सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा- चिकन नेक की सुरक्षा के लिए जमीन के नीचे दौड़ेगी रेल, भारत के रणनीतिक कदम से पड़ोसी देशों में हलचल।
पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा के लिए टिन माइल हाट से रंगपानी तक जमीन के नीचे बिछेंगी रेल पटरियाँ, सीमा पर बाड़बंदी कार्य में आएगी तेजी।

पश्चिम बंगाल में रणनीतिक सुरक्षा के तहत सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास निर्माणाधीन रेल सुरंग और सीमा पर गश्त करते सुरक्षा बल।
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाला रणनीतिक 'चिकन नेक' या सिलीगुड़ी कॉरिडोर अब सुरक्षा के एक नए युग में प्रवेश करने जा रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों के बाद, केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते समन्वय से इस संवेदनशील गलियारे को सुरक्षित करने की योजनाओं में अभूतपूर्व तेजी आने की उम्मीद है। करीब 40 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के हिस्से में अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने का प्रस्ताव रक्षा और परिवहन के दृष्टिकोण से गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह कदम विशेष रूप से डोकलाम गतिरोध जैसे संकटों के समय सेना की निर्बाध आवाजाही और रसद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
उत्तर-पूर्वी सीमा रेलवे के अनुसार, यह अंडरग्राउंड रेल लिंक बंगाल के टिन माइल हाट से रंगपानी स्टेशनों के बीच निर्मित किया जाएगा। कॉरिडोर का सबसे संकरा हिस्सा मात्र 25 किलोमीटर चौड़ा है, जो नेपाल, भूटान और बांग्लादेश जैसे देशों की सीमाओं से घिरा हुआ है। पटरियों को जमीन के नीचे ले जाने का निर्णय उन छिपे हुए खतरों को ध्यान में रखकर लिया गया है जो युद्ध की स्थिति में ऊपर की हवाई बमबारी या तोड़फोड़ से कनेक्टिविटी को बाधित कर सकते हैं। यह भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत चीन की चुंबी घाटी के करीब स्थित अपनी 'कमजोर नस' को एक मजबूत रक्षा किले में तब्दील करना है।
सीमा सुरक्षा के मोर्चे पर भी कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच 4,097 किलोमीटर लंबी सीमा का सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल के साथ लगता है। वर्तमान में करीब 570 किलोमीटर सीमा पर बाड़बंदी का काम लंबित है, जिसे अब प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। चीन द्वारा बांग्लादेश में ड्रोन फैक्ट्री लगाने और खुफिया निगरानी बढ़ाने के प्रयासों के बीच, घुसपैठ पर लगाम लगाना भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य हो गया है। केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब बीएसएफ और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल से न केवल अवैध घुसपैठ रुकेगी, बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक सुरक्षित जीवन रेखा भी सुनिश्चित होगी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
