भारतीय रेलवे ने 54,600 किमी पटरियों का किया नवीनीकरण, सुरक्षा और गति में वृद्धि
रेलवे नेटवर्क का 80% हिस्सा अब 110 किमी/घंटा की गति के सक्षम, आधुनिकीकरण के लिए अपनाई गई उन्नत तकनीक और मशीनीकृत रखरखाव प्रणाली।

भारतीय रेलवे द्वारा पटरियों के आधुनिकीकरण के तहत बिछाई गई 60 किलोग्राम भार वाली आधुनिक ट्रैक संरचना और पीएससी स्लीपर, जो उच्च गति संचालन सुनिश्चित करते हैं।
भारतीय रेलवे द्वारा 2014-26 के दौरान सुरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए 54,600 किमी पटरियों का नवीनीकरण किया गया है। रेल नेटवर्क का 80% से अधिक हिस्सा अब 110 किमी प्रति घंटे और उससे अधिक की गति सीमा में सक्षम है, जो 2014 में मात्र 40% था। इसी अवधि में 130 किमी प्रति घंटे और उससे अधिक की गति सीमा वाली पटरियों में 3.5 गुना वृद्धि देखी गई है, जो 6.3% से बढ़कर अब 22.4% हो गई है। यह महत्वपूर्ण जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में प्रश्नों के उत्तर देते हुए साझा की।
पटरियों का उन्नयन और सुरक्षा मानक
पटरियों का उन्नयन और नवीनीकरण एक सतत प्रक्रिया है। पटरियों का नवीनीकरण निर्धारित मानदंडों के अनुसार किया जाता है, जो उनकी आयु, यातायात, स्थिति आदि पर आधारित होते हैं। पटरियों की स्थिति और अन्य कई कारकों को प्राथमिकता देते हुए, पटरियों के नवीनीकरण कार्यों की योजना बनाई जाती है और उन्हें क्रियान्वित किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पटरियां अनुमत गति से चलने के लिए सुरक्षित हैं। वर्ष 2014-26 (फरवरी 2026 तक) के दौरान पूरे रेलवे नेटवर्क में कुल 54,600 किमी पटरियों का नवीनीकरण किया गया है। भारतीय रेलवे (IR) में रेल संचालन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है और भारतीय रेलवे स्थायी मार्ग नियमावली में निर्धारित अनुसार, रेलवे पटरियों के निरीक्षण और रखरखाव की एक सुस्थापित प्रणाली मौजूद है।
आधुनिक निरीक्षण प्रणाली और रखरखाव
भारतीय रेलवे पर पटरियों का निरीक्षण निर्धारित समय सारणी के अनुसार नामित अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से किया जाता है। इसमें दैनिक गश्त, पैदल निरीक्षण, ट्रॉली निरीक्षण और संबंधित अधिकारियों द्वारा फुट प्लेट/रियर विंडो निरीक्षण शामिल हैं। इसके अलावा, पटरी की ज्यामिति की स्थिति का वस्तुनिष्ठ आकलन करने के लिए, निर्धारित अंतराल पर ट्रैक रिकॉर्डिंग कार (टीआरसी) और ऑसिलेशन मॉनिटरिंग सिस्टम (ओएमएस) का संचालन किया जाता है। टीआरसी और ओएमएस संचालन के माध्यम से भारतीय रेलवे का संपूर्ण रेलवे नेटवर्क कवर किया जाता है। विभिन्न निरीक्षणों के आधार पर, पटरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध तरीके से आवश्यक कार्रवाई की जाती है।
पटरियों के आधुनिकीकरण हेतु उठाए गए कदम
भारतीय रेलवे में पटरी अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, उन्नयन, आधुनिकीकरण और सुधार एक सतत प्रक्रिया है। प्राथमिक ट्रैक नवीनीकरण के दौरान 60 किलोग्राम भार और 90 मीटर अल्टीमेट टेन्साइल स्ट्रेंथ (UTS) वाली आधुनिक ट्रैक संरचना, चौड़े और भारी प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट स्लीपर (PSC) जिनमें इलास्टिक फास्टनिंग लगी है, PSC स्लीपरों पर फैन-शेप्ड लेआउट टर्नआउट और गर्डर ब्रिजों पर H-बीम स्लीपर का उपयोग किया जा रहा है। टर्नआउट नवीनीकरण कार्यों में थिक वेब स्विच और वेल्डेबल CMS क्रॉसिंग का उपयोग किया जा रहा है। जोड़ों की वेल्डिंग से बचने के लिए 260 मीटर लंबे रेल पैनलों की आपूर्ति बढ़ा दी गई है, जिससे सुरक्षा और सवारी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। पहले के पारंपरिक/उन्नत SEJ के स्थान पर थिक वेब स्विच एक्सपेंशन जॉइंट का उपयोग किया जा रहा है और रेल के लिए बेहतर वेल्डिंग तकनीक, जैसे फ्लैश बट वेल्डिंग को अपनाया जा रहा है।
उन्नत तकनीक और भविष्य की योजनाएं
ट्रैक की बेहतर रखरखाव क्षमता और विश्वसनीयता के लिए उच्च आउटपुट वाले प्लेन टैम्पर और पॉइंट्स और क्रॉसिंग टैम्पर का उपयोग करते हुए ट्रैक रखरखाव के लिए मशीनीकृत प्रणाली को अपनाया जा रहा है। रेल ग्राइंडिंग मशीनों सहित अत्याधुनिक आधुनिक मशीनों की तैनाती से परिसंपत्ति विश्वसनीयता में और सुधार होगा। पीक्यूआरएस, टीआरटी, टी-28 आदि जैसी ट्रैक मशीनों के उपयोग से ट्रैक बिछाने की गतिविधियों का मशीनीकरण होगा। लेवल क्रॉसिंग (एलसी) गेटों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए उनका इंटरलॉकिंग किया जाएगा। रेल और वेल्ड की जांच के लिए उन्नत फेज़्ड ऐरे तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इष्टतम रखरखाव आवश्यकताओं का पता लगाने के लिए व्यापक स्वास्थ्य मूल्यांकन हेतु एकीकृत ट्रैक निगरानी प्रणाली (आईटीएमएस) और दोलन निगरानी प्रणाली (ओएमएस) की तैनाती की जाएगी। यार्ड में ट्रैक मापदंडों की निरंतर रिकॉर्डिंग के लिए पोर्टेबल ट्रैक मापन ट्रॉली को अपनाया जाएगा। सटीक रखरखाव इनपुट प्रदान करने के लिए विभिन्न स्रोतों से प्राप्त ट्रैक निरीक्षण रिकॉर्ड के एकीकरण और डेटा विश्लेषण हेतु वेब-सक्षम ट्रैक प्रबंधन प्रणाली (टीएमएस) का उपयोग किया जाएगा।
गति क्षमता में ऐतिहासिक बदलाव का विवरण
उपरोक्त उपायों के परिणामस्वरूप, पटरियों की गति क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 130 किमी प्रति घंटा और उससे अधिक की खंडीय गति वाली पटरियां 2014 में 5,036 पटरी किमी (6.3%) थीं, जो 2026 तक बढ़कर 23,713 पटरी किमी (22.4%) हो गई हैं। 110 से 130 किमी प्रति घंटा की गति वाली पटरियां 2014 में 26,409 पटरी किमी (33.3%) थीं, जो अब 62,036 पटरी किमी (58.7%) हो चुकी हैं। वहीं, 110 किमी प्रति घंटा से कम गति वाली पटरियां जो 2014 में 47,897 पटरी किमी (60.4%) थीं, वे घटकर अब 19,923 पटरी किमी (18.9%) रह गई हैं। कुल रेलवे नेटवर्क 2014 के 79,342 पटरी किमी से बढ़कर 2026 फरवरी तक 1,05,672 पटरी किमी हो गया है।

Pratahkal Bureau
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