चलती ट्रेन में बर्थ पर जलाया दीया, सेंट्रल रेलवे ने यात्री पर की सख्त कार्रवाई
चलती हजरत निजामुद्दीन-मायसूर एक्सप्रेस में यात्री ने आरक्षित बर्थ पर दीया जलाकर पूजा की। भुसावल में यात्री को उतारकर रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई, जानिए पूरे मामले में क्या हुआ।

सेंट्रल रेलवे ने चलती ट्रेन में आरक्षित बर्थ पर दीया जलाकर पूजा करने वाले एक यात्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। खुले में जल रहे दीये से आग लगने और यात्रियों तथा रेलवे संपत्ति की सुरक्षा को खतरा पैदा होने की आशंका के चलते यात्री को भुसावल रेलवे स्टेशन पर उतार दिया गया।
घटना 31 अगस्त 2026 की है। कमर्शियल कंट्रोल, भुसावल से ट्रेन संख्या 12782 (हजरत निजामुद्दीन-मायसूर एक्सप्रेस) में एक यात्री द्वारा ए-1 कोच की बर्थ नंबर 17 पर दीया जलाकर पूजा करने की सूचना प्राप्त हुई थी।
मामले की जानकारी ड्यूटी पर तैनात टिकट चेकिंग स्टाफ श्री रमन कुमार शर्मा, खंडवा ने दी। इसके बाद यात्री को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए भुसावल रेलवे स्टेशन पर उतारा गया। पूछताछ में यात्री की पहचान गरिबा, उम्र 55 वर्ष, निवासी ग्वालियर, मध्य प्रदेश के रूप में हुई। यात्री ने बताया कि उसने शाम की प्रार्थना के दौरान अपनी आरक्षित बर्थ पर दीया जलाया था।
ड्यूटी पर मौजूद टीटीई ने यात्री को दीया बुझाने की सलाह दी और समझाया कि खुले में जलती लौ आग का कारण बन सकती है तथा यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे की संपत्ति को खतरे में डाल सकती है। हालांकि, यात्री ने दीया तुरंत बुझाने से इनकार करते हुए कहा कि वह अपनी प्रार्थना पूरी होने के बाद ही उसे बुझाएगा। टीटीई ने इस घटना की अपने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्डिंग भी की।
जांच के दौरान यात्री के पास से एक माचिस की डिब्बी, पीतल का दीया और स्टील का कंटेनर भी बरामद किया गया।
इस मामले में 1 सितंबर 2026 को रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 153 और 145(बी) के तहत आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई। रेलवे के अनुसार, यात्री का यह कृत्य यात्रियों और रेलवे संपत्ति की सुरक्षा के लिए संभावित खतरा पैदा करने वाला था। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 35(सी) के तहत नोटिस पर रिहा कर दिया गया।
सेंट्रल रेलवे ने सभी यात्रियों से अपील की है कि वे ट्रेनों के भीतर कोई भी ज्वलनशील वस्तु न ले जाएं और दीया, मोमबत्ती या अगरबत्ती न जलाएं। रेलवे ने कहा कि इस तरह की गतिविधि आग का कारण बन सकती है और हजारों यात्रियों की जान को खतरे में डाल सकती है।
रेलवे अधिनियम के तहत धारा 145(बी) में रेलवे परिसर से हटाने, पास या टिकट जब्त करने और 1,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। चेतावनी के बावजूद अपराध जारी रखने पर छह महीने तक की कैद या 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। वहीं, धारा 153 के तहत पांच वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
सेंट्रल रेलवे की यह कार्रवाई चलती ट्रेन में खुले में आग जलाने से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर रेलवे की सख्ती को सामने लाती है। प्रेस विज्ञप्ति 1 सितंबर 2026 को सेंट्रल रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई स्थित मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला द्वारा जारी की गई। इसका प्रेस रिलीज नंबर PR No. 2026/09/02 है।

Pratahkal Newsroom
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