कोंकण रेलवे के सीएमडी बने कवि, लॉन्च की किताब ‘स्याही का सिपाही’
शब्दों और नेतृत्व का उत्सव: कोंकण रेलवे के सीएमडी संतोष कुमार झा का नया कविता संग्रह "स्याही का सिपाही" विमोचित

हिंदी दिवस 2025 के अवसर पर साहित्य और प्रशासन का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। गुजरात के गांधीनगर में आयोजित पंचम अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KRCL) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संतोष कुमार झा की चौथी कविता संग्रह 'स्याही का सिपाही' का भव्य विमोचन हुआ। इस समारोह में देश की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। पुस्तक का विमोचन केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. आनंद रंगनाथन और भारत सरकार की सचिव (राजभाषा) अंशुली आर्य ने मिलकर किया। यह क्षण न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए, बल्कि हिंदी भाषा और संस्कृति के लिए भी ऐतिहासिक रहा।
संतोष कुमार झा की रचनात्मक यात्रा :
एक कुशल प्रशासक और अनुभवी रेल अधिकारी के रूप में पहचाने जाने वाले संतोष कुमार झा का एक और पहलू है और वो है एक संवेदनशील कवि का। उनकी पूर्व प्रकाशित कृतियाँ “उन्मुक्त”, “सूरज का वारिस” और “फूल, कलम और बंदूक” पहले ही पाठकों के बीच लोकप्रिय हो चुकी हैं। अब उनकी नई पुस्तक स्याही का सिपाही उनके साहित्यिक सफर को और आगे ले जाती है। झा की कविताओं में समाज, संस्कृति और मानवीय भावनाओं का गहरा मेल देखने को मिलता है। उनकी लेखन शैली सरल, भावनात्मक और चिंतनशील है, जो पाठकों को आत्ममंथन करने पर मजबूर कर देती है।
स्याही का सिपाही क्यों खास है :
इस पुस्तक का शीर्षक ही इसे अद्वितीय बनाता है। स्याही का सिपाही केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति कवि की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इसमें जीवन के अनुभव, संवेदनाएँ और गहरी सोच शब्दों में ढलकर सामने आती हैं। इस कृति को हिंदी दिवस के दिन लॉन्च किया जाना इसकी प्रासंगिकता और महत्व को और बढ़ा देता है।
कोंकण रेलवे के हजारों कर्मचारियों और देशभर के साहित्य प्रेमियों के लिए संतोष कुमार झा का यह योगदान बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने यह साबित किया कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान भी उतना ही आवश्यक है। स्याही का सिपाही आने वाली पीढ़ियों को न केवल हिंदी साहित्य से जोड़ने का काम करेगा, बल्कि यह उन्हें अपनी भाषाई विरासत को संजोने के लिए भी प्रेरित करेगा।
कुल मिलाकर, स्याही का सिपाही संतोष कुमार झा की बहुमुखी प्रतिभा और हिंदी साहित्य के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण है। यह पुस्तक न सिर्फ उनकी रचनात्मकता को दर्शाती है, बल्कि यह हिंदी साहित्य को नई ऊर्जा और दिशा भी देती है। आने वाले समय में यह कृति हिंदी कविता जगत में अपनी गहरी छाप छोड़ने वाली है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
