वयम रक्षामः: जब समंदर में उठीं खौफनाक लहरें; तब तटरक्षक जांबाजों ने कैसे लिखी शौर्य की नई गाथा?
भारतीय तटरक्षक बल (ICG) 1 फरवरी 2026 को अपना 50वां स्थापना दिवस मना रहा है। 1977 में गठित यह बल आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी तटरक्षक सेना है। जानिए 'वयम रक्षामः' के मंत्र के साथ समुद्र में तस्करी रोकने, समुद्री सुरक्षा और खोज-बचाव अभियानों में आईसीजी की भूमिका और इसके गौरवशाली इतिहास की पूरी जानकारी इस विशेष रिपोर्ट में।

Indian Coast Guard Day
Indian Coast Guard Day 2026 : विशाल नीली सीमाओं की रक्षा, लहरों के बीच अदम्य साहस और 'वयम रक्षामः' (हम रक्षा करते हैं) के उद्घोष के साथ भारतीय तटरक्षक बल (ICG) आज अपना 50वां स्थापना दिवस (Golden Jubilee) मना रहा है। 1 फरवरी का यह दिन केवल एक कैलेंडर तारीख नहीं, बल्कि उन जांबाज सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जो अपनी जान जोखिम में डालकर भारत की 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा को अभेद्य बनाते हैं।
शौर्य की विरासत: अंतरिम बल से स्वतंत्र सेना तक का सफर
भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना की कहानी दूरदर्शिता और रणनीतिक आवश्यकता की मिसाल है। 1970 के दशक में समुद्र के रास्ते बढ़ती तस्करी और समुद्री संपदा की रक्षा के लिए एक विशिष्ट बल की आवश्यकता महसूस की गई।
- ऐतिहासिक नींव: 1 फरवरी 1977 को अंतरिम भारतीय तटरक्षक बल का गठन किया गया, जिसमें शुरुआत में नौसेना से उधार लिए गए केवल दो जहाज और पांच नावें थीं।
- वैधानिक शक्ति: बल की बढ़ती उपयोगिता को देखते हुए, 19 अगस्त 1978 को 'तटरक्षक अधिनियम' पारित किया गया, जिसने इसे रक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वतंत्र सशस्त्र बल के रूप में स्थापित किया।
- अभूतपूर्व विस्तार: आज 50 वर्षों बाद, आईसीजी दुनिया के चौथे सबसे बड़े तटरक्षक बल के रूप में उभरा है, जिसके पास आधुनिक जहाजों, इंटरसेप्टर नौकाओं और अत्याधुनिक विमानों का विशाल बेड़ा है।
मिशन और कार्यक्षमता: लहरों पर पहरा
आईसीजी केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है; इसका कार्यक्षेत्र बहुआयामी है। रक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, यह बल निम्नलिखित महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाता है:
- समुद्री सुरक्षा व तस्करी पर लगाम: समुद्र के रास्ते हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकना।
- खोज एवं बचाव (SAR): चक्रवात या दुर्घटनाओं के दौरान संकट में फंसे मछुआरों और नाविकों की जान बचाना।
- पर्यावरण संरक्षण: समुद्री तेल रिसाव (Oil Spill) जैसी आपदाओं से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना।
- मत्स्य सुरक्षा: विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में अवैध मछली पकड़ने वाली विदेशी नौकाओं के खिलाफ कार्रवाई करना।
कानूनी और रणनीतिक महत्व :
1978 के अधिनियम के तहत, आईसीजी को भारतीय समुद्री जलक्षेत्र में किसी भी संदिग्ध जहाज की तलाशी लेने और उसे जब्त करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। यह बल नौसेना, सीमा शुल्क (Customs) और तटीय पुलिस के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है। 26/11 के मुंबई हमलों के बाद तटीय सुरक्षा के पुनर्गठन में आईसीजी की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ किया गया है, जिससे यह देश की आंतरिक सुरक्षा का एक अपरिहार्य हिस्सा बन गया है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
