भारतीय रेलवे अपने इतिहास के सबसे बड़े तकनीकी परिवर्तन की ओर बढ़ रही है। वर्ष 1986 से संचालित हो रही चार दशक पुरानी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को अब एक अत्याधुनिक और आधुनिक तकनीक आधारित प्रणाली से बदला जाने वाला है। रेलवे अगस्त 2026 से इस नई आरक्षण प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करना शुरू करेगी। इसे भारतीय रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था के इतिहास में दशकों का सबसे बड़ा आधुनिकीकरण माना जा रहा है, जो करोड़ों यात्रियों के यात्रा अनुभव को पूरी तरह बदल सकता है।

जब मौजूदा पीआरएस प्रणाली शुरू की गई थी, तब रेलवे टिकटों की बुकिंग मुख्य रूप से आरक्षण काउंटरों के माध्यम से होती थी। उस दौर में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का दायरा बेहद सीमित था। लेकिन पिछले चार दशकों में रेलवे यात्रा के स्वरूप में व्यापक बदलाव आया है। वर्ष 2002 में ऑनलाइन टिकट बुकिंग की शुरुआत हुई और आज स्थिति यह है कि लगभग 88 प्रतिशत रेलवे टिकट ऑनलाइन माध्यम से बुक किए जाते हैं। बढ़ती डिजिटल मांग के बीच पुरानी प्रणाली में समय-समय पर सुधार किए गए, लेकिन इसके बावजूद त्योहारों, छुट्टियों और विशेष रूप से तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान सिस्टम पर अत्यधिक दबाव देखने को मिलता रहा है।



नई आरक्षण प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ इसकी क्षमता में होने वाली अभूतपूर्व वृद्धि होगी। वर्तमान व्यवस्था प्रति मिनट लगभग 25,000 से 32,000 टिकट बुकिंग को संभाल सकती है, जबकि नया प्लेटफॉर्म प्रति मिनट 1.5 लाख तक टिकट बुकिंग को प्रोसेस करने में सक्षम होगा। इससे तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान होने वाली तकनीकी परेशानियों, वेबसाइट के धीमे पड़ने और बार-बार आने वाले ‘प्लीज ट्राय अगेन’ जैसे संदेशों में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। रेलवे का मानना है कि नई प्रणाली त्योहारों और व्यस्त यात्रा सीजन के दौरान भी अधिक सुचारु रूप से कार्य करेगी।

नई व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। अपग्रेडेड प्लेटफॉर्म यात्रियों को यह अनुमान लगाने में मदद करेगा कि उनकी वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। रेलवे के अनुसार, इस एआई आधारित प्रेडिक्शन सिस्टम की सटीकता लगभग 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे यात्रियों को अपनी यात्रा योजना बनाने में अधिक स्पष्टता और सुविधा मिलेगी।

यात्रियों को टिकट बुकिंग प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नई प्रणाली के लागू होने के बाद टिकट खोजने और बुक करने की गति पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज होगी। वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर भीड़भाड़ कम होगी, तत्काल बुकिंग के दौरान प्रदर्शन बेहतर रहेगा और आरक्षण व पूछताछ सेवाएं अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनेंगी।

तकनीकी दृष्टि से भी यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है। नई पीआरएस प्रणाली को आधुनिक क्लाउड-आधारित और माइक्रोसर्विसेज आर्किटेक्चर पर विकसित किया गया है। यह उस पुरानी तकनीकी संरचना की जगह लेगी, जो दशकों से रेलवे आरक्षण प्रणाली की रीढ़ बनी हुई थी। आधुनिक तकनीक के उपयोग से भविष्य में सिस्टम को अपग्रेड करना आसान होगा और इसकी विश्वसनीयता में भी सुधार आएगा।

इस डिजिटल परिवर्तन में रेलवन (RailOne) ऐप की भूमिका भी अहम रहने वाली है। रेलवे की नई आरक्षण प्रणाली इस ऐप के साथ मिलकर कार्य करेगी। रेलवन ऐप वर्तमान में भारतीय रेलवे के प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में से एक बन चुका है और इसके डाउनलोड की संख्या 3.5 करोड़ से अधिक हो चुकी है। इस ऐप के माध्यम से आरक्षित और अनारक्षित टिकट बुकिंग, प्लेटफॉर्म टिकट, टिकट रद्दीकरण और रिफंड, लाइव ट्रेन स्टेटस, प्लेटफॉर्म संबंधी जानकारी, कोच पोजिशन, रेल मदद सहायता सेवा तथा सीट पर भोजन मंगाने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

रेलवे इस बदलाव को एक साथ लागू नहीं करेगी। इसके बजाय अगस्त से ट्रेनों को धीरे-धीरे नई प्रणाली में स्थानांतरित किया जाएगा। संक्रमण काल के दौरान पुरानी और नई दोनों प्रणालियां समानांतर रूप से संचालित होंगी ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि माइग्रेशन प्रक्रिया के दौरान यात्रियों की सुविधा और सेवाओं की निरंतरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय रेलवे इस आरक्षण प्रणाली के आधुनिकीकरण और संबंधित डिजिटल बुनियादी ढांचे के उन्नयन पर लगभग 1,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। यह निवेश केवल तकनीकी सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे की भविष्य की डिजिटल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत और दीर्घकालिक आधार तैयार करने का प्रयास भी है। नई प्रणाली के शुरुआती प्रभाव यात्रियों को तेज टिकट बुकिंग, बेहतर तत्काल सेवा, अधिक सटीक वेटिंग लिस्ट पूर्वानुमान, वेबसाइट और ऐप पर कम तकनीकी बाधाएं, बेहतर मोबाइल अनुभव और त्योहारों तथा अवकाश के दौरान बढ़ी हुई बुकिंग क्षमता के रूप में दिखाई देंगे।

वर्ष 1986 में शुरू की गई पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम आज भी दुनिया की सबसे पुरानी और बड़े पैमाने पर उपयोग की जाने वाली सार्वजनिक आरक्षण प्रणालियों में शामिल है। ऐसे में इसका प्रतिस्थापन केवल एक तकनीकी अपग्रेड नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के डिजिटल भविष्य की नई नींव रखने जैसा है। करोड़ों यात्रियों के लिए यह बदलाव वर्ष 2002 में ऑनलाइन टिकट बुकिंग शुरू होने के बाद रेलवे टिकटिंग व्यवस्था में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक परिवर्तन साबित हो सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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