मध्य रेलवे ने कवच 4.0 का सुरक्षा निरीक्षण किया पूरा, 337.46 रूट किलोमीटर तक मिली सफलता
मध्य रेलवे ने पुणे मंडल के अहिल्यानगर–येवला रेलखंड में कवच 4.0 का स्वतंत्र सुरक्षा निरीक्षण पूरा किया। इटली की ISA टीम ने 133.89 रूट किलोमीटर में सुरक्षा सुविधाओं की जांच की। अब तक तीन रेलखंडों में कुल 337.46 रूट किलोमीटर का निरीक्षण पूरा हो चुका है।

मध्य रेलवे ने रेल परिचालन की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पुणे मंडल के 133.89 रूट किलोमीटर लंबे अहिल्यानगर–येवला रेलखंड में स्वदेशी ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली कवच 4.0 का स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन (ISA) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह निरीक्षण 24 और 25 अक्टूबर 2026 को किया गया। इसके साथ ही मध्य रेलवे के विभिन्न मंडलों में कवच प्रणाली का स्वतंत्र सुरक्षा निरीक्षण कुल 337.46 रूट किलोमीटर पर पूरा हो चुका है।
कवच 4.0 सुरक्षा अखंडता स्तर-4 (SIL-4) वाली स्वदेशी ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली (TCAS) है। इसे रेल परिचालन की सुरक्षा बढ़ाने के लिए विकसित किया गया है। यह प्रणाली सिग्नल को खतरे की स्थिति में पार करने (SPAD) से रोकने, निर्धारित सीमा से अधिक गति को नियंत्रित करने और आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित ब्रेक लगाने के लिए तैयार की गई है। इसका उद्देश्य ट्रेन टक्करों के जोखिम को काफी कम करना तथा रेल परिचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाना है।
अहिल्यानगर–येवला रेलखंड की लंबाई 133.89 रूट किलोमीटर है। इस खंड में 12 रेलवे स्टेशन हैं, जहां 12 स्टेशन टीसीएएस इकाइयां स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त, यहां 4 लेवल क्रॉसिंग टीसीएएस इकाइयां, 1 रिमोट इंटरफेस यूनिट (RIU), 20 रेडियो टावर और 1,774 रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग लगाए गए हैं।
स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन इटली की ISA टीम ने किया। इस दौरान कवच प्रणाली की महत्वपूर्ण सुरक्षा सुविधाओं का व्यापक परीक्षण और सत्यापन किया गया। इसमें निर्धारित सीमा से अधिक गति पर सुरक्षा, स्थायी गति प्रतिबंध (PSR) की निगरानी, लेवल क्रॉसिंग पर स्वचालित सीटी बजाने की व्यवस्था, टर्नआउट पर गति की निगरानी और सिग्नल को खतरे की स्थिति में पार करने से रोकने की क्षमता शामिल रही।
निरीक्षण के दौरान ट्रेन में लगे कवच सिस्टम और स्टेशन मास्टर ऑपरेशन कम इंडिकेशन पैनल (SMOCIP) से SOS अलर्ट जारी होने की व्यवस्था भी जांची गई। इसके साथ ही ट्रेन के पीछे की ओर अनियंत्रित खिसकने (रोलबैक), बिना नियंत्रण आगे बढ़ने (रोल-अवे) और विपरीत दिशा में गति को रोकने की क्षमता का सत्यापन किया गया। मूल्यांकन में गायब RFID टैग की पहचान करने और टैग के बीच की दूरी मापने की प्रक्रिया भी शामिल थी।
ISA टीम ने ट्रेन की गति की अनुमति (मूवमेंट अथॉरिटी) और सिग्नल की स्थितियों, ट्रेन में लगे उपकरणों तथा पटरी किनारे स्थापित उपकरणों के बीच संचार, रेडियो कनेक्टिविटी, RFID टैग का पता लगाने और उनकी लोकेशन की सटीकता की भी जांच की। इसके अतिरिक्त, ब्रेक लगाने की स्वचालित कार्रवाई, गति की निगरानी, सिस्टम में खराबी आने पर उसकी कार्यप्रणाली और सुरक्षित स्थिति में प्रतिक्रिया देने की क्षमता का परीक्षण किया गया।
मूल्यांकन में पूरी प्रणाली के शुरू से अंत तक के कार्यात्मक प्रदर्शन की जांच के साथ-साथ PCCL और कवच से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन भी किया गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य कवच 4.0 की सुरक्षा सुविधाओं और परिचालन संबंधी प्रदर्शन का व्यापक आकलन करना था।
मध्य रेलवे अब तक अपने विभिन्न मंडलों में कुल 337.46 रूट किलोमीटर पर कवच प्रणाली का स्वतंत्र सुरक्षा निरीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है। इसमें नागपुर मंडल के आमला–छिंदवाड़ा रेलखंड के 104.19 रूट किलोमीटर, सोलापुर मंडल के दौंड–कुर्डुवाड़ी रेलखंड के 99.38 रूट किलोमीटर और पुणे मंडल के अहिल्यानगर–येवला रेलखंड के 133.89 रूट किलोमीटर शामिल हैं।
कवच 4.0 का यह निरीक्षण स्वदेशी तकनीक के माध्यम से रेलवे सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मध्य रेलवे ने अपने नेटवर्क में कवच 4.0 को शीघ्र लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई है, ताकि रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।
यह प्रेस विज्ञप्ति मध्य रेलवे, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला द्वारा 29 अक्टूबर 2026 को जारी की गई। प्रेस विज्ञप्ति संख्या 2026/10/53 है।

