भारतीय रेलवे की रीढ़ कहे जाने वाले मध्य रेल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान माल ढुलाई के क्षेत्र में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। अपनी कुशल कार्यप्रणाली और व्यापारिक सुधारों के दम पर मध्य रेल ने इस वर्ष कुल 79.34 मिलियन टन माल की ढुलाई की, जिससे रेलवे के खजाने में 8279 करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व जमा हुआ है।

नागपुर डिवीजन का शानदार प्रदर्शन

इस शानदार प्रदर्शन में नागपुर डिवीजन सबसे बड़े हीरो के रूप में उभरा है, जिसने अकेले ही कुल माल ढुलाई में 54 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी दर्ज की है। नागपुर डिवीजन ने इस साल 42.72 मिलियन टन माल लोड कर 4597 करोड़ रुपये की कमाई की, जो मध्य रेल की कुल आय का आधे से भी अधिक हिस्सा है।

माल ढुलाई के प्रमुख स्रोत और राजस्व

माल ढुलाई की सूची में कोयला अभी भी सबसे शीर्ष पर बना हुआ है, जिससे रेलवे को 3219 करोड़ रुपये की आय हुई। हालांकि, इस साल सबसे चौंकाने वाली वृद्धि लौह अयस्क और पेट्रोलियम उत्पादों में देखी गई है। लौह अयस्क की लोडिंग में पिछले साल के मुकाबले 177 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों के लिए रिकॉर्ड 2672 रैक लोड किए गए।

कृषि और आम जनता को लाभ

रेलवे ने न केवल औद्योगिक वस्तुओं बल्कि आम जनता से जुड़ी चीजों जैसे प्याज और खाद्यान्न के परिवहन में भी बड़ी भूमिका निभाई। प्याज की लोडिंग में 133 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे किसानों को अपनी फसल दूर-दराज के बाजारों तक पहुँचाने में मदद मिली और बाजार में कीमतें स्थिर रहीं।

भविष्य की ओर बढ़ते कदम

नए कार्गो टर्मिनल और 'लॉन्ग हॉल' ट्रेनों की संख्या दोगुनी करने जैसे कदमों ने मध्य रेल को देश की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण इंजन बना दिया है।

Pratahkal Bureau

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