वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारतीय रेलवे को मिले ₹2,93,030 करोड़ के कुल बजट अनुदान में से जुलाई 2026 तक ₹1,14,973 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं, जो कुल बजट का लगभग 39 प्रतिशत है। यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

भारतीय रेलवे ने कहा कि रेलवे सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और वर्षों में अपनाए गए विभिन्न सुरक्षा उपायों के परिणामस्वरूप रेल दुर्घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर व्यय लगातार बढ़ा है। वर्ष 2013-14 में यह राशि ₹39,200 करोड़ थी, जो 2022-23 में बढ़कर ₹87,336 करोड़, 2023-24 में ₹1,01,662 करोड़, 2024-25 में ₹1,14,022 करोड़, 2025-26 में ₹1,17,693 करोड़ और 2026-27 में ₹1,20,389 करोड़ तक पहुंच गई है।

रेल मंत्रालय ने बताया कि कवच स्वदेश में विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है, जिसे उच्चतम स्तर के सुरक्षा प्रमाणन (SIL-4) की आवश्यकता होती है। यह प्रणाली लोको पायलट को निर्धारित गति सीमा के भीतर ट्रेन संचालन में सहायता करती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। साथ ही प्रतिकूल मौसम में भी सुरक्षित परिचालन में मदद करती है।

कवच का पहला फील्ड ट्रायल फरवरी 2016 में यात्री ट्रेनों पर शुरू किया गया था। परीक्षणों और स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन के बाद वर्ष 2018-19 में तीन कंपनियों को कवच संस्करण 3.2 की आपूर्ति के लिए मंजूरी दी गई। जुलाई 2020 में कवच को राष्ट्रीय ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली के रूप में अपनाया गया।

रेलवे के अनुसार कवच प्रणाली के क्रियान्वयन में प्रत्येक स्टेशन और ब्लॉक सेक्शन पर स्टेशन कवच की स्थापना, पूरे ट्रैक पर RFID टैग लगाना, दूरसंचार टावर स्थापित करना, ट्रैक के साथ ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना तथा भारतीय रेलवे के सभी इंजनों में लोको कवच उपलब्ध कराना शामिल है।

दक्षिण मध्य रेलवे में 1,465 रूट किलोमीटर पर कवच संस्करण 3.2 के अनुभव के आधार पर इसमें सुधार किए गए और अंततः 16 जुलाई 2024 को अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) ने कवच संस्करण 4.0 के विनिर्देश को मंजूरी दी। रेलवे के अनुसार कवच 4.0 में अधिक सटीक लोकेशन, बड़े यार्ड में सिग्नल की बेहतर जानकारी, स्टेशन से स्टेशन कवच इंटरफेस के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल तथा मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली से प्रत्यक्ष इंटरफेस जैसी प्रमुख सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिससे इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना बनाई गई है।

31 जुलाई 2026 तक व्यापक परीक्षणों के बाद कवच संस्करण 4.0 को कुल 2,633 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक चालू किया जा चुका है। इसमें दिल्ली-मुंबई मार्ग पर 1,423 रूट किलोमीटर और दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर 1,210 रूट किलोमीटर शामिल हैं।

दिल्ली-मुंबई मार्ग में तिलक ब्रिज–जंक्शन केबिन–पलवल–मथुरा–कोटा–नागदा–रतलाम–वडोदरा–विरार सेक्शन में 1,327 रूट किलोमीटर तथा वडोदरा–अहमदाबाद सेक्शन में 96 रूट किलोमीटर पर कवच लागू किया गया है।

दिल्ली-हावड़ा मार्ग में चिपयाना–टूंडला–कानपुर–सूबेदारगंज सेक्शन में 563 रूट किलोमीटर, कानपुर–लखनऊ सेक्शन में 71 रूट किलोमीटर, मिर्जापुर–डीडीयू (डीडीयू को छोड़कर) सेक्शन में 64 रूट किलोमीटर, डीडीयू (FOC)–भभुआ रोड सेक्शन में 50 रूट किलोमीटर, सासाराम–फेसर सेक्शन में 43 रूट किलोमीटर, गया–सरमतरन–निमियाघाट सेक्शन में 159 रूट किलोमीटर तथा छोटा अंबाना–बर्दवान–हावड़ा सेक्शन में 260 रूट किलोमीटर पर कवच चालू किया गया है।

रेलवे ने बताया कि उपरोक्त में वडोदरा–विरार, गया–सरमतरन तथा जंक्शन केबिन–पलवल के लगभग 470 रूट किलोमीटर वाले तीन सेक्शन भी शामिल हैं, जहां 30 जनवरी 2026 को कवच चालू किया गया था।

इसके अतिरिक्त भारतीय रेलवे के सभी गोल्डन क्वाड्रिलेटरल (GQ), गोल्डन डायगोनल (GD), हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) तथा अन्य चिन्हित सेक्शनों को मिलाकर 21,794 रूट किलोमीटर पर ट्रैक साइड कवच कार्य जारी है।

कवच से जुड़े प्रमुख कार्यों की प्रगति के अनुसार अब तक 11,547 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है, 1,721 दूरसंचार टावर स्थापित किए गए हैं, 1,009 स्टेशनों पर स्टेशन डेटा सेंटर बनाए गए हैं, 7,726 रूट किलोमीटर पर ट्रैक साइड उपकरण लगाए गए हैं तथा 6,290 इंजनों में कवच लगाया जा चुका है। इसके अलावा 7,190 लोकोमोटिव और 1,200 ईएमयू/मेमू में कवच लगाने का कार्य भी शुरू किया गया है।

रेल मंत्रालय ने यह भी बताया कि दिल्ली-हावड़ा मार्ग के चिपयाना बुजुर्ग–टूंडला सेक्शन में वंदे भारत ट्रेनसेट के साथ 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पर कवच का सफल परीक्षण किया गया है।

कवच कार्यों पर जून 2026 तक ₹3,875 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए ₹2,066 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मंत्रालय के अनुसार पूरे देश में कवच का कार्य तेज गति से चल रहा है और कार्यों की प्रगति के अनुसार आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है।

रेलवे ने बताया कि ट्रेनों की गति बढ़ाना एक सतत प्रक्रिया है, जो ट्रैक, सिग्नलिंग प्रणाली, ओवरहेड उपकरण, उच्च क्षमता वाले लोकोमोटिव और आधुनिक कोचों के उन्नयन पर निर्भर करती है। पिछले 12 वर्षों में 60 किलोग्राम रेल, चौड़े आधार वाले कंक्रीट स्लीपर, थिक वेब स्विच, वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग, लंबे रेल पैनल, एच-बीम स्लीपर तथा आधुनिक ट्रैक नवीनीकरण एवं रखरखाव मशीनों के उपयोग से ट्रैक उन्नयन बड़े स्तर पर किया गया है।

इसके परिणामस्वरूप रेलवे ट्रैक की गति क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में 130 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक गति क्षमता वाले ट्रैक की लंबाई 5,036 किलोमीटर थी, जो कुल ट्रैक का 6.3 प्रतिशत थी। वर्ष 2026 में यह बढ़कर 24,173 किलोमीटर यानी 22.5 प्रतिशत हो गई। 110 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति क्षमता वाले ट्रैक 2014 में 26,409 किलोमीटर यानी 33.3 प्रतिशत थे, जो 2026 में बढ़कर 62,482 किलोमीटर यानी 58.1 प्रतिशत हो गए। 110 किलोमीटर प्रति घंटे से कम गति क्षमता वाले ट्रैक 2014 में 47,897 किलोमीटर यानी 60.4 प्रतिशत थे, जो 2026 में घटकर 20,897 किलोमीटर यानी 19.4 प्रतिशत रह गए। कुल ट्रैक लंबाई 2014 में 79,342 किलोमीटर थी, जो 2026 में बढ़कर 1,07,552 किलोमीटर हो गई। रेलवे के अनुसार अब लगभग 81 प्रतिशत ट्रैक 110 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक गति क्षमता वाले हैं।

रेल मंत्रालय ने बताया कि मिशन रफ्तार के तहत गोल्डन क्वाड्रिलेटरल के दो प्रमुख मार्ग नई दिल्ली–मुंबई और नई दिल्ली–हावड़ा पर गति क्षमता को 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।

रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए पिछले 12 वर्षों में नए ट्रैक बिछाने का कार्य भी तेज किया गया है। वर्ष 2009-14 के दौरान 7,599 किलोमीटर नए ट्रैक चालू किए गए थे, जिसकी औसत गति 4.2 किलोमीटर प्रतिदिन थी। वहीं वर्ष 2014-26 के दौरान 36,429 किलोमीटर नए ट्रैक चालू किए गए, जिसकी औसत गति 8.32 किलोमीटर प्रतिदिन रही, जो लगभग दोगुनी है।

1 अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार भारतीय रेलवे में कुल 514 अवसंरचना परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इनमें 169 नई लाइन परियोजनाएं, 29 गेज परिवर्तन परियोजनाएं और 316 दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं। इनकी कुल लंबाई 40,000 किलोमीटर है तथा अनुमानित लागत लगभग ₹8.31 लाख करोड़ है।

नई लाइन परियोजनाओं की कुल लंबाई 16,634 किलोमीटर है, जिनमें मार्च 2026 तक 3,361 किलोमीटर का कार्य पूरा हो चुका है और ₹1,57,572 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। गेज परिवर्तन की 29 परियोजनाओं की कुल लंबाई 3,987 किलोमीटर है, जिनमें 3,045 किलोमीटर पूरा किया जा चुका है तथा ₹24,227 करोड़ खर्च हुए हैं। दोहरीकरण की 316 परियोजनाओं की कुल लंबाई 19,379 किलोमीटर है, जिनमें 6,177 किलोमीटर पूरा हो चुका है और ₹1,23,454 करोड़ व्यय किए गए हैं। कुल मिलाकर 12,583 किलोमीटर कार्य पूरा किया जा चुका है और मार्च 2026 तक ₹3,05,253 करोड़ खर्च किए गए हैं।

रेल मंत्रालय ने कहा कि भारतीय रेलवे ने कर्मचारियों की कार्यक्षमता, प्रेरणा और पेशेवर दक्षता बढ़ाने के लिए संरचित क्षमता निर्माण और उन्नत प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित की है। कौशल विकास, पुनः कौशल विकास और कौशल उन्नयन की प्रक्रिया को संस्थागत रूप दिया गया है। इसके लिए केंद्रीकृत प्रशिक्षण संस्थान (CTIs), बहु-विषयक जोनल प्रशिक्षण संस्थान (MDZTIs), बहु-विषयक मंडलीय प्रशिक्षण संस्थान (MDDTIs) और विशेष प्रशिक्षण केंद्रों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया गया है, जहां नियुक्ति, पुनर्ताजगी, पदोन्नति और तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।

प्रशिक्षण मॉड्यूल कर्मचारियों को आधुनिक, तकनीक आधारित रेलवे परिचालन, माल ढुलाई के डिजिटलीकरण, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, ग्राहक-केंद्रित माल सेवाओं तथा अन्य परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए समय-समय पर अद्यतन किए जाते हैं। कर्मचारियों को सेवा के विभिन्न चरणों में इंडक्शन, पदोन्नति, रिफ्रेशर, विशेष और तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

रेल मंत्रालय के अनुसार प्रत्येक वर्ष लगभग छह लाख रेलवे कर्मचारियों को इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे उनकी पेशेवर दक्षता और क्षमता का निरंतर विकास सुनिश्चित होता है।

भारतीय रेलवे के केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान और गति शक्ति विश्वविद्यालय (GSV) रेल परिचालन, वाणिज्यिक प्रबंधन तथा रेलवे परिचालन से संबंधित प्रमाणन और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित करते हैं। इन कार्यक्रमों में कोल इंडिया लिमिटेड (CIL), नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NTPC), स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL), डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL), भारतीय खाद्य निगम (FCI) और सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (CWC) सहित विभिन्न सार्वजनिक उपक्रम और संबद्ध संस्थाएं भाग लेती हैं।

गति शक्ति विश्वविद्यालय ने कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CONCOR) के अधिकारियों के लिए विशेष प्रबंधन विकास कार्यक्रम, पोर्ट-आधारित विकास पर क्षमता निर्माण कार्यशाला तथा रक्षा बलों, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) और गुजरात इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (GIDB) सहित विभिन्न संगठनों के लिए लॉजिस्टिक्स विषयक कार्यकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन प्रबंधन और आधुनिक परिवहन प्रणालियों में नेतृत्व क्षमता, प्रबंधकीय कौशल और विषयगत विशेषज्ञता विकसित करना है।

रेल मंत्रालय ने कहा कि परिचालन आवश्यकताओं, तकनीकी प्रगति और संगठनात्मक प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की नियमित समीक्षा की जाती है। फील्ड इकाइयों, प्रशिक्षण संस्थानों और तकनीकी निदेशालयों के साथ निरंतर संवाद के आधार पर नई दक्षताओं की पहचान कर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अद्यतन और सुदृढ़ बनाया जाता है। साथ ही प्रशिक्षण मॉड्यूल के मानकीकरण और राष्ट्रीय कौशल विकास प्रयासों के अनुरूप कौशल विकास मंत्रालय के साथ भी समन्वय किया जा रहा है।

मंत्रालय के अनुसार डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, दक्षता आधारित प्रशिक्षण, उभरती तकनीकों का समावेश, प्रशिक्षण अवसंरचना का आधुनिकीकरण, प्रशिक्षकों की क्षमता वृद्धि तथा केंद्रीय, जोनल और मंडलीय प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से क्षमता निर्माण जैसे उपाय भविष्य की आवश्यकताओं, विशेषकर माल ढुलाई विस्तार, को ध्यान में रखते हुए लगातार किए जा रहे हैं।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story