मध्य रेल ने स्क्रैप बिक्री से कमाया रिकॉर्ड 73.67 करोड़ का राजस्व
'मिशन-जीरो स्क्रैप स्टेटस' के तहत अप्रैल और मई 2026 में मध्य रेल के पांचों मंडलों और कारखानों ने कबाड़ के व्यवस्थित निपटान से ऐतिहासिक वित्तीय कीर्तिमान बनाया।

मध्य रेल स्टोर्स विभाग द्वारा मुंबई, पुणे और नागपुर सहित सभी पांच मंडलों में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान पर्यावरण अनुकूल तरीके से कबाड़ का निपटान किया गया।
मध्य रेल ने अपने सभी पांच मंडलों और कारखानों में "मिशन-जीरो स्क्रैप स्टेटस" लागू कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अग्रणी भूमिका निभाई है, जिसका मुख्य उद्देश्य रेलवे स्क्रैप को मूल्यवान राजस्व-सृजन करने वाली संपत्तियों में परिवर्तित करना और संसाधनों का अत्यधिक कुशल उपयोग सुनिश्चित करना है। यह पूरी कवायद 5 जून 2026 को मनाए जाने वाले विश्व पर्यावरण दिवस के पूर्वार्ध में हजारों रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की सक्रिय भागीदारी के साथ चलाए गए एक व्यापक व सफल पर्यावरण अभियान के हिस्से के रूप में सामने आई है। इस रणनीतिक प्रयास के चलते अप्रैल से मई 2026 की अत्यंत संक्षिप्त अवधि के भीतर ही मध्य रेल ने स्क्रैप की रिकॉर्ड बिक्री को अंजाम देकर कुल 73.67 करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व सफलतापूर्व अर्जित कर लिया है, जो अब तक के इतिहास में अप्रैल-मई महीनों के दौरान दर्ज की गई सबसे अधिक स्क्रैप बिक्री के रूप में एक ऐतिहासिक वित्तीय कीर्तिमान है।
वित्तीय आंकड़ों के आधिकारिक विश्लेषण के अनुसार, इस कुल संचित राजस्व में अकेले अप्रैल 2026 के दौरान 34.08 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि मई 2026 के महीने में यह ग्राफ और अधिक बढ़कर 39.59 करोड़ रुपये के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। यह अभूतपूर्व और महत्वपूर्ण उपलब्धि विभिन्न श्रेणियों के स्क्रैप और अपशिष्ट पदार्थों के अत्यंत व्यवस्थित व वैज्ञानिक निपटान के माध्यम से संभव हो सकी है, जिसके अंतर्गत कुल 5926 मीट्रिक टन रेलवे स्थायी-मार्ग स्क्रैप, 6337 मीट्रिक टन लौह स्क्रैप, 539 मीट्रिक टन अलौह स्क्रैप, तथा कुल 26,882 नग स्लीपरस का पूरी तरह से निस्तारण किया गया। इसके अतिरिक्त, रेलवे के निष्प्रयोज्य हो चुके रोलिंग स्टॉक खंड से 3 लोकोमोटिव, 8 यात्री कोच और 29 मालगाड़ी वैगनों को भी इस पूरी प्रक्रिया के तहत सफलतापूर्वक निपटाया गया है।
इस पूरे महाभियान की सफलता के पीछे मध्य रेल स्टोर्स विभाग की वह सुव्यवस्थित और गहन मुहिम रही है, जिसके तहत दूरस्थ और बिखरे हुए दुर्गम स्थानों के साथ-साथ मध्य रेल के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी पांचों रेल मंडलों में लावारिस पड़े स्क्रैप पदार्थों की बारीक पहचान की गई और फिर उनके त्वरित निपटान की व्यवस्था की गई। इन लक्षित और निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप ही बिक्री प्रदर्शन में यह उल्लेखनीय और चौंकाने वाली वृद्धि दर्ज की गई है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से मई 2026 की इस अवधि में मंडलों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पुणे मंडल ने पूरे जोन में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए अकेले 15.65 करोड़ रुपये की उच्चतम स्क्रैप बिक्री दर्ज की है। इस सूची में पुणे के बाद नागपुर मंडल 11.77 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि परेल कारखाना ने 11.05 करोड़ रुपये, भुसावल मंडल ने 8.72 करोड़ रुपये, माटुंगा कारखाना ने 7.38 करोड़ रुपये, मुंबई मंडल ने 7.33 करोड़ रुपये, सोलापुर मंडल ने 4.59 करोड़ रुपये और अन्य संबंधित उत्पादन इकाइयों ने अपने आनुपातिक योगदान के साथ क्रमशः इसके बाद का स्थान हासिल किया।
अपनी इस कचरे से कंचन बनाने की मुहिम के बीच मध्य रेल ने उन विशिष्ट आंतरिक संसाधनों के अधिकतम और विवेकपूर्ण उपयोग पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया है जो वर्तमान में सक्रिय परिचालन उपयोग में तो नहीं थे, लेकिन पूरी तरह से उपयोग योग्य और चालू स्थिति में उपलब्ध थे। इसी दूरगामी सोच के तहत, एक बेहद कीमती रोटेटेक प्रिंटिंग मशीन को जो कि पूरी तरह चालू स्थिति में थी मगर उपयोग में नहीं आ रही थी, उसे वित्तीय नुकसान के साथ महज स्क्रैप के रूप में कबाड़ में चिह्नित करने के बजाय एक बेहद समझदारी भरे निर्णय के तहत 8.76 करोड़ रुपये के भारी-भरकम मूल्यांकन मूल्य पर नासिक प्रिंटिंग प्रेस को सफलतापूर्वक स्थानांतरित कर दिया गया। मध्य रेल प्रशासन की यह अनूठी पहल सीधे तौर पर न्यूनतम बर्बादी, कुशल संसाधन उपयोग और वित्तीय समझदारी के माध्यम से किसी भी परिसंपत्ति से अधिकतम मूल्य प्राप्त करने की उसकी दृढ़ प्रशासनिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। अंतिम रूप से, ये तमाम शानदार वित्तीय और भौतिक उपलब्धियां मध्य रेल के 'जीरो स्क्रैप मिशन' के राष्ट्रीय लक्ष्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के साथ-साथ भारतीय रेलवे में वित्तीय विवेक, परिचालन दक्षता तथा दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता को एक साथ बढ़ावा देने के उसके निरंतर संकल्प और अटूट इच्छाशक्ति को मजबूती से प्रमाणित करती हैं।

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