साबरमती में 27 सितंबर 2026 को माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ₹1,542 करोड़ से अधिक की विभिन्न महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं का लोकार्पण, शिलान्यास एवं शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल, माननीय उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी तथा राज्य मंत्री श्रीमती दर्शनाबेन वाघेला, माननीय सांसद श्री हसमुखभाई पटेल, माननीय सांसद श्री दिनेशभाई मकवाणा, माननीय महापौर श्री हितेशभाई बारोट, अहमदाबाद एवं गांधीनगर क्षेत्र के माननीय विधायकगण सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे।

इन परियोजनाओं में WAG-12 साबरमती लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड का लोकार्पण, साबरमती–साणंद–भांडू मोटीदाऊ एवं साबरमती–कलोल–जखवाड़ा रेलखंड पर स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली का लोकार्पण, साबरमती–सरखेज रेल लाइन का दोहरीकरण, अहमदाबाद–पालनपुर एवं अहमदाबाद–सामाखियाली रेलखंड पर कवच प्रणाली का शिलान्यास तथा WAG-12 विद्युत इंजन एवं भारत की पहली LNG संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करना शामिल है।

अहमदाबाद मंडल में लगभग ₹411 करोड़ की लागत से कुल 404 किलोमीटर रेलखंड को स्वदेशी मानक कवच (Standard Kavach) प्रणाली से सुसज्जित किया जा रहा है। इसमें अहमदाबाद–पालनपुर सेक्शन के 157 किलोमीटर तथा अहमदाबाद–सामाखियाली सेक्शन के 247 किलोमीटर रेलखंड शामिल हैं।

अहमदाबाद–सामाखियाली मुख्य लाइन सेक्शन में कवच प्रणाली के कमीशनिंग के साथ ब्लॉक सेक्शनों में आधुनिक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध हो गई है। यह प्रणाली ट्रेनों के बीच सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने तथा मानवीय त्रुटियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कवच प्रणाली आमने-सामने की टक्कर के जोखिम को कम करने में सहायता करेगी, पीछे से होने वाली टक्कर की संभावना को कम करेगी और निर्धारित गति सीमा से अधिक गति होने पर सुरक्षा प्रदान करेगी। इससे ट्रेन परिचालन की सुरक्षा एवं विश्वसनीयता में वृद्धि होगी तथा आधुनिक स्वदेशी तकनीक के माध्यम से सुरक्षित रेल परिचालन को बढ़ावा मिलेगा।

अहमदाबाद मंडल के साबरमती–कलोल–भांडू मोटीदाऊ तथा साबरमती–साणंद–जखवाड़ा सेक्शनों में कुल 122.57 किलोमीटर रेलखंड पर लगभग ₹118.83 करोड़ की लागत से स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग (ABS) प्रणाली का प्रावधान किया गया है। यह आधुनिक प्रणाली ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने में सहायता करेगी तथा एक ही रेल मार्ग पर अधिक ट्रेनों का सुरक्षित और व्यवस्थित संचालन संभव बनाएगी। इससे सेक्शन की लाइन क्षमता में वृद्धि होगी, परिचालन अधिक सुचारु होगा तथा ट्रेनों की समयपालन क्षमता में सुधार होगा। इसके साथ सुरक्षित दूरी, अधिक लाइन क्षमता, बेहतर समयपालन, कम मानवीय हस्तक्षेप और अधिक कुशल परिचालन सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

भारतीय रेल ने स्वच्छ, पर्यावरण-अनुकूल एवं किफायती रेल परिचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार ट्रेन की Driving Power Car (DPC) में LNG आधारित Fuel प्रणाली को सफलतापूर्वक अपनाया है। साबरमती स्थित इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में 1400 HP क्षमता वाली 02 ट्रेनों की DPC को डीजल+LNG ड्यूल फ्यूल प्रणाली में परिवर्तित किया गया है। इसमें डीजल के स्थान पर लगभग 40 प्रतिशत तक LNG का उपयोग किया जा रहा है। दोनों DPC पर 2000 किलोमीटर से अधिक का सफल फील्ड ट्रायल पूरा किया जा चुका है।

LNG के उपयोग से ईंधन लागत में कमी के साथ-साथ CO₂, NOx एवं पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषक उत्सर्जनों को कम करने में सहायता मिलेगी। परीक्षण आंकड़ों के अनुसार, एक DPC से लगभग ₹11.9 लाख प्रतिवर्ष तथा 8-कोच रेक से लगभग ₹23.9 लाख प्रतिवर्ष की बचत संभव है। यह पहल ऊर्जा दक्षता, कम कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण-अनुकूल रेल परिवहन की दिशा में भारतीय रेल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल स्थित साबरमती लोकोमोटिव शेड को 300 अत्याधुनिक WAG-12 HHP विद्युत लोकोमोटिव के होमिंग एवं अनुरक्षण हेतु लगभग ₹700 करोड़ की लागत से विकसित किया गया है। WAG-12 लोकोमोटिव लगभग 12,000 HP क्षमता वाले उच्च क्षमता के विद्युत लोकोमोटिव हैं, जो भारी एवं लंबी मालगाड़ियों के संचालन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

300 WAG-12 लोकोमोटिव के अनुरक्षण के लिए M/s Madhepura Electric Locomotive Private Limited (MELPL) तथा लोकोमोटिव शेड, साबरमती के मध्य Maintenance Service Agreement (MSA) निष्पादित किया गया है। वर्तमान में 154 WAG-12 लोकोमोटिव होम किए जा चुके हैं तथा वर्ष 2027-28 तक कुल 300 लोकोमोटिव प्राप्त होने की योजना है।

WAG-12 अनुरक्षण शेड से लोकोमोटिव की उपलब्धता एवं विश्वसनीयता में वृद्धि, अत्याधुनिक सुविधाओं से अनुरक्षण दक्षता में सुधार, भारी एवं लंबी मालगाड़ियों के संचालन को बढ़ावा, माल ढुलाई क्षमता एवं परिचालन दक्षता में वृद्धि, वैज्ञानिक अनुरक्षण एवं बेहतर तकनीकी पर्यवेक्षण तथा भविष्य की अनुरक्षण आवश्यकताओं के लिए मजबूत एवं आधुनिक अवसंरचना उपलब्ध होने की दिशा में कार्य होगा।

लगभग ₹313.27 करोड़ की लागत से 21 किलोमीटर लंबे साबरमती–सरखेज रेलखंड के दोहरीकरण की परियोजना अहमदाबाद क्षेत्र में बढ़ती रेल यातायात आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना को मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस परियोजना के अंतर्गत साबरमती, गांधीग्राम, वस्त्रापुर एवं सरखेज स्टेशन शामिल हैं। परियोजना में 16 लघुपुल, 13 रोड अंडर ब्रिज (RUB), 1 मेजर पुल तथा 6 समपार फाटकों से संबंधित कार्य शामिल हैं।

साबरमती–सरखेज रेलखंड के दोहरीकरण से रेल लाइन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। अधिक ट्रेनों के सुचारु एवं निर्बाध संचालन में सुविधा मिलेगी और ट्रेनों के डिटेंशन एवं परिचालन बाधाओं में कमी आएगी। यात्री एवं माल यातायात के लिए बेहतर रेल संपर्क के साथ सरखेज–धोलेरा क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। इससे औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास एवं रोजगार के अवसरों को गति मिलने की दिशा में आधार तैयार होगा।

27 सितंबर को साबरमती में होने वाले इन लोकार्पण, शिलान्यास एवं शुभारंभ के साथ कवच, स्वचालित सिग्नलिंग, LNG आधारित ट्रेन संचालन, WAG-12 लोकोमोटिव अनुरक्षण और साबरमती–सरखेज दोहरीकरण जैसी परियोजनाएं रेल सुरक्षा, क्षमता, परिचालन दक्षता और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को एक साथ मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।

Pratahkal Bureau

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