भारतीय रेलवे: सीमेंट ढुलाई में 170% की वृद्धि, अब फ्लाई ऐश पर नजर
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नए कंटेनर सुधारों की समीक्षा की; लॉजिस्टिक्स लागत घटने से मध्यम वर्ग के लिए किफायती आवास की राह हुई आसान।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव नई दिल्ली में रेलवे के नए बल्क सीमेंट टैंक कंटेनरों और माल ढुलाई सुधारों की समीक्षा करते हुए, जिससे लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार हुआ है।
भारतीय रेलवे द्वारा किए गए क्रांतिकारी सुधारों के परिणामस्वरूप पिछले चार महीनों में सीमेंट की आवाजाही में 170 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। यह सफलता पिछले वर्ष नवंबर में रेलवे द्वारा लागू की गई सुधारों की उस श्रृंखला का परिणाम है, जो निर्बाध एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स के लिए अभिनव बल्क सीमेंट टैंक कंटेनरों पर आधारित थी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज कंटेनर क्षेत्र के इन सुधारों और उनके प्रभावी कार्यान्वयन की गहन समीक्षा की। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य थोक सीमेंट की रेल-आधारित ढुलाई को सशक्त बनाना और सड़क परिवहन के मुकाबले स्वच्छ एवं अधिक कुशल रेल लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहित करना था। इसके लिए रेलवे ने विशेष टैंक कंटेनर और थोक सीमेंट टर्मिनल नीति को कड़ाई से लागू किया है, जिससे सीमेंट की बहुआयामी हैंडलिंग को बढ़ावा मिला है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने समीक्षा के दौरान रेखांकित किया कि इस नई प्रणाली से लोडिंग और अनलोडिंग की प्रक्रिया अत्यंत सरल हो गई है और सामग्री की बर्बादी में भारी कमी आई है। विशेष टैंक कंटेनरों के माध्यम से अब संयंत्रों में निर्मित सीमेंट सीधे उपभोग केंद्रों तक बिना किसी बाधा के पहुंच रहा है, जिससे मध्यवर्ती हैंडलिंग प्रक्रियाएं समाप्त हो गई हैं। ये कंटेनर मानक आकार के होने के साथ-साथ रेडी-मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) मशीनों के पूरी तरह अनुकूल हैं, जिससे सीमेंट निर्माण स्थलों तक उपयोग के लिए तैयार स्थिति में पहुंचता है। हैंडलिंग के दो चरणों की कटौती ने न केवल लॉजिस्टिक्स लागत को कम किया है, बल्कि टर्नअराउंड समय में भी उल्लेखनीय सुधार किया है।
सीमेंट लॉजिस्टिक्स में आया यह सुधार निर्माण उद्योग में एक 'खामोश क्रांति' का सूत्रपात कर रहा है। लागत में आई इस कमी से निर्माण सामग्री विशेषकर सीमेंट की कुल डिलीवरी लागत घटने की प्रबल उम्मीद है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए किफायती आवास का सपना साकार होना संभव हो सकेगा। इसके साथ ही, रेलवे के माध्यम से सीमेंट की अधिक आवाजाही ने सड़कों पर ट्रकों के बोझ को कम किया है, जिससे यातायात जाम की समस्या घटी है और माल ढुलाई की समग्र दक्षता में सुधार हुआ है।
इस सफलता से उत्साहित होकर रेल मंत्री ने अब अधिकारियों से फ्लाई ऐश परिवहन बाजार की अपार संभावनाओं को पहचानने का आग्रह किया है। उन्होंने बिजली संयंत्रों के अपशिष्ट को 'राष्ट्रीय संपदा' में बदलने के लिए सहयोग की अपील की है, ताकि इसका उपयोग सतत अवसंरचना विकास में किया जा सके। पर्यावरण के अनुकूल नए कंटेनर वैगन न केवल परिचालन को सरल बना रहे हैं, बल्कि "अपशिष्ट से धन" के दृष्टिकोण को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं। भारतीय रेलवे का यह कदम भविष्य में अधिक कुशल, लागत प्रभावी और विस्तार योग्य माल ढुलाई व्यवस्था की दिशा में एक निर्णायक मील का पत्थर सिद्ध होगा।

