सुरक्षित रेल परिचालन पर मध्य रेल का बड़ा मंथन; 300 रनिंग स्टाफ ने लिया भाग
मुंबई मंडल में मध्य रेल ने सुरक्षित रेल परिचालन पर केंद्रित एक संरक्षा संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें 300 से अधिक रनिंग स्टाफ और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। संगोष्ठी में "मिशन जीरो एसपीएडी" पर जोर देते हुए दुर्घटनाओं की रोकथाम और संरक्षित ट्रेन संचालन के महत्व पर चर्चा की गई।

मध्य रेल के मुंबई मंडल ने रेल संरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई में संरक्षा संगोष्ठी का आयोजन किया। तीन अक्टूबर को आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य "सिग्नल पासिंग एट डेंजर (एसपीएडी)" की रोकथाम और सुरक्षित रेल परिचालन को लेकर जागरूकता तथा ठोस रणनीति पर विचार-विमर्श करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ ट्रैक्शन रोलिंग स्टॉक परिचालन विभाग की पहल पर हुआ, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों और रनिंग स्टाफ की बड़ी संख्या ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रधान मुख्य विद्युत इंजीनियर (पीसीईई) श्री अनूप कुमार अग्रवाल, प्रधान मुख्य संरक्षा अधिकारी (पीसीएसओ) चंद्र किशोर प्रसाद और मुंबई मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) हिरेश मीना विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यालय और मंडल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगभग 300 रनिंग स्टाफ और मंडल मुख्य लोको निरीक्षक भी संगोष्ठी में शामिल हुए।
संगोष्ठी के दौरान चर्चा का केंद्र बिंदु रहा—खतरनाक परिस्थितियों में सिग्नल पासिंग को रोकने के उपाय, दुर्घटनाओं और असामान्य घटनाओं में रनिंग स्टाफ की भूमिका, तथा संरक्षित ट्रेन परिचालन की आवश्यकता। उपस्थित अधिकारियों ने अपने विचार साझा करते हुए कर्मचारियों को अनुशासन, सतर्कता और तकनीकी नवाचारों के महत्व से अवगत कराया।
प्रधान मुख्य विद्युत इंजीनियर श्री अनूप कुमार अग्रवाल ने संबोधन में सुरक्षित ट्रेन परिचालन को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने पेशेवर और व्यक्तिगत अनुशासन, सिग्नल लोकेशन अनाउंसमेंट सिस्टम (एसआईएलएएस), फॉग सेफ डिवाइस (एफएसडी) और चालक दल की सुविधाओं पर विशेष जोर दिया। प्रधान मुख्य संरक्षा अधिकारी चंद्र किशोर प्रसाद ने सिग्नल पास करते समय "फिंगर पॉइंटिंग" और "कॉलिंग" तकनीक की अहमियत को रेखांकित किया।
मंडल रेल प्रबंधक हिरेश मीना ने रनिंग स्टाफ की प्रतिबद्धता पर गर्व व्यक्त करते हुए “मिशन जीरो एसपीएडी” पर बल दिया। मुख्य विद्युत इंजीनियर (ओपी) संजय सिंह ने एसपीएडी की रोकथाम हेतु आरएस फ्लैप वाल्व के संचालन और सिग्नल की स्थिति के अनुसार गति बनाए रखने जैसे तकनीकी उपायों को विस्तार से समझाया। अपर मंडल रेल प्रबंधक (संचालन/संरक्षा) एम. एल. विश्नोई ने ड्यूटी से पूर्व पर्याप्त आराम के महत्व पर प्रकाश डाला और एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र का संचालन किया।
संगोष्ठी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी शामिल किया गया। कनिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी सतीश अंबोरे ने मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य से एसपीएडी पर चर्चा की और वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही संरक्षा प्रथाओं की जानकारी दी। इससे प्रतिभागियों को न केवल व्यवहारिक बल्कि मानसिक रूप से भी सजग रहने की प्रेरणा मिली।
कार्यक्रम का समापन मंडल विद्युत इंजीनियर (टीआरओ) शिखर श्रीवास्तव के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने संगोष्ठी के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी अधिकारियों और रनिंग स्टाफ का आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन केवल एक संगोष्ठी भर नहीं था, बल्कि मध्य रेल की उस निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक था, जिसके केंद्र में सुरक्षित और संरक्षित रेल परिचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। यह पहल न केवल दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि रेलवे संचालन के मानकों को भी और अधिक ऊँचाई प्रदान करेगी।
इसी कड़ी में मध्य रेल अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए "स्वच्छता पखवाड़ा-2025" और "विशेष अभियान 5.0" के तहत स्वच्छता गतिविधियों का भी संचालन कर रहा है। दो अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में ई-कचरे के व्यवस्थित निपटान, कार्यस्थल सौंदर्यीकरण, हरित प्रथाओं और डिजिटलीकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। स्टेशन परिसर और कार्यालयों में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने, अनावश्यक सामग्रियों के निपटान से राजस्व बढ़ाने और स्वच्छ पर्यावरण का संदेश फैलाने पर जोर दिया जा रहा है।
इस प्रकार, एक ओर जहां मध्य रेल सुरक्षित रेल परिचालन के लिए तकनीकी और मानव संसाधन दोनों स्तरों पर ठोस कदम उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक सरोकारों को भी अपने मिशन का अभिन्न हिस्सा बना रहा है। यह संगोष्ठी और स्वच्छता अभियान मिलकर इस बात को रेखांकित करते हैं कि मध्य रेल केवल यात्रियों की यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी पूरी गंभीरता से निभा रहा है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
