'हमला सिर्फ 2 मिनट की दूरी..' नौसेना प्रमुख ने पहली बार खोला ऑपरेशन सिंदूर के पहले का प्लान
भारतीय नौसेना प्रमुख ने बताया कि 2025 के तनाव के दौरान सेना अरब सागर में पूर्ण हमले के लिए तैयार थी, जिसे पाकिस्तान की अपील के बाद अंतिम क्षणों में रोका गया।

भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी एक आधिकारिक बैठक के दौरान, जिन्होंने 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' की युद्ध तैयारियों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
साल 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान एक ऐसा निर्णायक क्षण आया, जब हालात पूर्ण सैन्य टकराव की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे थे। इस संवेदनशील दौर को लेकर भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी के ताज़ा खुलासे ने उस समय की गंभीरता को उजागर कर दिया है। उनके अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारत समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर एक बड़े हमले के लिए पूरी तरह तैयार था और केवल कुछ ही मिनटों की दूरी पर खड़ा था।
यह खुलासा उस समय की स्थिति को दर्शाता है, जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका था। भारतीय नौसेना की पूरी स्ट्राइक क्षमता सक्रिय कर दी गई थी और अरब सागर में तैनात युद्धपोतों को स्पष्ट ऑपरेशनल निर्देश मिल चुके थे। समुद्र में रणनीतिक रूप से तैनात सैन्य संसाधन हमले के लिए तैयार थे, जिससे संकेत मिल रहा था कि संघर्ष किसी भी क्षण नए आयाम में प्रवेश कर सकता है। हालांकि, अंतिम क्षणों में पाकिस्तान की ओर से “काइनेटिक एक्शन” रोकने की अपील किए जाने के बाद इस प्रस्तावित हमले को रोक दिया गया। इस निर्णय ने न केवल तत्काल टकराव को टाल दिया, बल्कि एक संभावित व्यापक सैन्य संघर्ष को भी सीमित कर दिया।
Indian Navy was 'minutes away from striking Pakistan' in May 2025 says Indian Navy Chief Admiral Dinesh Tripathi
— Sidhant Sibal (@sidhant) April 1, 2026
"During Operation Sindoor Indian Navy was just minutes away from striking Pakistan from sea, when they requested stoppage of kinetic actions" pic.twitter.com/VzsgrfBf89
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में 2025 का पहलगाम हमला था, जिसने दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव को तेजी से बढ़ा दिया। इस हमले के जवाब में भारत ने बहु-स्तरीय सैन्य कार्रवाई की, जिसमें हवाई हमले, ड्रोन ऑपरेशन और मिसाइल स्ट्राइक शामिल थे। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य पाकिस्तान के सैन्य ढांचे और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाना था, जिससे उसकी आक्रामक क्षमता को कमजोर किया जा सके।
इस संघर्ष में भारतीय नौसेना की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। अरब सागर में एक शक्तिशाली कैरियर बैटल ग्रुप की तैनाती की गई, जिसमें विमानवाहक पोत INS विक्रांत भी शामिल था। यह तैनाती केवल सुरक्षा उपाय नहीं थी, बल्कि स्पष्ट रूप से आक्रामक तैयारी और सामरिक दबाव का संकेत थी। समुद्री मोर्चे पर इस स्तर की तैयारी ने यह दर्शाया कि भारत किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार था।
एडमिरल त्रिपाठी के इस आधिकारिक बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत ने जहां एक ओर अपनी सैन्य क्षमता का पूरा प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर अत्यंत संवेदनशील परिस्थितियों में संयम और संतुलन भी बनाए रखा। यह भी संकेत मिलता है कि अंतिम क्षणों में कूटनीतिक या बैकचैनल संवाद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके चलते हालात और अधिक बिगड़ने से रोके जा सके।
यह पहली बार है जब सार्वजनिक रूप से यह जानकारी सामने आई है कि भारत समुद्र से बड़े हमले के कितने करीब पहुंच गया था। यह खुलासा न केवल भारतीय नौसेना की तत्परता और रणनीतिक क्षमता को रेखांकित करता है, बल्कि आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को भी सामने लाता है, जहां संघर्ष एक साथ जमीन, आसमान और समुद्र—तीनों मोर्चों पर फैल सकता है।
इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के किसी भी संघर्ष में त्वरित निर्णय, रणनीतिक संतुलन और कूटनीतिक संवाद कितने निर्णायक साबित हो सकते हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का यह अध्याय भारत की सैन्य तैयारी, संयम और रणनीतिक परिपक्वता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
