चालीसगांव में ₹263.86 करोड़ की रेल-ओवर-रेल फ्लाईओवर परियोजना मंजूर
मध्य रेल के अंतर्गत इस फ्लाईओवर से धुले और भुसावल-मनमाड खंड पर ट्रेनों की देरी कम होगी और 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से परिचालन संभव होगा।

भारतीय रेलवे ने महाराष्ट्र के बुनियादी ढांचे को सशक्त करने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम उठाते हुए मध्य रेल के अंतर्गत चालीसगांव रेल-ओवर-रेल (आरओआर) फ्लाईओवर परियोजना को आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। लगभग ₹263.86 करोड़ की अनुमानित लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना नेटवर्क के एक अत्यंत महत्वपूर्ण खंड में परिचालन क्षमता को सुव्यवस्थित करने और क्षमता विस्तार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। यह परियोजना विशेष रूप से महाराष्ट्र के जलगांव जिले के चालीसगांव क्षेत्र में व्याप्त उन जटिल परिचालन चुनौतियों का समाधान करेगी, जो लंबे समय से रेल यातायात के सुचारू प्रवाह में बाधा बनी हुई थीं।
वर्तमान में इस खंड की भौगोलिक और तकनीकी स्थिति ऐसी है कि तीन लाइनों पर कई क्रॉसिंग होने के कारण ट्रेनों की आवाजाही में भारी भीड़भाड़ और ट्रैफिक की समस्या बनी रहती है। विशेष रूप से धुले की ओर से आने वाली ट्रेनें जब मुख्य लाइनों को काटती हैं, तो परिचालन में अत्यधिक जटिलता उत्पन्न होती है। आगामी चौथी लाइन के विकास के साथ इन क्रॉसिंग से होने वाली देरी और बाधाओं में और भी वृद्धि होने की आशंका थी, जिसे देखते हुए इस फ्लाईओवर का निर्माण अपरिहार्य हो गया था। यह फ्लाईओवर ट्रेनों की आवाजाही को विभिन्न स्तरों पर पृथक कर देगा, जिससे क्रॉसिंग की समस्या समाप्त होगी और निर्बाध परिचालन सुनिश्चित हो सकेगा।
इस रेल खंड की वर्तमान लाइन क्षमता 45.4% है, लेकिन निर्माणाधीन विभिन्न परियोजनाओं के पूर्ण होने के साथ ही 2029-30 तक इसके बढ़कर 107.96% होने का अनुमान है। इस संभावित दबाव को देखते हुए यह फ्लाईओवर भविष्य की रेल मांग को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। इस परियोजना के क्रियान्वयन से चालीसगांव और जामदा के बीच के खंड पर भी दबाव काफी कम होगा, जहां वर्तमान में लंबे ब्लॉक खंडों के कारण शाखा लाइन और भुसावल-मनमाड यातायात दोनों ही बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे। इन खंडों के तकनीकी पुनर्गठन से ट्रेनों की समय की पाबंदी (पंक्चुअलिटी) में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे अप दिशा में लगभग 15 मिनट और डाउन दिशा में लगभग 20 मिनट की बहुमूल्य समय बचत होगी। इसका सीधा सकारात्मक लाभ यात्री और माल परिवहन दोनों को प्राप्त होगा।
तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो इस परियोजना की कुल ट्रैक लंबाई 11.01 किमी निर्धारित की गई है, जिसका व्यापक सर्वेक्षण कोंकण रेलवे निगम लिमिटेड (केआरसीएल) द्वारा किया गया है। निर्माण कार्य के अंतर्गत दो आधुनिक स्टेशन भवन, एक मुख्य (मेजर) पुल, 16 छोटे (माइनर) पुल, एक अंडरब्रिज (आरयूबी) और पांच सीमित ऊंचाई वाले सबवे (एलएचएस) का निर्माण किया जाना सुनिश्चित हुआ है। अलाइनमेंट को 1:200 के रूलिंग ग्रेडिएंट के साथ डिजाइन किया गया है, जो 130 किमी प्रति घंटे की अधिकतम अनुमेय गति का समर्थन करने में सक्षम होगा। रेलवे का अनुमान है कि इस परियोजना के पूर्ण होने से प्रति वर्ष लगभग 0.6 मिलियन टन (एमटीपीए) अतिरिक्त माल यातायात का सृजन होगा।
यह अवसंरचनात्मक विकास न केवल रेलवे की दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र के चीनी उद्योग, सीमेंट उद्योग और विभिन्न औद्योगिक समूहों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान कर क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगा। साथ ही, इससे पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी सुगम होगी। भारतीय रेलवे की यह पहल व्यस्त मार्गों को सुगम बनाने, अपनी बुनियादी सुविधाओं को अनुकूलित करने और राष्ट्र को एक तेज एवं अधिक विश्वसनीय परिवहन तंत्र प्रदान करने के संकल्प को चरितार्थ करती है।

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