रेल बजट 2026-27: अश्विनी वैष्णव ने पेश किया भारतीय रेलवे का कायाकल्प प्लान
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2.78 लाख करोड़ के बजट के साथ नई लाइनों, अमृत भारत स्टेशनों और सुरक्षा उपायों में 89% सुधार का ब्यौरा साझा किया।

महाराष्ट्र के लातूर स्थित मराठवाड़ा रेल कोच फैक्ट्री में शुरू हुआ 120 वंदे भारत ट्रेनसेटों का निर्माण कार्य।
भारतीय रेलवे में पूंजी निवेश के लिए सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) 2013-14 में ₹ 29,055 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹ 2.78 लाख करोड़ हो गई है। रिकॉर्ड बजट आवंटन और आधुनिकीकरण के प्रबल प्रयासों से यात्रियों का अनुभव बेहतर हो रहा है और ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। नए ट्रैक निर्माण, ट्रैक नवीनीकरण और आधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेशनों पर भारी खर्च से हमारी ट्रेन यात्रा सुरक्षित, आरामदायक और किफायती बन रही है। वंदे भारत ट्रेनें लगभग 100% सीटों के साथ पूरे देश में लोकप्रिय हो रही हैं। 1338 में से 208 अमृत भारत स्टेशनों पर आधुनिकीकरण का काम पूरा हो चुका है; 157 अमृत भारत स्टेशनों वाले आकांक्षी जिले सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देंगे।
स्टेशन पुनर्विकास और पीपीपी मॉडल की प्रगति
भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन के बाद, विजयवाड़ा पीपीपी मॉडल के तहत विकसित होने वाला भारत का दूसरा स्टेशन बनने के लिए तैयार है। इस मॉडल के तहत 14 और स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। मध्य प्रदेश का रानी कमलापति स्टेशन पीपीपी मॉडल के तहत विकसित और चालू किया जा चुका है। पीपीपी मॉडल के तहत पुनर्विकास के लिए चिन्हित 15 स्टेशनों में से विजयवाड़ा स्टेशन के पुनर्विकास के लिए निविदा आमंत्रित की जा चुकी है। अन्य 14 स्टेशन मास्टर प्लानिंग और वित्तीय मॉडलिंग के विभिन्न चरणों में हैं। 6,117 रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त वाई-फाई सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे यात्रियों का अनुभव बेहतर हो रहा है। भारतीय रेलवे के लगभग सभी रेलवे स्टेशनों पर दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा 4G/5G कवरेज उपलब्ध है। यात्री डेटा कनेक्टिविटी के लिए भी इन नेटवर्कों का उपयोग कर रहे हैं।
ट्रैक अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण और नवीनीकरण
सरकार ने बजट अनुमान 2026-27 में ₹ 2,78,030 करोड़ की सकल बजटीय सहायता प्रदान की है, जिसमें से ₹ 79,072 करोड़ नए ट्रैक के निर्माण के लिए आवंटित किए गए हैं। भारतीय रेलवे में ट्रैक अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, उन्नयन, आधुनिकीकरण और सुधार एक सतत और निरंतर प्रक्रिया है। पटरियों का उन्नयन और नवीनीकरण निर्धारित मानदंडों के अनुसार किया जाता है, जो उनकी आयु, यातायात, स्थिति आदि पर आधारित होते हैं। पटरियों के नवीनीकरण कार्यों की योजना और क्रियान्वयन पटरियों की स्थिति और अन्य विभिन्न कारकों को प्राथमिकता देते हुए किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पटरियां अनुमत गति से चलने के लिए सुरक्षित हैं। वर्ष 2014-26 (फरवरी 2026 तक) के दौरान जबलपुर से कटनी होते हुए दमोह मार्ग सहित पूरे रेलवे नेटवर्क में किए गए पटरियों के नवीनीकरण के तहत 157 स्टेशनों के नाम इस प्रकार हैं: आबू रोड, अनुग्रह नारायण रोड, अराकू, अररिया कोर्ट, बहराईच, बलांगीर, बलरामपुर, बालसिरिंग, बांका, बनमनखी, बानो, बड़ागामदा जंक्शन, बारां, बरौनी, बरगावां, बरहनी, बरकाकाना, बारसोई जंक्शन, बासुकीनाथ, बेगुसराय, भद्राचलम रोड, भानुप्रतापपुर, भवानीपटना, बियावरा राजगढ़, बोकारो स्टील सिटी, चाईबासा, चक्रधरपुर, चंदौली मझवार, चंद्रपुरा, छबड़ा गुगोर, चित्रकुट धाम कर्वी, चोपन, कडप्पा, दाहोद, डाल्टनगंज, दामनजोड़ी, दमोह, डांगोपोसी, ढेंकनाल, ढोली, धौलपुर, धुबरी, दुमका, फ़तेहपुर, फ़िरोज़पुर कैंट, गंगाघाट, गंजबासौदा, गढ़वा रोड, गढ़वा शहर, गौरीपुर, गया, घाटशिला, गिरिडीह, गोड्डा, गोविंदपुर रोड, गुना, गुनुपुर, गुरारू, हैदर नगर, हरिद्वार जंक्शन, हरिशंकर रोड, हरपालपुर, हटिया, हज़ारीबाग़ रोड, हिंडौन सिटी, जगदलपुर, जैसलमेर, जमुई, जनकपुर रोड, जपला, जेपोर, कांटाबांजी, करहागोला रोड, काशीपुर जंक्शन, कटिहार जंक्शन, केसिंगा, खगड़िया जंक्शन, खजुराहो जंक्शन, खंडवा, खरियार रोड, किच्छा, कोरापुट जंक्शन, कोरबा, लाभा, लखमीनिया, लातेहार, लिमखेड़ा, लोहरदगा, महासमुंद, महेशखूंट, मजबत, मानिकपुर जंक्शन, मनोहरपुर, मानसी जंक्शन, एमसीएस छतरपुर, मेरामंडली, मोगा, मोतीपुर, मुहम्मद गंज, मुनिगुडा, मुरी जंक्शन, मुजफ्फरपुर जंक्शन, नबीनगर रोड, नगर उंटारी, नमकोम, नंदुरबार, नवादा, ओर्गा, उस्मानाबाद, पहाड़पुर, पाकुड़, परमक्कुडी, पारसनाथ, पारलाखेमुंडी, पार्वतीपुरम, पाठशाला, पिंडवाड़ा, पिस्का, पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, रफीगंज, रायचूर जंक्शन, राजपलायम, राजमहल, राम दयालु नगर, रामनाथपुरम, रामदेवरा, रामेश्वरम, रामगढ़ कैंट, रांची जंक्शन, रायगढ़ा, रेनुकूट, रूड़की, रुठियाई, साहिबगंज, साहिबपुर कमाल, सलौना, सालमारी, श्री महावीरजी, सिद्धार्थ नगर, सिल्ली, सिमुलतला, सिंगरौली, सीतामढी, सोनभद्र, श्रीविल्लीपुत्तूर, टांगला, टाटानगर, टाटीसिलवाई, टिटलागढ़ जंक्शन, तुलसीपुर, उदलगुड़ी, विदिशा, विरुधुनगर, व्यासनगर, वडसा, वाशिम, यादगीर, श्रीरंगम, श्रीविल्लीपुत्तूर, सेंट थॉमस माउंट, सुल्लुरपेटा, सुरैमनपुर, स्वामीनारायण छपिया, तालचेर, तामलुक, टनकपुर, थालास्सेरी, थावे, तिरुवरूर जंक्शन, तिरुवन्नामलाई, त्रिपुनिथुरा, तुनि, उदगमंडलम, उझानी, उरकुरा, उतरन, वडकारा, वडाला रोड, विदिशा, विंध्याचल, वृद्धाचलम जंक्शन, वडकनचेरी, वारंगल।
प्रमुख स्टेशनों पर विकास कार्यों की भौतिक प्रगति
बोकारो स्टील सिटी स्टेशन पर भवन सुधार, प्लेटफॉर्म संख्या 1 निर्माण, नया प्रतीक्षा कक्ष, विश्राम कक्ष, पार्किंग, संपर्क मार्ग, प्रवेश/निकास द्वार, चारदीवारी और दिव्यांगजनों के लिए स्पर्शनीय मार्ग का कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि प्लेटफॉर्म संख्या 2/3 और एस्केलेटर का कार्य जारी है। वापी स्टेशन पर प्लेटफॉर्म शेल्टर विस्तार, एसी प्रतीक्षा कक्ष में शौचालय, पार्किंग और पुराने फुट ओवर ब्रिज को हटाने का कार्य पूर्ण हो चुका है; 12 मीटर फुट ओवर ब्रिज का कार्य शुरू है। तंजावुर जंक्शन पर पोर्टिको, कॉनकोर्स सुधार, बुकिंग कार्यालय और सर्कुलेटिंग एरिया का काम पूरा हो गया है। जलपाईगुड़ी स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर 1 विस्तार, शेल्टर और 12 मीटर फुट ओवर ब्रिज का कार्य संपन्न हुआ है। तिरुपति स्टेशन पर दक्षिण दिशा में नए प्रवेश द्वार और एयर कॉनकोर्स का ढांचा तैयार है। भुवनेश्वर स्टेशन पर पूर्व और पश्चिम दिशा में नए स्टेशन भवन और एयर कॉनकोर्स का ढांचा तैयार हो चुका है तथा एमईपी एवं एचवीएसी का कार्य प्रगति पर है।
हरित पहल और पर्यावरण संरक्षण
कार्यालयों, स्टेशनों और आवासीय कॉलोनियों में 100% एलईडी प्रकाश व्यवस्था लागू की गई है। भारतीय रेलवे स्टेशन संचालन में अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण और ऊर्जा दक्षता को उच्च प्राथमिकता देता है। रेलवे ट्रैक पर मल-मूत्र गिरने से रोकने के लिए सभी यात्री डिब्बों में जीरो डिस्चार्ज बायो-टॉयलेट लगाए गए हैं। 2004-2014 के बीच 9,587 बायो टॉयलेट थे, जो 2014 से फरवरी 2026 तक बढ़कर 3,66,250 हो गए हैं। सेंसर आधारित और टाइमर नियंत्रित प्रकाश व्यवस्था से 30%-70% प्लेटफॉर्म प्रकाश व्यवस्था स्वचालित की गई है।
स्वदेशी कोच निर्माण और औद्योगिक विस्तार
आधुनिक ट्रेनों की मांग हेतु लातूर, महाराष्ट्र में ₹ 685.79 करोड़ की लागत से मराठवाड़ा रेल कोच फैक्ट्री (एमआरसीएफ) स्थापित की गई है, जहाँ 120 वंदे भारत ट्रेनसेटों का निर्माण शुरू हुआ है। तेलंगाना के काजीपेट में ₹ 521.36 करोड़ की लागत से आधुनिक एमईएमयू विनिर्माण इकाई का कार्य उन्नत चरण में है। वर्तमान में बीईएमएल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां भी वंदे भारत स्लीपर और एलएचबी कोचों के निर्माण में सहयोग कर रही हैं।
सुरक्षा मानकों में रिकॉर्ड सुधार
श्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारतीय रेलवे में सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के परिणामस्वरूप, 2025-26 में होने वाली ट्रेन दुर्घटनाओं में 89% की गिरावट आई है और यह संख्या घटकर 16 रह गई है। 2014-15 में दुर्घटनाओं की संख्या 135 थी। परिणामी दुर्घटना सूचकांक 2014-15 के 0.11 से घटकर 2025-26 (फरवरी तक) में 0.01 रह गया है। 2004-05 से 2013-14 के बीच 1,711 दुर्घटनाओं में 904 मृत्यु हुई थीं, जबकि 2014-15 से 2023-24 के बीच 678 दुर्घटनाओं में 748 मृत्यु दर्ज की गई हैं। वर्ष 2025-26 (25 मार्च तक) में 15 दुर्घटनाओं में 16 मौतें हुईं।
गति शक्ति मल्टी-मोडल कार्गो टर्मिनल (जीसीटी)
128 गति शक्ति मल्टी-मोडल कार्गो टर्मिनलों के विकास के लिए लगभग ₹ 9183 करोड़ का निजी निवेश जुटाया गया है; 292 और जीसीटी के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। जोन-वार विवरण के अनुसार एससीआर में 14, डब्ल्यूआर में 14, ईसीआर में 12, एनआर में 12 और एसईसीआर में 12 टर्मिनल चालू किए गए हैं। इन टर्मिनलों की अनुमानित माल ढुलाई क्षमता 204 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) है।
संविदा श्रमिकों का कल्याण और अधिकार
भारतीय रेलवे आउटसोर्स किए गए श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करता है; श्रमिक कल्याण पोर्टल, जागरूकता शिविर और शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से कड़ी निगरानी द्वारा उनकी सुरक्षा को मजबूत किया जाता है। रेलवे यह सुनिश्चित करता है कि आउटसोर्स किए गए श्रमिकों को संविदा श्रम अधिनियम, 1970 और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के तहत अधिसूचित वेतन प्राप्त हो। श्रमिक कल्याण पोर्टल पर पंजीकरण और वैधानिक अनुपालनों का कड़ाई से पालन अनिवार्य किया गया है।
"यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में प्रश्नों के उत्तर में दी।"

Pratahkal Bureau
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