प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में रेल नेटवर्क को मजबूती

"प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 9,072 करोड़ रुपये की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है।"

परियोजनाओं का विवरण और कवरेज

इन परियोजनाओं में शामिल हैं:

  • गोंडिया-जबलपुर दोहरीकरण
  • पुनारख-किउल तीसरी और चौथी लाइन
  • गम्हरिया-चांडिल तीसरी और चौथी लाइन

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड राज्यों के 8 जिलों को कवर करने वाली इन तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 307 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 9,072 करोड़ रुपये है और ये 2030-31 तक पूरी हो जाएंगी।

कनेक्टिविटी और विकास का प्रभाव

प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 5,407 गांवों की कनेक्टिविटी बढ़ेगी, जिनकी आबादी लगभग 98 लाख है।

बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने में सहायक होंगे। "ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।"

पीएम-गति शक्ति और लॉजिस्टिक दक्षता

"ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई हैं, जिनमें एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।" ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेंगी।

प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए बेहतर रेल संपर्क

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा, जिनमें शामिल हैं:

  • कचनार शिव मंदिर (जबलपुर) और कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (बालाघाट)
  • गंगुलपारा बांध और जलप्रपात, पेंच राष्ट्रीय उद्यान और धुआंधार जलप्रपात
  • बरगी बांध, गोमजी-सोमजी मंदिर और चंदिल बांध
  • दलमा हिल टॉप, हेसाकोचा जलप्रपात, रायजामा घाटी और दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य

माल ढुलाई और पर्यावरण को लाभ

ये परियोजनाएं कोयला, इस्पात, लौह अयस्क, सीमेंट, गिट्टी और पत्थर के टुकड़े, फ्लाई ऐश, उर्वरक, चूना पत्थर, मैंगनीज, डोलोमाइट, खाद्यान्न, पीओएल आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं।

क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप प्रति वर्ष 52 मिलियन टन (एमटीपीए) की अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता प्राप्त होगी।

पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन साधन होने के नाते, रेलवे जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने, तेल आयात (6 करोड़ लीटर) को कम करने और CO2 उत्सर्जन (30 करोड़ किलोग्राम) को कम करने में मदद करेगा, जो एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

Pratahkal Bureau

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