थलसेना प्रमुख का सेना दिवस पर हुंकार 'नाम, नमक और निशान' का रणनाद; बताया भारतीय सेना का भविष्य विजन
सेना दिवस 2026 के अवसर पर थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 'नाम, नमक और निशान' के संकल्प को दोहराते हुए सेना के भविष्य का विजन पेश किया। उन्होंने वर्ष 2026-27 को 'नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता का वर्ष' घोषित किया और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की प्राप्ति में सेना की अहम भूमिका पर जोर दिया। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित यह खास रिपोर्ट।

"अपनी रेजिमेंट का गौरव (नाम), देश के प्रति वफादारी (नमक) और तिरंगे की आन-बान-शान (निशान)"—इन तीन शब्दों में भारतीय सेना की आत्मा बसती है। इसी ऐतिहासिक मूल मंत्र को दोहराते हुए बुधवार को सेना दिवस के पावन अवसर पर थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने राष्ट्र के प्रति सेना के अटूट समर्पण का संकल्प व्यक्त किया। यह केवल एक संबोधन नहीं था, बल्कि बदलते वैश्विक परिवेश में भारतीय सेना के 'आधुनिक अवतार' की एक स्पष्ट रूपरेखा थी।
शौर्य और सतर्कता का वर्ष: 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता
थलसेना प्रमुख ने अपने संदेश में बीते वर्ष की उपलब्धियों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने न केवल सीमाओं की रक्षा की, बल्कि 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे मिशनों के जरिए अपनी निर्णायक परिचालनात्मक क्षमता का लोहा भी मनवाया।
- मानवीय दृष्टिकोण: प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सेना ने 'मित्र देशों' और देश के भीतर राहत कार्यों में अग्रिम पंक्ति में रहकर सेवा की।
- वैश्विक शांति: संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों (UNPK) के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को एक 'विश्वसनीय शांतिदूत' के रूप में स्थापित किया।
- भविष्य की तैयारी: नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रित युद्ध कौशल
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भरता' और 'जॉइंटनेस' (तीनों सेनाओं का समन्वय) के विजन को आगे बढ़ाते हुए जनरल द्विवेदी ने वर्ष 2026 और 2027 के लिए एक क्रांतिकारी घोषणा की। उन्होंने इन वर्षों को 'नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता का वर्ष' घोषित किया है।
- लक्ष्य: सेना को एक डेटा-संचालित और पूरी तरह एकीकृत बल में बदलना।
- रणनीति: 'DIME-T' (डिप्लोमेसी, इन्फॉर्मेशन, मिलिट्री, इकोनॉमी और टेक्नोलॉजी) के ढांचे के भीतर मल्टी-डोमेन परिवेश में विजय सुनिश्चित करना।
- सुधार का दशक: 'इयर ऑफ रिफॉर्म्स' और 'डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन' के तहत व्यापक बदलावों को अंजाम देना।
वीर परिवारों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता :
औपचारिकताओं से परे, जनरल द्विवेदी ने सेना के असली स्तंभों—वीर माताओं, वीर नारियों और पूर्व सैनिकों—के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका त्याग ही राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव है और सेना उनके कल्याण के लिए सदैव कटिबद्ध है। उन्होंने उन वीर सपूतों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने कर्तव्य पथ पर अपने प्राणों की आहुति दे दी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
