‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर आज देशभर में राष्ट्रभक्ति की गूंज सुनाई दी। भारतीय सेना ने मां भारती को नमन करते हुए इस अमर गीत को वीरता, समर्पण और देशप्रेम की प्रतीक पुकार बताया।

भारत आज राष्ट्रभक्ति की उस गूंज को फिर से महसूस कर रहा है, जिसने कभी पूरे देश को आज़ादी के लिए एकजुट कर दिया था। ‘वंदे मातरम्’ मां भारती के चरणों में समर्पित यह अमर गीत आज अपनी 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। शुक्रवार को देशभर में इस ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय सेना ने अदम्य शौर्य और मातृभूमि के प्रति अटूट निष्ठा के साथ ‘मां भारती को नमन’ किया। सेना के जवानों ने राष्ट्रध्वज फहराकर सामूहिक रूप से वंदे मातरम् गाया और इस गीत के अमर संदेश “मां तुझे प्रणाम” को एक बार फिर जीवंत किया। इस 150 वी वर्षगांठके अवसर पर भारत में हर स्कुलों में इस गीत को अनिवार्य किया है।

भारतीय सेना ने अपने संदेश में कहा, “बंकिम चंद्र चटर्जी की कलम से निकला ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं था, यह हमारी आत्मा की पुकार था। इसने स्वतंत्रता संग्राम में नई चेतना जगाई और राष्ट्रभक्ति को स्वर दिया।” सेना ने इसे हर सैनिक के कदमों की लय, हर सलामी की प्रतिध्वनि और हर बलिदान की भावना बताया। “150 वर्षों बाद भी इसकी गूंज हर सैनिक के दिल में, हर शौर्य गाथा में और हर तिरंगे की लहर में सुनाई देती है,” सेना के बयान में यह भाव झलकता है।

‘वंदे मातरम्’ का इतिहास सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि उस भावना में दर्ज है, जिसने एक पराधीन राष्ट्र को आत्मबल से भर दिया। 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित यह गीत 1882 में उनके उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ। यहीं से यह राष्ट्रचेतना का प्रतीक बना और स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा। 1905 के बंग-भंग आंदोलन से लेकर 1947 की आज़ादी तक, यह गीत हर क्रांतिकारी की आवाज़ बना। रवींद्रनाथ टैगोर ने जब इसे सुरों में पिरोया, तो यह एक नारे से बढ़कर राष्ट्र की पहचान बन गया।

आज भी ‘वंदे मातरम्’ भारत की आत्मा में जीवित है। यह गीत हर सैनिक के क़दमों की थाप में, हर नागरिक की सांस में और हर पर्व पर फहराते तिरंगे के संग गूंजता है। यह केवल राष्ट्रगान से पहले गाया जाने वाला गीत नहीं, बल्कि उस मातृभूमि का प्रतीक है, जिसकी मिट्टी में हमारी पहचान बसती है।

150 वर्षों की यह यात्रा केवल एक गीत की नहीं, बल्कि उस भावना की है जिसने हमें एकजुट किया, जिसने हमें यह विश्वास दिलाया कि हम अपने देश के लिए जी सकते हैं और ज़रूरत पड़े तो मर भी सकते हैं। आज जब सेना ने मां भारती को नमन किया, तो वह नमन केवल इतिहास को नहीं, बल्कि उस अनंत भावना को था, जो भारत की धड़कनों में हमेशा जीवित रहेगी “वंदे मातरम्।”


Updated On 7 Nov 2025 3:18 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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