नई दिल्ली: सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारतीय रेलवे ने 2025-26 के दौरान अभूतपूर्व पहल करते हुए देशभर के विभिन्न जोनों में 81 लाख 59 हजार पेड़ों का व्यापक पौधरोपण किया है। रेलवे ट्रैकों के किनारे किया गया यह हरित विस्तार न केवल मिट्टी के कटाव को रोक रहा है, बल्कि यात्रियों के लिए सफर को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और हरित अनुभव में बदल रहा है।

“आवर पावर, आवर प्लैनेट” विजन को आगे बढ़ाते हुए भारतीय रेलवे ने पर्यावरण-अनुकूल पहलों को तेज किया है। उपचारित वर्षा जल के प्रभावी उपयोग, बायो टॉयलेट्स के निर्माण और जल संरक्षण ढांचे के विस्तार के जरिए रेलवे एक स्वच्छ और हरित परिवहन प्रणाली की ओर अग्रसर है। वर्ष 2014 से अब तक 3.66 लाख बायो टॉयलेट्स स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे ट्रैक साफ-सुथरे बने हुए हैं, मिट्टी और भूजल की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है और रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए स्वच्छता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

रेलवे का 99.6 प्रतिशत ब्रॉड गेज नेटवर्क अब विद्युतीकृत हो चुका है, जिससे डीजल की खपत में भारी कमी आई है और पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिली है। यह कदम ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जल संरक्षण के क्षेत्र में भी रेलवे ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2016-17 से अब तक 8,313 वर्षा जल संचयन संरचनाएं स्थापित की गई हैं, जो स्टेशनों पर वर्षा जल को प्रभावी ढंग से संग्रहित कर रही हैं। इसके अलावा, पिछले वित्त वर्ष में 26 नए जल पुनर्चक्रण संयंत्र चालू किए गए हैं, जिससे 2015-16 से अब तक कुल 185 उपचार संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। यह पहल रेलवे को “साइलेंट रिवोल्यूशन” के रूप में हरित परिवर्तन की दिशा में अग्रसर कर रही है।

पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के लिए रेलवे भूमि पर 109 तालाब, टैंक और आर्द्रभूमियों का पुनर्स्थापन किया गया है। इससे स्थानीय जलभृतों का पुनर्भरण हो रहा है और जैव विविधता को बढ़ावा मिल रहा है, जिसका लाभ रेलवे परिसीमा से बाहर के समुदायों तक पहुंच रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र में भी रेलवे ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 909 मेगावाट सौर और 103 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता का संचालन शुरू किया जा चुका है, जबकि अतिरिक्त 3,300 मेगावाट क्षमता के लिए समझौते किए गए हैं। यह कदम रेलवे को आत्मनिर्भर और टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली की ओर ले जा रहा है।

भारतीय रेलवे की ये पहलें न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूत कर रही हैं, बल्कि देश को स्वच्छ, सुरक्षित और सतत भविष्य की दिशा में भी एक निर्णायक बढ़त दे रही हैं।

Pratahkal Bureau

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