कार्यरत है। इसके साथ ही, ट्रैक घटकों के एआई-आधारित निरीक्षण और निगरानी के लिए 3 एकीकृत ट्रैक मॉनिटरिंग सिस्टम (आईटीएमएस) तैनात किए गए हैं। आईटीएमएस रेल, स्लीपर और फास्टनिंग्स जैसे घटकों में दोषों की पहचान करने के लिए मशीन लर्निंग और इमेज प्रोसेसिंग का उपयोग करता है, जिससे बेहतर ट्रैक रखरखाव योजना और बढ़ी हुई सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
मशीन विजन और ड्रोन आधारित उन्नत निरीक्षण
मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम (एमवीआईएस) को पायलट आधार पर तैनात किया गया है, जिसमें पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में 3 सिस्टम, डीएफसीसीआईएल में 2 और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में मालगाड़ियों के लिए 1 सिस्टम शामिल है। एमवीआईएस एक एआई/एमएल आधारित प्रणाली है जो चलती ट्रेनों के किसी भी लटके हुए, ढीले या गायब पुर्जों का पता लगाने पर तुरंत अलर्ट जारी करती है। सीमांत रेलवे और डीएफसीसीआईएल के बीच चार और एमवीआईएस शामिल करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं तथा आरडीएसओ ने उद्योग के सहयोग से रोलिंग स्टॉक के लिए इसके विकास का कार्य शुरू किया है। इसके अतिरिक्त, रायपुर डिवीजन में ओवरहेड उपकरणों की ड्रोन-आधारित थर्मल निगरानी का पायलट परीक्षण किया गया है। भारतीय रेलवे ने आईआईटी मद्रास के सहयोग से ओवरहेड उपकरण (ओएचई) के ड्रोन आधारित हवाई निरीक्षण का विकास कार्य शुरू किया है, जो एआई/एमएल का उपयोग करके कैप्चर किए गए डेटा का विश्लेषण भी करेगा।
रेल प्रौद्योगिकी नीति और स्टार्टअप्स के लिए नया पोर्टल
एआई-संचालित और स्केलेबल नवाचारों को गति देने के लिए रेल प्रौद्योगिकी नीति और एक समर्पित पोर्टल विकसित किए जा रहे हैं। लागत प्रभावी और डेटा-संचालित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रेल सेवा द्वारा 26.02.2026 को "रेल प्रौद्योगिकी नीति" नामक एक नई नीति अपनाई गई है। नवप्रवर्तकों और स्टार्टअप्स की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए एक पोर्टल (https://railtech.indianrailways.gov.in) का शुभारंभ किया गया है। इस प्रस्तावित नीति की प्रमुख विशेषताओं में "नवप्रवर्तक द्वारा प्रस्तावों का एकल-चरण विस्तृत प्रस्तुतीकरण और रेल प्रौद्योगिकी पोर्टल पर स्वयं शुरू की गई चुनौतियों के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने का प्रावधान शामिल है।" इसके अलावा, "भारतीय रेलवे और नवप्रवर्तक के बीच 50:50 लागत-साझाकरण के आधार पर वित्तपोषण का प्रावधान है, जिसमें प्रोटोटाइप विकास और परीक्षणों के लिए अधिकतम अनुदान दिया जाएगा तथा विस्तारित परीक्षणों या विस्तार के लिए भी अनुदान की पेशकश की जाती है।" यह प्रस्तावित नीति भारतीय रेलवे में नई प्रौद्योगिकियों को शीघ्र अपनाने में सुविधा प्रदान करेगी और सुरक्षा मानकों को नए आयाम देगी।

Pratahkal Bureau
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