भारतीय रेल का 'अति-तेज़ परिवर्तन': ₹2.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड बजट से आम आदमी के सफर में आएगा आधुनिक बदलाव
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे के 'अति-तेज़ परिवर्तन', ₹2.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड आवंटन और कवच सुरक्षा प्रणाली के विस्तार पर विस्तृत जानकारी साझा की।

नई दिल्ली: तेज, सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक भारतीय रेल यात्रा अब मात्र एक विजन नहीं बल्कि आम आदमी और मध्यम वर्ग की वास्तविकता बनने जा रही है। संसद में रेल मंत्रालय की वर्ष 2026-27 के लिए अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि सरकार किफायती कीमत पर यात्रा अनुभव को बेहतर बनाकर सबसे गरीब तबके की सेवा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारतीय रेलवे अब "धीमी वृद्धि" के पुराने ढर्रे को त्यागकर "अति-तेज़ परिवर्तन" के एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। लगभग 1,37,000 किलोमीटर रेलवे ट्रैक और 25,500 से अधिक ट्रेनों के विशाल तंत्र के साथ भारतीय रेलवे देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और माल व यात्रियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने में रीढ़ की हड्डी साबित हो रही है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में लगभग ₹2.78 लाख करोड़ के ऐतिहासिक बजटीय आवंटन का उल्लेख करते हुए श्री वैष्णव ने स्पष्ट किया कि रेलवे बजट का आम बजट में विलय एक दूरदर्शी संरचनात्मक सुधार रहा है। इसके तीन प्रत्यक्ष लाभ हुए हैं: पहला, बजटीय सहायता जो कभी ₹25,000-30,000 करोड़ तक सीमित थी, वह अब बढ़कर ₹2.78 लाख करोड़ हो गई है; दूसरा, परियोजनाओं की स्वीकृति और नई तकनीक अपनाने के निर्णयों में पूरे वर्ष निरंतरता आई है; और तीसरा, वित्त मंत्रालय व नीति आयोग की संस्थागत निगरानी से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। वित्तीय विवरण देते हुए मंत्री ने बताया कि व्यय के मुख्य घटकों में कर्मचारियों पर ₹1.19 लाख करोड़, पेंशन पर ₹64,000 करोड़, ऊर्जा पर ₹32,000 करोड़ और वित्त पर ₹23,000 करोड़ खर्च होने के बावजूद रेलवे एक मामूली अधिशेष बनाए रखने में सफल रहा है। विशेष रूप से, व्यापक विद्युतीकरण के कारण डीजल खपत में कमी आई है, जिससे ₹6,000 करोड़ की बचत हुई है।
अवसंरचना के मोर्चे पर पिछले दशक में अभूतपूर्व विस्तार देखा गया है। माल ढुलाई 2013-14 के 1,055 मिलियन टन से बढ़कर 1,650 मिलियन टन पहुंच गई है, जिससे भारतीय रेलवे वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा मालवाहक बन गया है। ट्रैक निर्माण की गति 15,000 किमी से बढ़कर 35,000 किमी हो गई है और 99% नेटवर्क का विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है। सुरक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार करते हुए रेल दुर्घटनाओं में 90% की कमी दर्ज की गई है। स्वदेशी 'कवच' प्रणाली अब 3,000 किमी पर सक्रिय है और 20,000 किमी पर कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, रेलवे यात्रियों को प्रति वर्ष ₹60,000 करोड़ की सब्सिडी दे रहा है, जिससे प्रत्येक टिकट पर औसतन 45% की छूट मिलती है, जो पड़ोसी और विकसित देशों की तुलना में बेहद कम है। मुंबई के लिए 238 नई उपनगरीय ट्रेनों और 200 अंतर-शहरी ट्रेनों के साथ छोटी दूरी की यात्रा को सुगम बनाया जा रहा है।
भविष्य की योजनाओं के तहत 160 वंदे भारत और 60 अमृत भारत ट्रेनें पहले से ही संचालित हैं, जबकि 133 नई अमृत भारत ट्रेनों का निर्माण जारी है। उत्तर-पूर्व और जम्मू-कश्मीर जैसे दुर्गम क्षेत्रों में 486 किलोमीटर अतिरिक्त सुरंगों का निर्माण कर कनेक्टिविटी को नया आयाम दिया गया है। यह आधुनिकीकरण न केवल यात्रा सुगम बना रहा है बल्कि रोजगार के बड़े अवसर भी पैदा कर रहा है; पिछले 10 वर्षों में 5 लाख और पिछले 2 वर्षों में 1.43 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों के साथ लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। अंत में, अश्विनी वैष्णव ने लोको पायलटों और ट्रैक मेंटेनर्स सहित 12.5 लाख रेल कर्मचारियों के समर्पण के प्रति आभार व्यक्त किया। रेलवे का यह कायाकल्प निरंतर निवेश और नीतिगत स्पष्टता का परिणाम है, जो भारत की विकास यात्रा को गति प्रदान कर रहा है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
