सूर्य किरण एरोबेटिक टीम का जलवा: पाकिस्तान सीमा के करीब भारतीय जांबाजों ने दिखाए हवाई करतब, 10 हजार दर्शक हुए मंत्रमुग्ध
पाकिस्तान बॉर्डर से मात्र 260 किलोमीटर दूर चंडीगढ़ की सुखना झील पर भारतीय वायुसेना की 'सूर्य किरण' टीम ने हॉक एमके-132 जेट विमानों के साथ शानदार हवाई प्रदर्शन किया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुए इस एयरशो में लूप, बैरल रोल और इनवर्टेड फ्लाइंग जैसे रोमांचक करतब दिखाए गए।

Indian aerobatics showcase aerobatics near the Pakistan border
आसमान में जांबाजों का शौर्य: पाकिस्तान बॉर्डर के करीब भारतीय वायुसेना ने दिखाया दम, 'सूर्य किरण' के करतबों से थर्राया आसमान
चंडीगढ़:
सरहद से महज कुछ ही दूरी पर जब भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की गर्जना गूंजती है, तो वह केवल एक प्रदर्शन नहीं बल्कि देश की सुरक्षा और सामर्थ्य का संदेश होता है। शनिवार को चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील के ऊपर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। पाकिस्तान बॉर्डर से मात्र 260 किलोमीटर की दूरी पर भारतीय वायुसेना (IAF) की मशहूर 'सूर्य किरण' एरोबेटिक टीम (SKAT) ने अपनी कलाबाजी से हजारों दर्शकों का दिल जीत लिया।
यह एयरशो का दूसरा दिन था, जिसमें हॉक एमके-132 (Hawk MK-132) जेट विमानों ने नीले आसमान को तिरंगे के रंगों और हैरतअंगेज फॉर्मेशन्स से भर दिया। इस भव्य कार्यक्रम में पंजाब और हरियाणा के शीर्ष नेतृत्व ने भी शिरकत की।
वीआईपी मेहमानों की मौजूदगी और भारी उत्साह
इस शानदार हवाई प्रदर्शन को देखने के लिए पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अपनी पत्नियों के साथ विशेष रूप से मौजूद रहे।
सुखना झील के किनारे सुरक्षा और दर्शकों के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा प्रतिदिन 10,000 दर्शकों की क्षमता तय की गई थी। दर्शकों की सुविधा के लिए सात प्रमुख स्थानों से शटल बसें चलाई गईं और प्रवेश केवल डिजिटल पास के माध्यम से दिया गया।
आसमान में 'DNA' और 'युवा' का संदेश
लगभग आधे घंटे तक चले इस प्रदर्शन के दौरान हॉक एमके-132 जेट विमानों ने हवा में एक-दूसरे के बेहद करीब से गुजरते हुए 'लूप', 'बैरल रोल', 'इनवर्टेड फ्लाइंग' (उल्टा उड़ना) और 'स्टीप डाइव' जैसे कठिन और रोमांचक करतब दिखाए।
टीम ने रंगीन धुएं का उपयोग करते हुए आसमान में 'DNA' की आकृति बनाई और 'वाई' (युवा शक्ति का प्रतीक) जैसे फॉर्मेशन भी तैयार किए। ये विमान स्थानीय वायुसेना स्टेशन से उड़ान भरकर सीधे झील के ऊपर पहुंचे थे। सूर्य किरण टीम की यह खासियत है कि उनके विमानों के बीच की दूरी महज कुछ फीट की होती है, जो पायलटों के गजब के तालमेल और सटीकता को दर्शाती है।
सूर्य किरण टीम: विश्व स्तर की धाक
एसकेएटी (Surya Kiran Aerobatic Team) दुनिया की बेहतरीन एयरोबैटिक टुकड़ियों में से एक मानी जाती है। यह टीम न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय एयर शो में भी भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। चंडीगढ़ में पिछले 6 महीनों के भीतर यह टीम का दूसरा बड़ा प्रदर्शन था। इससे पहले सितंबर में मिग-21 के विदाई समारोह के दौरान भी इस टीम ने अपनी कलाबाजी दिखाई थी।
हॉक एमके-132 जेट विमानों की ताकत
इस प्रदर्शन में इस्तेमाल किए गए हॉक एमके-132 विमान भारतीय वायुसेना के बेड़े का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- प्रशिक्षण का आधार: यह एक एडवांस्ड ट्रेनर जेट है, जिसका उपयोग फाइटर पायलटों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाता है।
- इतिहास: इसे 23 फरवरी 2008 को भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था।
- निर्माण: ब्रिटिश कंपनी 'बीएई सिस्टम्स' (BAE Systems) द्वारा विकसित इस विमान के शुरुआती 24 यूनिट ब्रिटेन से आए थे।
- स्वदेशी स्पर्श: बाद में, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारत में ही 42 अतिरिक्त विमानों को असेंबल किया।
सुरक्षा और रणनीति के मायने
रणनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो पाकिस्तान सीमा के इतने करीब इस तरह का भव्य हवाई प्रदर्शन भारतीय वायुसेना की हाई-अलर्ट स्थिति और तैयारी को प्रदर्शित करता है। यह न केवल आम जनता में सुरक्षा का भाव पैदा करता है, बल्कि युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित भी करता है।
सुखना झील पर हुआ यह एयरशो तकनीक, साहस और अनुशासन का एक अनूठा संगम था। हॉक विमानों की तेज रफ्तार और पायलटों के सटीक नियंत्रण ने यह साबित कर दिया कि भारतीय वायुसेना किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। शाम ढलने तक दर्शकों की तालियां और विमानों की गूँज चंडीगढ़ की हवाओं में बनी रही।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
