पीएम मोदी की अध्यक्षता में ₹20,667 करोड़ के प्रोजेक्ट को मिली हरी झंडी, 220 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी 'नमो भारत' ट्रेनें।

अहमदाबाद, 15 मई 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने गुजरात के औद्योगिक और बुनियादी ढांचागत इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए देश के पहले ब्रॉड गेज सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को ऐतिहासिक मंजूरी प्रदान कर दी है। अहमदाबाद (सरखेज) से धोलेरा के बीच विकसित होने वाला यह 134 किलोमीटर लंबा डबल लाइन रेल प्रोजेक्ट न केवल भारतीय रेलवे का पहला स्वदेशी तकनीक आधारित उपक्रम होगा, बल्कि इस पर भविष्य में अत्याधुनिक ‘नमो भारत’ ट्रेनों का संचालन भी सुनिश्चित किया जाएगा। लगभग ₹20,667 करोड़ के भारी निवेश के साथ तैयार होने वाला यह कॉरिडोर गुजरात के प्रमुख आर्थिक केंद्रों जैसे धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (SIR), आगामी धोलेरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर को विश्वस्तरीय आधुनिक रेल कनेक्टिविटी से लैस करेगा।

तकनीकी और इंजीनियरिंग की दृष्टि से यह प्रोजेक्ट वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने जा रहा है क्योंकि इसकी डिजाइन गति 220 किलोमीटर प्रति घंटा और परिचालन गति 200 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। इस पूरे कॉरिडोर पर कुल 13 स्टेशनों का विकास किया जाएगा। इस वृहद इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना के अंतर्गत 3 मेगा ब्रिज, 74 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट, 39 रोड अंडर ब्रिज और 2 रेल ओवर रेल ब्रिज का निर्माण किया जाना है, जिससे कुल ट्रैक की लंबाई लगभग 293 किलोमीटर हो जाएगी। सरकार ने इस महात्वाकांक्षी लक्ष्य को आगामी 4 वर्षों के भीतर पूर्ण करने की समयसीमा तय की है।

परियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने इसे 'न्यू इंडिया' की आधुनिक, तीव्र और आत्मनिर्भर परिवहन व्यवस्था का प्रतीक बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे आत्मनिर्भर भारत के विजन को नई गति दे रहा है और स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह प्रोजेक्ट भविष्य में देशव्यापी सेमी हाई-स्पीड नेटवर्क के विस्तार का मुख्य आधार बनेगा। इसी क्रम में गुजरात सरकार के मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार दास ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल के मार्गदर्शन में यह कॉरिडोर राज्य को ग्लोबल मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में स्थापित करेगा, क्योंकि यह साबरमती, गांधीग्राम और वस्त्रपुर स्टेशनों पर मेट्रो एकीकरण, साबरमती में बुलेट ट्रेन और मोरैया में समर्पित फ्रेट कॉरिडोर के साथ समन्वय स्थापित करेगा।

अहमदाबाद के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री वेद प्रकाश ने इस परियोजना के क्रियान्वयन को गौरवपूर्ण बताते हुए जानकारी दी कि यह कॉरिडोर एक्सप्रेसवे के समानांतर नई एलाइनमेंट पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह दुनिया का पहला ब्रॉडगेज सेमी हाई-स्पीड कॉरिडोर होगा, जहां 220 किमी प्रति घंटे की गति प्राप्त की जाएगी, जबकि अब तक विश्व में ऐसी ट्रेनें केवल स्टैंडर्ड गेज पर चलती रही हैं। पूरी तरह "मेक इन इंडिया" तकनीक पर आधारित इस प्रोजेक्ट में सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक "कवच 5.0" सुरक्षा प्रणाली स्थापित की जाएगी।

इस परियोजना के पूर्ण होने पर अहमदाबाद और धोलेरा के बीच यात्रा का समय घटकर 1 घंटे से भी कम रह जाएगा और धोलेरा को सीधे अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से जुड़ने में मदद मिलेगी। इस प्रोजेक्ट से लगभग 284 गांवों की 5 लाख से अधिक आबादी को सीधा लाभ पहुंचेगा। आर्थिक और पर्यावरणीय मोर्चे पर यह कॉरिडोर प्रति वर्ष 20 लाख टन अतिरिक्त मालवहन क्षमता प्रदान करेगा और लॉजिस्टिक लागत में सालाना ₹54 करोड़ की बचत सुनिश्चित करेगा। इसके निर्माण चरण में ही 91 लाख मानव-दिवस रोजगार का सृजन होगा। साथ ही, प्रति वर्ष 0.48 करोड़ लीटर ईंधन की बचत और 2 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 10 लाख वृक्षारोपण के बराबर पर्यावरणीय लाभ है। प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत विकसित हो रहा यह कॉरिडोर भारत की लॉजिस्टिक दक्षता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली एक दूरदर्शी पहल है।

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