अमृत भारत स्टेशन योजना: बारामती रेलवे स्टेशन का हुआ कायाकल्प, जल्द राष्ट्र को होगा समर्पित
मध्य रेलवे के बारामती रेलवे स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 11.40 करोड़ रुपये की लागत से भव्य कायाकल्प किया गया है। आधुनिक सुविधाओं और नई पहचान के साथ यह स्टेशन अब राष्ट्र को समर्पित होने के लिए तैयार है। जानिए इसकी खासियत।

तस्वीर में बारामती रेलवे स्टेशन का नव-निर्मित प्रवेश द्वार और आधुनिक परिसर दिखाई दे रहा है।
मध्य रेलवे के पुणे मंडल स्थित बारामती रेलवे स्टेशन का अब नया रूप नजर आएगा। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत आधुनिक और यात्री-सुविधाओं से लैस होकर यह स्टेशन अब राष्ट्र को समर्पित होने के लिए पूरी तरह तैयार है। 11.40 करोड़ रुपये की लागत से इस स्टेशन का पुनर्विकास किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के साथ ही स्थानीय पहचान को संरक्षित रखते हुए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। यह स्टेशन प्रतिदिन लगभग 1,800 यात्रियों और आठ यात्री ट्रेनों का संचालन करता है, जो इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र है।
बारामती रेलवे स्टेशन का इतिहास 1914 से जुड़ा है, जब इसे पहली बार नैरो-गेज रेलवे स्टेशन के रूप में जनता के लिए खोला गया था। क्षेत्रीय परिवहन आवश्यकताओं को देखते हुए बाद में इसे ब्रॉड-गेज में परिवर्तित किया गया, जिससे राज्य के रेल नेटवर्क के साथ इसकी कनेक्टिविटी और संचालन क्षमता में बड़ा सुधार हुआ। कृषि, उद्योग और शिक्षा के अग्रणी केंद्रों में शुमार बारामती अपनी सहकारी चीनी मिलों, डेयरी उद्योग, अंगूर की खेती और खाद्य प्रसंस्करण के लिए प्रसिद्ध है। यह नगर मेडिकल और इंजीनियरिंग उद्योगों के साथ ही कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों का गढ़ है। भीगवान पक्षी अभयारण्य, श्री सिद्धेश्वर मंदिर, बारामती एग्री टूरिज्म सेंटर और करहा नदी जैसे पर्यटन स्थल इस नगर की सांस्कृतिक महत्ता को बढ़ाते हैं।
पुनर्विकास के तहत स्टेशन की मुख्य इमारत के सौंदर्यीकरण के साथ प्रवेश द्वार का निर्माण, सर्कुलेटिंग एरिया का विकास और पार्किंग सुविधाओं को उन्नत किया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए नए शौचालय, आधुनिक वीआईपी लाउंज, प्रतीक्षा हॉल, प्लेटफॉर्म कवर और बेहतर प्लेटफॉर्म सतह का निर्माण किया गया है। स्टेशन पर आधुनिक साइनेज, पेयजल सुविधाएं और दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। स्टेशन के पुनर्विकास में बारामती की स्थानीय संस्कृति से प्रेरित वास्तुशिल्प तत्वों को शामिल किया गया है, जिससे आधुनिक सिद्धांतों और क्षेत्रीय सौंदर्य का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। स्टेशन का प्रवेश द्वार सीधे मुख्य सड़क से जुड़ा है, जहाँ ऑटो-रिक्शा और अन्य स्थानीय परिवहन सेवाएं अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी प्रदान करती हैं। 13 जुलाई 2026 को जारी इस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल निला ने बताया कि यह परियोजना यात्रियों को बेहतर सुविधा, सुरक्षा और सुगमता प्रदान करने के साथ ही क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई गति देगी।

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