भारतीय रेल की तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 23,437 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन रेल परियोजनाओं को हरी झंडी दी, जिससे छह राज्यों के 19 जिलों में नेटवर्क विस्तार होगा।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्वीकृत नई रेल परियोजनाओं के तहत ट्रैक क्षमता बढ़ाकर माल ढुलाई और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने भारतीय रेल के बुनियादी ढांचे को नई गति देने वाला बड़ा निर्णय लेते हुए रेल मंत्रालय की तीन महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। कुल 23,437 करोड़ रुपये की लागत वाली ये परियोजनाएं वर्ष 2030-31 तक पूर्ण की जाएंगी और देश के छह राज्यों के 19 जिलों में रेल नेटवर्क का व्यापक विस्तार सुनिश्चित करेंगी।
स्वीकृत परियोजनाओं में नागदा–मथुरा तीसरी और चौथी लाइन, गुंटकल–वाडी तीसरी और चौथी लाइन तथा बुरहवल–सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से Indian Railways के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर की वृद्धि होगी, जिससे लाइन क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार होगा और रेल संचालन की दक्षता व सेवा विश्वसनीयता में सुधार आएगा।
यह मल्टीट्रैकिंग पहल संचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने की दिशा में निर्णायक कदम मानी जा रही है। परियोजनाएं प्रधानमंत्री के ‘न्यू इंडिया’ विजन के अनुरूप तैयार की गई हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्रीय विकास को गति देना और लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जिसमें मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। समेकित योजना और विभिन्न हितधारकों से परामर्श के बाद तैयार इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही को निर्बाध बनाया जाएगा।
इन परियोजनाओं से लगभग 4,161 गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा, जिनकी कुल आबादी करीब 83 लाख है। साथ ही, महाकालेश्वर, रणथंभौर नेशनल पार्क, कूनो नेशनल पार्क, केवलादेव नेशनल पार्क, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम स्थित श्री राघवेंद्र स्वामी मठ, कासापुरम का श्री नेट्टिकांति अंजनेय स्वामी मंदिर, श्यामनाथ मंदिर और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच और अधिक सुलभ होगी।
ये रेल मार्ग कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, लोहा-इस्पात, लौह अयस्क, कंटेनर और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। क्षमता विस्तार के बाद सालाना 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल परिवहन संभव होगा।
पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह पहल अहम है। रेल परिवहन के बढ़ते उपयोग से देश में लॉजिस्टिक लागत घटेगी, 37 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी और 185 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा, जो 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर प्रभाव उत्पन्न करेगा। यह निर्णय न केवल बुनियादी ढांचे को सशक्त करेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा देगा।

Pratahkal Bureau
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