मुंबई मंडल के विरार-सूरत रेल खंड के बीच स्थित पुल संख्या 370 ने अपनी पुरानी पहचान को पीछे छोड़ते हुए आधुनिकता का नया रूप प्राप्त कर लिया है। बिलीमोरा और अमलसाड स्टेशनों के मध्य स्थित इस महत्वपूर्ण पुल पर हाल ही में पुनरुद्धार (रिगर्डरिंग) का कार्य संपन्न हुआ, जो भारतीय रेलवे की इंजीनियरिंग दक्षता और समयबद्ध निष्पादन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। दो दिनों तक चली इस जटिल प्रक्रिया के दौरान अप और डाउन दोनों लाइनों पर चार-चार घंटे के विशेष ब्लॉक लिए गए, ताकि रेल परिचालन को प्रभावित किए बिना इस कठिन कार्य को अंजाम दिया जा सके।

इस पुनरुद्धार प्रक्रिया में तकनीकी कौशल और भारी मशीनरी का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। पुराने ढांचे को हटाते हुए 12.2 मीटर क्लियर स्पैन वाले छह स्टील गर्डर्स को सफलतापूर्वक डी-लॉन्च किया गया। इसके स्थान पर पीएससी (प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट) स्लैब का उपयोग किया गया है। कुल 21 स्लैब, जिनमें से प्रत्येक का वजन 35 टन है, को छह बैलास्ट रिटेनर के साथ सटीक रूप से अपनी निर्धारित स्थिति में स्थापित किया गया। इस विशालकाय निर्माण कार्य को संपन्न करने के लिए 400 मीट्रिक टन क्षमता वाली शक्तिशाली रोड क्रेन का उपयोग किया गया, जिसने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अपनी कार्यक्षमता का परिचय दिया।

इस व्यापक परियोजना की सफलता के पीछे एक विस्तृत पूर्व-योजना कार्य रही। परिचालन के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा को टालने के लिए अप और डाउन दोनों लाइनों पर फीडर वायर को नीचे किया गया। टीआरडी (ट्रैक्शन रोलिंग स्टॉक) विभाग का सक्रिय और करीबी समर्थन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सुनिश्चित किया गया, जिसके कारण क्रेन के संचालन और स्लैब की लॉन्चिंग निर्बाध रूप से संपन्न हो सकी। विभागीय अधिकारियों की निगरानी में की गई यह इंजीनियरिंग कवायद सुरक्षा मानकों के अनुरूप पूरी की गई।

पुल संख्या 370 का यह सफल पुनरुद्धार न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करता है, बल्कि विरार-सूरत खंड पर ट्रेनों की आवाजाही को और अधिक सुरक्षित एवं सुचारू बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पीएससी स्लैब के उपयोग से पुल की भार वहन क्षमता और दीर्घायु में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी, जो भविष्य में यात्रियों को एक सुरक्षित और विश्वसनीय यात्रा अनुभव प्रदान करने के संकल्प को दोहराता है। रेलवे का यह प्रयास न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि सुरक्षित रेल परिवहन के प्रति समर्पित एक निरंतर चलने वाली कड़ी का हिस्सा भी है।

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