सामरिक मजबूती: भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन सिंगापुर के चांगी नौसैनिक अड्डे पर पहुँचा
भारतीय नौसेना का प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1TS) 'आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष 2026' के तहत सिंगापुर के चांगी नौसैनिक अड्डे पर पहुंचा। आईएनएस तिर और आईएनएस सुजाता सहित चार जहाजों के इस बेड़े ने संयुक्त अभ्यास, सांस्कृतिक विनिमय और पेशेवर संवाद के माध्यम से भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और 'महासागर' विजन को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान की है।

ASEAN-India Maritime Cooperation 2026 : दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर की लहरों को चीरते हुए भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1TS) ने सिंगापुर के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चांगी नौसैनिक अड्डे पर लंगर डाल दिया है। 15 जनवरी 2026 को हुए इस आगमन ने न केवल दोनों देशों के बीच सदियों पुराने समुद्री संबंधों को पुनर्जीवित किया है, बल्कि 'आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष 2026' के उपलक्ष्य में एक शक्तिशाली सामरिक संदेश भी दिया है। इस बेड़े में आईएनएस तिर, आईएनएस शार्दुल, आईएनएस सुजाता और भारतीय तटरक्षक जहाज सारथी जैसे अत्याधुनिक पोत शामिल हैं, जो प्रशिक्षण और पेशेवर उत्कृष्टता का प्रतीक हैं।
साझा क्षमताओं और समुद्री सहयोग का संगम :
इस यात्रा का मूल उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच तकनीकी ज्ञान और परिचालन संबंधी अनुभवों का आदान-प्रदान करना है। सिंगापुर पहुंचने पर भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले ने प्रशिक्षुओं से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। बंदरगाह पर प्रवास के दौरान भारतीय और रिपब्लिक ऑफ सिंगापुर नेवी (RSN) के कर्मी विभिन्न गतिविधियों में संलग्न रहेंगे:
- पेशेवर संवाद: क्षमताओं को निखारने के लिए कमांडिंग अधिकारियों और समुद्री प्रशिक्षण एवं सिद्धांत कमान (MTDC) के बीच उच्च स्तरीय वार्ता।
- सूचना साझाकरण: अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारियों की टीम द्वारा इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर (IFC) में समुद्री सुरक्षा और डेटा विश्लेषण पर चर्चा।
- सांस्कृतिक विनिमय: भारतीय नौसेना बैंड द्वारा सिंगापुर के सार्वजनिक स्थलों पर प्रस्तुति और स्कूली बच्चों के लिए जहाजों का विशेष भ्रमण।
यात्रा का दूसरा चरण पूरी तरह से जनसंपर्क और भविष्य की चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित रहा। भारतीय दल ने श्री नारायण वृद्ध एवं नर्सिंग होम में सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेकर मानवीय संवेदनाओं का परिचय दिया। मैत्रीपूर्ण खेल मुकाबलों और संयुक्त योग सत्रों के माध्यम से दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच व्यक्तिगत और व्यावसायिक तालमेल को और अधिक सुदृढ़ किया गया।
रणनीतिक महत्व और भविष्य का प्रभाव :
यह मिशन भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति का एक अभिन्न अंग है, जो दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ सुरक्षा और विकास की सामूहिक उन्नति को प्राथमिकता देता है। यह पहल 'महासागर' (क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) की परिकल्पना को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम है। दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की यह सक्रिय उपस्थिति न केवल समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देती है, बल्कि हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) में भारत की नेतृत्वकारी और जिम्मेदार भूमिका को भी विश्व पटल पर रेखांकित करती है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
