रक्षा क्षेत्र में एक मील का पत्थर

भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत में सोमवार, 30 मार्च 2026 को एक बड़ा इजाफा हुआ। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने नौसेना को एक साथ तीन फ्रंटलाइन युद्धपोत—INS दूनागिरी (INS Dunagiri), INS संशोधक (INS Sanshodhak) और INS अग्रे (INS Agray)—सौंपे हैं। 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत यह उपलब्धि न केवल भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते कदमों का प्रमाण भी है।

GRSE की अभूतपूर्व उपलब्धि

यह पहली बार है जब जीआरएसई ने एक साथ तीन प्रमुख नौसैनिक प्लेटफार्मों की डिलीवरी की है। यह उपलब्धि शिपयार्ड की उन्नत उत्पादन क्षमता, बेहतर परियोजना प्रबंधन और परिचालन दक्षता को रेखांकित करती है। इस गौरवशाली क्षण के साथ ही जीआरएसई अब तक कुल 118 युद्धपोत बना चुका है, जिनमें से 80 अकेले भारतीय नौसेना के लिए तैयार किए गए हैं। यह शिपयार्ड अब भारत के समुद्री रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का एक मजबूत स्तंभ बन गया है।

तीनों युद्धपोतों की मारक क्षमता और विशेषताएं

1. INS दूनागिरी: समंदर का अदृश्य शिकारी

प्रोजेक्ट 17ए (Project 17A) के तहत निर्मित यह दूसरा एडवांस्ड गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है।

  • डिजाइन और ताकत: 149 मीटर लंबा और 6,670 टन वजनी यह स्टील्थ फ्रिगेट अत्याधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है। इसमें ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें, एईएसए (AESA) रडार और एक एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगा है।
  • बहुआयामी संचालन: यह जहाज हवा, सतह और उप-सतह (पानी के नीचे) तीनों क्षेत्रों में ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसकी स्टील्थ तकनीक इसे दुश्मन के रडार की पकड़ से दूर रखती है।


2. INS संशोधक: समुद्री खोज और सर्वे का मास्टर

यह अपने वर्ग का चौथा और अंतिम 'सर्वे वेसल लार्ज' (SVL) है, जो नौसेना की हाइड्रोग्राफिक क्षमताओं को नई ऊंचाई देगा।

  • उपयोगिता: 110 मीटर लंबा यह जहाज तटीय और गहरे पानी के सर्वेक्षण, समुद्र विज्ञान संबंधी डेटा एकत्र करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • अतिरिक्त क्षमता: यह हेलीकॉप्टर संचालन, आपदा राहत (HADR) मिशनों और सीमित युद्ध भूमिकाओं में भी नौसेना की मदद करेगा।

3. INS अग्रे: तटीय सुरक्षा का रक्षक

यह एक एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटरक्राफ्ट (ASW-SWC) है, जिसे विशेष रूप से तटीय रक्षा कार्यों के लिए तैयार किया गया है।

  • स्वदेशी सामग्री: इसमें लगभग 88% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
  • हथियार: यह हल्के टॉरपीडो, एएसडब्ल्यू रॉकेट और 30 मिमी की नौसैनिक गन से लैस है। इसका 'वॉटरजेट प्रोपल्शन सिस्टम' उथले पानी में इसे जबरदस्त गति और मुड़ने की क्षमता प्रदान करता है।


आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

इन तीन प्लेटफार्मों का एक साथ बेड़े में शामिल होना जीआरएसई के मजबूत बुनियादी ढांचे को दर्शाता है। वर्तमान में यह शिपयार्ड कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें अतिरिक्त स्टील्थ फ्रिगेट, एएसडब्ल्यू जहाज और अपतटीय गश्ती जहाज (Offshore Patrol Vessels) शामिल हैं। भारत अब न केवल अपनी जरूरतों के लिए जहाज बना रहा है, बल्कि निर्यात (Export) के लिए भी प्लेटफार्म तैयार कर रहा है।


INS दूनागिरी, संशोधक और अग्रे का नौसेना में शामिल होना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा। यह सफलता रक्षा क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक उपक्रमों के बीच बढ़ते तालमेल और तकनीक के स्वदेशीकरण का सबसे बड़ा उदाहरण है। आने वाले समय में, ये युद्धपोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।

डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सामान्य जानकारी है, वित्तीय सलाह नहीं; बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिमों को देखते हुए निवेश का निर्णय अपने सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह पर ही लें।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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