भारत की सीमाओं पर 'अदृश्य दुश्मन' की दस्तक: LOC से LAC तक सुरक्षा बलों का पहरा, क्या है नया 'ड्रोन संकट'?
भारत की सीमाओं (LOC और LAC) पर सुरक्षा बलों ने हाई अलर्ट जारी किया है। पाकिस्तानी ड्रोन की बढ़ती गतिविधियों और सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशों के बीच भारतीय सेना और BSF की सख्त निगरानी की विस्तृत रिपोर्ट।

आज जब देश अपनी प्रगति की नई इबारत लिख रहा है, हमारी सीमाओं पर तैनात सजग प्रहरी एक पल के लिए भी पलकें नहीं झपका रहे हैं। 15 फरवरी 2026 की सुबह भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और नियंत्रण रेखा (LOC) से लेकर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) तक एक विशेष सतर्कता के साथ शुरू हुई है। रक्षा मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने हालिया इनपुट्स के बाद सीमाओं पर 'हाई अलर्ट' घोषित कर दिया है।
LOC पर 'ड्रोन' ने बढ़ाई सिरदर्दी
पिछले 48 घंटों में जम्मू-कश्मीर के राजौरी, पुंछ और सांबा सेक्टर में संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन की गतिविधियों में अचानक तेजी आई है। सुरक्षा बलों के अनुसार, ये ड्रोन न केवल जासूसी की नीयत से भारतीय क्षेत्र में घुस रहे हैं, बल्कि इनके जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की खेप गिराने की कोशिशें भी की जा रही हैं।
आज सुबह की रिपोर्ट के मुताबिक, सांबा सेक्टर में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने एक संदिग्ध उड़ती हुई वस्तु पर फायरिंग की, जिसके बाद वह वापस सीमा पार भाग गया। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दी के कम होते ही और धुंध के बीच इन छोटे, 'अदृश्य दुश्मनों' का इस्तेमाल घुसपैठ के नए रास्तों की रेकी करने के लिए किया जा रहा है। भारतीय सेना ने अब सीमा पर आधुनिक 'एंटी-ड्रोन सिस्टम' और जैमर्स की तैनाती बढ़ा दी है।
LAC पर चीन के साथ बातचीत और सतर्कता का संतुलन
वहीं दूसरी ओर, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) यानी चीन से सटी सीमा पर स्थिति 'सावधानीपूर्वक निगरानी' वाली बनी हुई है। हाल ही में 11 फरवरी को भारत और चीन के बीच हुई उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत के बाद तनाव कम करने की कोशिशें तो हुई हैं, लेकिन भारतीय सेना कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक, भारतीय सेना ने अपनी लॉजिस्टिक क्षमता को काफी मजबूत कर लिया है। हाल ही में असम में एक नेशनल हाईवे पर 'इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप' का उद्घाटन इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी वायु सेना को सीमा के बेहद करीब और सक्रिय रखना चाहता है। रक्षा जानकारों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर सेनाओं की पूर्ण वापसी नहीं होती, तब तक 'यथास्थिति' को बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी ही एकमात्र विकल्प है।
घुसपैठ की कोशिशें नाकाम: सुरक्षा बलों का पराक्रम
फरवरी के इस महीने में जब बर्फ पिघलने लगती है, तो घुसपैठ की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। हाल ही में सांबा और पुंछ सेक्टर में घुसपैठ की कुछ बड़ी कोशिशों को सेना ने नाकाम किया है। पकड़े गए घुसपैठियों से मिली जानकारी ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। आतंकी संगठन अब पुराने पारंपरिक रास्तों के बजाय तकनीक का सहारा ले रहे हैं।
जवानों का मनोबल बढ़ाने के लिए वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लगातार अग्रिम चौकियों का दौरा कर रहे हैं। शून्य से नीचे के तापमान में भी हमारे सैनिक 'ऑपरेशन सिंदूर' और अन्य सुरक्षा ग्रिड्स के माध्यम से देश की रक्षा में मुस्तैद हैं।
आम नागरिकों की भूमिका और सुरक्षा तंत्र
सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों को भी सतर्क रहने को कहा गया है। सुरक्षा बलों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर 'विलेज डिफेंस कमेटियों' को सक्रिय किया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत मिल सके। पुलिस और खुफिया एजेंसियां (IB और RAW) लगातार समन्वय के साथ काम कर रही हैं।
तकनीक और साहस का संगम
आज की स्थिति यह स्पष्ट करती है कि भारत की सीमा सुरक्षा अब केवल कटीले तारों और चौकियों तक सीमित नहीं रह गई है। LOC पर ड्रोन की गूँज और LAC पर भू-राजनीतिक हलचल इस बात का संकेत है कि हमारे दुश्मनों के तरीके बदल रहे हैं। लेकिन, इन चुनौतियों के बीच भारतीय सुरक्षा बलों का अटूट साहस और तकनीक का समावेश एक अभेद्य ढाल बनकर उभरा है। हाई अलर्ट का यह दौर केवल सतर्कता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमारे सैनिकों के उस निस्वार्थ समर्पण की कहानी है, जो शून्य से नीचे के तापमान और दुर्गम पहाड़ियों में भी देश की अखंडता के लिए अडिग खड़े हैं। 'एंटी-ड्रोन' प्रणालियों और आधुनिक सर्विलांस ने उनकी क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे अब 'अदृश्य दुश्मनों' के मंसूबे भी कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। 2026 का भारत आज शांति का पक्षधर तो है, लेकिन अपनी सीमाओं पर उठने वाली हर टेढ़ी नज़र को कुचलने का माद्दा भी रखता है। अंततः, यह सुरक्षा तंत्र और नागरिकों का सेना पर भरोसा ही है, जो हमें एक सुरक्षित और समृद्ध कल की ओर ले जा रहा है।भारतीय सेना का संदेश साफ है शांति की हमारी इच्छा को हमारी कमजोरी न समझा जाए।

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