मुंबई: रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) मध्य रेल न केवल चौबीसों घंटे रेलवे संपत्तियों की सुरक्षा में मुस्तैद रहता है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की रक्षा करते हुए बहुआयामी भूमिकाएं भी निभा रहा है। मध्य रेल के आरपीएफ कर्मियों ने 1 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक की अवधि के दौरान यात्री सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने में असाधारण समर्पण और सतर्कता का परिचय दिया है। अपने प्रमुख अभियानों के तहत निरंतर प्रयासों के माध्यम से आरपीएफ जवानों ने न सिर्फ लोगों की कीमती जान बचाई, बल्कि संकटग्रस्त बच्चों और वयस्कों को रेस्क्यू कर यात्रियों का खोया हुआ सामान भी उनके सही मालिकों तक पहुंचाया। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुंबई से जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 2026/05/ के अनुसार, बल ने सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

इस मानवीय मिशन के तहत 'ऑपरेशन नन्हें फरिश्ते' के जरिए रेलवे परिसरों में मिलने वाले घर से भागे हुए, लापता या बेसहारा बच्चों की सुरक्षा और उन्हें बचाने का सिलसिला लगातार जारी रहा। जनवरी से अप्रैल 2026 तक मध्य रेल आरपीएफ ने कुल 499 बच्चों को रेस्क्यू किया, जिसमें 331 लड़के और 168 लड़कियाँ शामिल हैं। इन सभी को उनके परिवारों से मिलाया गया या बाल कल्याण समितियों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को सौंप दिया गया। मंडलवार आंकड़ों के अनुसार भुसावल मंडल से सर्वाधिक 159 बच्चे बचाए गए, जिनमें 80 लड़के और 79 लड़कियाँ शामिल हैं। पुणे मंडल से 102 लड़कों और 19 लड़कियों समेत कुल 121 बच्चों को, मुंबई मंडल से 73 लड़कों और 40 लड़कियों सहित कुल 113 बच्चों को, नागपुर मंडल से 68 लड़कों और 25 लड़कियों के साथ कुल 93 बच्चों को तथा सोलापूर मंडल से 8 लड़कों और 5 लड़कियों समेत कुल 13 बच्चों को रेस्क्यू कर नया जीवन दिया गया, जो आरपीएफ की बाल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इसी तरह संकटग्रस्त और असहाय वयस्कों की देखभाल और सुरक्षा के लिए आरपीएफ ने 'ऑपरेशन डिग्निटी' के तहत अपनी मानवीय पहलों को विस्तार दिया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य रेलवे परिसरों में संकट में फंसे पुरुषों और महिलाओं की पहचान कर उन्हें समय पर सहायता और पुनर्वास प्रदान करना है। इस चार महीने की अवधि में आरपीएफ ने कुल 85 व्यक्तियों को रेस्क्यू किया, जिसमें 38 पुरुष और 47 महिलाएँ शामिल हैं। इन मामलों के विस्तृत विश्लेषण के अनुसार, घर से भागे हुए लोगों में 23 पुरुष और 23 महिलाएँ (कुल 46), पीछे छूट गए लोगों में 5 पुरुष और 8 महिलाएँ (कुल 13), लापता लोगों में 6 पुरुष और 9 महिलाएँ (कुल 15), चिकित्सीय सहायता पाने वालों में 1 पुरुष और 2 महिलाएँ (कुल 3) तथा मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों में 3 पुरुष और 5 महिलाएँ (कुल 8) शामिल थीं, जिन्हें सुरक्षा घेरे में लेकर त्वरित सहायता पहुंचाई गई।

चलती ट्रेनों में चढ़ने या उतरने के प्रयास में फिसलने वाले यात्रियों के लिए आरपीएफ स्टाफ 'ऑपरेशन जीवन रक्षा' के तहत साक्षात देवदूत साबित हुआ। आरपीएफ स्टाफ ने अपनी असाधारण सतर्कता और साहस का परिचय देते हुए इस अवधि में मध्य रेल के विभिन्न स्टेशनों पर कुल 25 यात्रियों की कीमती जान बचाई, जिसमें 20 पुरुष और 5 महिला यात्री शामिल हैं। इस जांबाजी में भुसावल मंडल में सर्वाधिक 11 जानें (10 पुरुष, 1 महिला) बचाई गईं। इसके बाद मुंबई मंडल में 6 जानें (5 पुरुष, 1 महिला), पुणे मंडल में 4 जानें (2 पुरुष, 2 महिला), सोलापूर मंडल में 2 पुरुष यात्रियों की जान और नागपुर मंडल में 2 जानें (1 पुरुष, 1 महिला) आरपीएफ कर्मियों की मुस्तैदी के कारण सुरक्षित बच सकीं। इन जवानों की त्वरित कार्रवाई ने कई मौकों पर बड़ी अप्रिय घटनाओं को होने से रोक दिया।

आरपीएफ केवल एक सुरक्षा बल नहीं है, बल्कि भारतीय रेल का एक संवेदनशील और करुणामयी चेहरा भी है। अपनी पेशेवर टीम के साथ अखंडता, सतर्कता और जनसेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए मध्य रेल ने अब यात्रियों से विशेष अपील की है। मध्य रेल प्रशासन ने यात्रियों से चलती ट्रेनों में चढ़ने या उतरने से बचने, अपने सामान का ध्यान रखने और रेलवे परिसर में किसी भी लापता, बेसहारा, मानसिक रूप से अस्वस्थ या संकटग्रस्त बच्चे या वयस्क को देखने पर तुरंत आरपीएफ, ऑन-ड्यूटी रेल कर्मियों को सूचित करने या हेल्पलाइन नंबर 139 पर डायल करने का आग्रह किया है।




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Pratahkal Newsroom

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